Rajasthan: महाराणा प्रताप की जयंती आज, पाली में ननिहाल में हुआ था शूरवीर प्रताप का जन्म, कार्यक्रम हुए आयोजित
महाराणा प्रताप जन्म स्थली और नगर परिषद के संयुक्त तत्वावधान में वीर शिरोमणी महाराणा प्रताप की जन्म जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई।
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हिंदुआ सूरज वीर शिरोमणी महाराणा प्रताप की 483वीं जन्म जयंती उनके स्मारक पाली के जूनी कचहरी पर धूमधाम से मनाई गई। महाराणा प्रताप जन्म स्थली स्मारक विकास समिति और नगर परिषद के संयुक्त तत्वावधान में स्मारक स्थल पर आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। पाली शहर से महाराणा कमांडो फोर्स द्वारा लक्ष्मण सिंह कुम्पावत के नेतृत्व में, शिवसेना ने जिला प्रमुख सोहनराव के नेतृत्व में, भारत रक्षा मंच की मातृशक्ति नीलम देसाई के नेतृव में वाहन रैली के रूप में स्मारक स्थल पर पहुंचे, जहां पर महाराणा प्रताप के जयकारों से माहौल गुंजायमान हो गया।
विधायक ज्ञानचंद पारख, सभापति रेखा राकेश भाटी, पूर्व सभापति महेंद्र बोहरा,पूर्व सांसद पुष्प जैन, उपसभापति ललित प्रितमानी और पार्षदों ने भी भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ माल्यार्पण किया। विश्व हिंदू परिषद, आर्य वीर दल बजरंग दल, भारत स्वाभिमान ट्रस्ट, दुर्गावाहिनी और भाजपा महिला मोर्चा के पदाधिकारियों ने भी माल्यार्पण कर वीर प्रताप के चरणों मे शीश नवाया।
इस अवसर पर महाराणा प्रताप के जूनी कचहरी स्थित ननिहाल में महाराणा प्रताप जन्मस्थली विकास समिति अध्यक्ष एडवोकेट शैतान सिंह सोनिगरा के नेतृत्व में महाराणा प्रताप की आदमकद और अश्वारूढ़ प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। इसके पश्चात जनप्रतिनिधियों और शिवसेना, बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद,महाराणा प्रताप कमांडो फोर्स, दुर्गा वाहिनी, भारत रक्षा मंच, भारत स्वाभिमान ट्रस्ट, आर्य वीर दल द्वारा शहर भर से आने वाली भगवा रैलियों का जूनी कचहरी में स्वागत किया गया।
जूनी कचहरी स्थित इसी किले में गूंजी थी महाराणा की किलकारी
शौर्य, वीरता और साहस सहित स्वाभिमान का प्रतीक रहे महाराणा प्रताप का नाम आज भी इसलिए गर्व से लिया जाता है क्योंकि इन्होंने मुगल शासकों के आगे कभी झुकना स्वीकार नहीं किया।
महाराणा प्रताप का जन्म पाली स्थित उनके ननिहाल में हुआ था। पाली में जूनी कचहरी स्थित एतिहासिक भव्य द्वार करीब एक हजार साल पुराना है।
जहां महाराणा प्रताप के नाना अखेराज सोनिगरा अपने परिवार के साथ रहते करते थे। वर्तमान में जिस स्थान को जूनी कचहरी के नाम से जाना जाता है किसी समय यहीं स्थित किले में महाराणा प्रताप का जन्म हुआ था। महाराणा प्रताप की माता का पाली में पीहर था और उस जमाने में पीहर में ही महिला का प्रसव करवाया जाता था।
इसी परंपरा के चलते 9 मई 1540 विक्रम संवत 1597 ज्येष्ठ शुक्ल तृतीय को पाली के जूनी कचहरी में अपने नाना अखेराज सोनिगरा के यहां महाराणा प्रताप का जन्म हुआ था। महाराणा प्रताप की माता मेवाड़ के महाराणा उदयसिंह की धर्मपत्नी थीं जिनका नाम रानी जयंतीबाई सोनिगरा था।
करीब 1 हजार वर्ष पुराना प्रवेश द्वार आज भी है मौजूद
पाली का जूनी कचहरी परिसर पुरातन काल में महाराणा प्रताप के नाना अखेराज सोनिगरा और उनके परिवार के निवास स्थान था। उस स्थान पर आज भी करीब 1 हजार वर्ष पुराना ये गेट मौजूद है और ऐतिहासिक यादों को संजोए हुए है। पिछले कुछ वर्षों से इस स्थान को महाराणा प्रताप की जन्म स्थली के रूप में विकसित करने का कार्य किया जा रहा है। इसके तहत यहां पर महाराणा प्रताप की एक अश्वारूढ़ प्रतिमा सहित दो प्रतिमाएं यहां स्थापित की जा चुकी हैं।