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अगस्ता पर गरमाई सियासत, कांग्रेस ने मांगा राजे का इस्तीफा

Thu, 28 Apr 2016 09:58 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जयपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, जयपुर Updated Thu, 28 Apr 2016 09:58 PM IST
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Political turmoil in Rajasthan at Augusta

अगस्ता मामले में केन्द्र में मचे हंगामे के बीच राजस्थान की भी राजनीति में उबाल आ गया है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पर लगे आरोपों के चलते प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलय ने मुख्यमंत्री पर कार्रवाई की मांग की है। 

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इधर, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी ने राजे पर लगे आरोप बेबुनियाद बताए और कहा कि कांग्रेस यह रिपोर्ट ढंग से पढ़ लेती तो आरोप लगाती ही नहीं। उल्लेखनीय है कि अगस्ता हेलीकॉप्टर वर्ष 2011 में हुई दुर्घटना के बाद स्टेट हैंगर पर धीरे-धीरे कबाड़ में बदल रहा है। राज्य सरकार ने इस हेलीकॉप्टर की खरीद 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के अनुमोदन के बाद की थी।
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पायलट का कहना है कि राजे पर अगस्ता वेस्टलैण्ड खरीद में घोटाले के आरोप कांग्रेस पार्टी नहीं लगा रही। आरोप देश की प्रतिष्ठित जांच एजेंसी कैग की रिपोर्ट में लगाए गए हैं। अब तो प्रधानमंत्री और भाजपा नेतृत्व को हिम्मत दिखाते हुए अपनों पर भी कार्रवाई करनी चाहिए। राजे पर पहले ललित मोदी प्रकरण, फिर खान घोटाले और अब अगस्ता वेस्टलैण्ड खरीद मामले में गड़बड़ी के आरोप हैं।

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राजे के कार्यकाल में खरीदा गया था अगस्ता हेलीकॉप्टर

Political turmoil in Rajasthan at Augusta

उधर, परनामी ने मीडिया से कैग रिपोर्ट के जवाब में राजस्थान विधानसभा की जनलेखा समिति की वर्ष 2013-14 की रिपोर्ट पेश कर कहा कि इस रिपोर्ट में अगस्ता पर किए गए खर्च को सही बताया गया है। जब यह रिपोर्ट बनी तब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और कांग्रेस के विधायक भी इस समिति के सदस्य थे।

राजे के पिछले कार्यकाल में 2005 में वीआईपी उडानों के लिए करीब 20 करोड़ की लागत में हेलिकॉप्टर खरीदा गया था। 31 मार्च 2008 को समाप्त हुए वित्त वर्ष में कैग की रिपोर्ट में इस सौदे को लेकर कई अनियमितताओं का जिक्र किया गया था। 

कैग के अनुसार इससे खजाने को करीब 1.14 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। यह हेलिकॉप्टर सजावटी हाथी साबित हुआ क्योंकि प्रशिक्षित पायलट के अभाव में यह खड़ा रहा एवं पहली बार 2007 में ही उड़ा। इस तरह जहां हेलिकॉप्टर की खरीद एवं रखरखाव पर काफी पैसा खर्च किया गया, वहीं पायलट न होने से दूसरे हेलिकॉप्टरों पर भी काफी खर्चा हुआ। 

कैग की रिपोर्ट में बताया गया है कि हेलिकॉप्टर 29 जुलाई 2005 में दिल्ली पहुंचा और 22 सितंबर 2005 को जयपुर आया और 2007 तक इसका कोई उपयोग नहीं हुआ, क्योंकि उड़ान के लिए आवश्यक प्रशिक्षण जनवरी 2006 में सिर्फ एक पायलट को दिया गया। 

इस्तेमाल के अभाव में हैंगर में ही खड़ा है हेलीकॉप्टर

Political turmoil in Rajasthan at Augusta
augusta westland - फोटो : augusta westland

जबकि अनुबंध की शर्तों के अनुसार फर्म को दो पायलट को प्रशिक्षण देना था। इसके अलावा एक अतिरिक्त पायलट को प्रशिक्षण एवं तीन हफ्तों के लिए दो टेक्नीशियन को मैंटनेंस ट्रेनिंग देनी थी।

इस हेलीकॉप्टर में तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत 20 नवंबर 2011 को सवार हुए थे, तब चूरू के नजदीक ये दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। उस समय महानिदेशक नगर एवं विमानन तथा राजस्थान सरकार ने जांच के आदेश दिए थे, जिसे अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। स्टेट हैंगर में खराब पड़े इस हैलीकॉप्टर पर राजस्थान सरकार को रखरखाव में दो लाख रुपए प्रति वर्ष खर्च करने पड़ रहे हैं।

अगस्ता की नीलामी के लिए इसकी कीमत 12.40 करोड़ रखी है। दो साल में इसकी नीलामी नहीं हो सकी है। सूत्रों के अनुसार दुर्घटना के तुरंत बाद इसकी टूटी ब्लेड की मरम्मत होती, तो डेढ़ करोड़ रुपए लगते, लेकिन इतने साल से खराब होने के कारण खड़े रहने से पूरी मरम्मत में चार करोड़ रुपए का खर्चा आ सकता है।

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