केवल गरीबों का हो पुनर्वास - हाईकोर्ट
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अमानीशाह नाले के आसपास बसी कॉलोनियों के लोगों की पुनर्वास नीति पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है। हाईकोर्ट ने कहा कि पुनर्वास पर जनता का पैसा खर्च हो रहा है, इससे केवल बीपीएल और गरीब परिवारों का ही पुनर्वास किया जा सकता है। साथ ही कोर्ट ने सरकार से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी और जिम्मेदार कॉलोनाइजरों व बिल्डरों की सूची मांगते हुए इनसे पीड़ितों को पैसा दिलाने की मौखिक रूप से मंशा भी जाहिर की। अगली सुनवाई आठ नवंबर को होगी। पी.एन. मैंदोला की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश अरूण मिश्रा व न्यायाधीश नरेन्द्र कुमार जैन-प्रथम की खण्डपीठ ने मंगलवार को यह कहा।
जयुपर डेवलपमेंट अथॉरिटी (जेडीए) की ओर से वरिष्ठ अघिवक्ता आरएन माथुर ने कहा कि 11 गृह निर्माण सहकारी समितियों के खिलाफ एफआईआर हो चुकी है। आवासन मंडल ने बताया कि नीरजा मोदी स्कूल का अतिक्रमण था, जो हटा दिया। अतिरिक्त महाधिवक्ता आरपी सिंह ने पुनर्वास योजना पेश करते हुए हाईकोर्ट से दोषी अधिकारियों के नाम देने के लिए दो माह और अतिक्रमण हटाने के लिए उचित समय देने की मांग की।
अमानीशाह नाले के बहाव क्षेत्र में तय सेंटर लाइन को लेकर लोगों की आपत्तियों पर 10 दिन में सुनवाई करने के लिए गठित कमेटी ने सरकार से 3 माह का समय मांगा है। सरकार की दस दिन की मियाद मंगलवार को खत्म हो गई, लेकिन अब तक केवल एक बैठक हो पाई है। कमेटी सदस्यों ने दस दिन को अपर्याप्त समय बताते हुए इस काम के लिए सरकार से अतिरिक्त समय मांगा है। साथ ही लोगों की जेडीए व नगर निगम स्तर पर आई आपत्तियों को एकत्र कर कमेटी के पास भेजने को कहा है, जिससे मौके पर जा निपटारा किया जा सके। नगरीय विकास विभाग ने 19 अक्टूबर को इस संबंध में आदेश जारी किए थे। कमेटी में 1 अध्यक्ष, 3 सदस्य व 1 समन्वयक है।