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राजस्थानः पृथक-वास के दौरान प्रवासी मजदूरों को शिक्षित करने का अनूठा प्रयास

Fri, 01 May 2020 08:18 PM IST
Rohit Ojha न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Rohit Ojha Updated Fri, 01 May 2020 08:18 PM IST
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Rajasthan A unique attempt to educate migrant laborers during isolation
आइसोलेशन सेंटर - फोटो : अमर उजाला

राजस्थान के नागौर जिले में कोरोना वायरस महामारी की वजह से लागू लॉकडाउन के दौरान एक सरकारी स्कूल के कर्मचारियों ने पृथक-वास में रह रहे मध्यप्रदेश और बारां के प्रवासी मजदूरों को शिक्षित करने का नायाब प्रयास शुरू किया है।

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नागौर जिले के डोडियाना में मध्यप्रदेश और राजस्थान के बांरा जिले के 19 प्रवासी मजदूर बंद के चलते सरकारी उच्च माध्यमिक विद्यालय में पृथक-वास में रह रहे है। उन्हें प्रतिदिन स्कूल कर्मचारी शिक्षित करने का प्रयास कर रहे हैं। ये सभी लोग अब अपना अपना नाम लिख और पढ़ सकते हैं। इन्हें 10 तक गिनती भी समझ आ गई है।
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विद्यालय के शिक्षक सुशील कुमार ने बताया कि अपने घर जा रहे मजदूर बंद की वजह से यहां फंस गए हैं। उन्हें रोका गया था और स्कूल में पृथक-वास में रखा गया है। हमने इन्हें पृथक-वास के दौरान 'अक्षर ज्ञान' पढ़ाने का विचार किया। कुछ एक को छोड़कर अन्य सभी लोग अपना नाम लिख और पढ़ सकते हैं। 
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शून्य से लेकर 10 तक की गिनती का ज्ञान इन्हें हो गया जिससे अब ये मोबाइल पर नंबर डायल कर उसे सुरक्षित सेव कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि प्रवासी कामगार अपने घरों को वापस लौटने को लेकर चिंतित है। इसलिए इन्हे शांत रखने के लिये शैक्षिक ज्ञान देना शुरू किया गया है।

कुमार ने बताया कि जिन लोगों के घर मध्यप्रदेश में है उन्हें सरकार की ओर से यातायात की स्वीकृति मिलने के बाद वापस घर भेज दिया गया है, जबकि राजस्थान के प्रवासियों को भी शीघ्र वापस घर भेजा जायेगा।

अंग्रेजी में लिखना नहीं आता था नाम
फंसे हुए प्रवासी मजदूरों में से एक आठवीं कक्षा तक पढ़े मनोज (18) ने बताया कि मुझे अपने रिश्तेदारों का नाम अंग्रेजी में लिखना नहीं आता था, यहां के अध्यापकों ने मुझे पढ़ाया। अध्यापक प्रतिदिन कक्षा लेते हैं। उन्होंने गणित के सवालों को हल करने में मदद की और जो लोग अपना नाम लिखना और पढ़ना नहीं जानते थे उन्हें सिखाया है। मनोज अपने परिवार के सदस्यों के साथ मध्यप्रदेश के गुना जिले में 29 अप्रैल को वापस घर लौट गया।

स्कूल प्रशासन ने बताया कि पृथक-वास में रहने वाले ये लोग मेडता सिटी के मेघदंड गांव में खेतों में फसल जुताई के लिए आए थे। इन्होंने यहां 15 दिन काम किया और उसके बाद कोरोना वायरस के सामुदायिक संक्रमण के फैलने के भय के चलते राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की घोषणा हो गई थी।


इन्हें सरकारी अधिकारियों ने मार्च के अंतिम सप्ताह में रोका था और इन सभी को एक सरकारी स्कूल में पृथक-वास में रखा गया। सम्पूर्ण राजस्थान में 22 मार्च से लॉकडाउन जारी है। राज्य में कोविड-19 से 61 लोगों की मौत हो गई है और राज्यभर में शुक्रवार तक 2,642 संक्रमित मामले सामने आ चुके है।

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