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Rajasthan: नींद में भी फायर-फायर बड़बड़ाता है बच्चा, 14-15 घंटे खेलता था PUBG, परिजनों ने हाथ-पैर बांधकर रखा

Wed, 12 Jul 2023 03:37 PM IST
उदित दीक्षित न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर Published by: उदित दीक्षित Updated Wed, 12 Jul 2023 03:37 PM IST
सार

पब्जी और फ्री फायर जैसे गेम बच्चों का जीवन खराब कर रहे हैं। अलवर में एक 14 साल का बच्चा इन गेमों का इस कदर शिकार हुआ कि वह अपना मानसिक संतुलन ही खो बैठा। वह सोते हुए भी फायर-फायर बड़बड़ाता है और उसकी उंगलियां भी चलती रहती हैं। फिलहाल, उसका इलाज चल रहा है।

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Playing PUBG for 14-15 hours disturbs mental balance of minor child even in sleep he shouts fire fire
14 साल का बच्चा हुआ पबजी का शिकार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फायर-फायर...साइड से मार साइड...  16 साल का एक बच्चा रात को सोते समय भी इस तरह के कई शब्द बड़बड़ाता है। नींद में भी उसके हाथ चलते रहते हैं। उसने खाना-पीना भी छोड़ दिया है। इस बच्चे को मोबाइल पर पबजी खेलने की ऐसी लत पड़ी कि वह अपना मानसिक संतुलन खो बैठा है। दिव्यांग संस्थान के होस्टल में बच्चे का इलाज चल रहा है। उसकी हालत इतनी खराब है कि उसे हाथ-पैर बांधकर रखा गया है। 

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ये हैरान करने वाला मामला राजस्थान के अलवर की मुंगास्का कॉलोनी का है। यहां रहने वाला एक 14 साल का राहुल (बदला हुआ नाम) 7वीं कक्षा में पढ़ता है। पिछले करीब सात महीने से वह मोबाइल पर पबजी और फ्री फायर जैसे ऑनलाइन गेम खेल रहा था। उसे गेम की ऐसी लत लगी कि वह दिन में 14-15 घंटे गेम खेलता था। रात में चादर और रजाई ओढ़कर गेम खेलता ताकि परिजनों को पता ना चले। इतना गेम खेलने के कारण वह बीमार हो गया और उसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया। 

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जानकारी के अनुसार राहुल के माता-पिता ने उसे ऑनलाइन पढ़ाई के लिए मोबाइल दिया। इसके लिए उन्होंने घर पर बाईफाई भी लगवाया था। इस कारण नेट की कोई समस्या नहीं थी, इसलिए वह ज्यादातर समय मोबाइल पर गेम खेलकर ही बिताता था। परिजनों को इसका पता चला तो उन्होंने उसे गेम नहीं खेलने के लिए कहा, लेकिन वह नहीं माना।
 

परिजनों ने राहुल के साथ ज्यादा टोका-टाकी की तो वह दो बार गुस्सा होकर घर से चला गया। परिजनों ने बड़ी मुश्किल से उसे रेवाडृी में तलाश किया और पकड़कर घर लाए। इसके बाद अप्रैल से मई तक उसे घर में बांधकर रखा। इसी बीच उसकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। परिजनों ने उसे जयपुर के एक अस्पताल में डॉक्टरों को दिखाया, लेकिन उसकी तबीयत में सुधार नहीं हुआ। अभी उसे अलवर के एक हॉस्टल में रखा गया है, जहां मनोरोग चिकित्सक और साइकोलॉजिस्ट उसका इलाज कर रहे हैं। साथ ही स्पेशल काउंसलर भी उसके स्वास्थ्य पर नजर बनाए हुए हैं।

हारना नहीं चाहता खिलाड़ी और पड़ जाती है लत
पबजी और फ्री फायर गेम की सबसे बड़ी बात ये है कि इस गेम को खेलने वाला कोई भी खिलाड़ी हारना नहीं चाहता। अगर, वह हार जाता है तो जीतने के लिए गेम को बार-बार खेलता है। इससे उसे गेम खेलने की लत पड़ जाती है। कई बार बच्चे इस गेम का इस कदर शिकार हो जाते हैं कि वे आत्महत्या जैसा कदम भी उठा लेते हैं। 

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