News Impact: सिरोही में अवैध खनन को लेकर प्रशासन हरकत में, ट्रैक्टर और कंप्रेशर मशीन सहित अन्य सामग्री जप्त
राजस्थान के सिरोही जिले में अमर उजाला की खबर का असर हुआ है। खबर प्रसारित होने के बाद अवैध खनन पर कार्रवाई शुरू हुई। कार्रवाई में ट्रैक्टर, कंप्रेशर मशीन और ड्रिल सहित अन्य सामग्री जप्त की गई है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सिरोही जिले में अवैध खनन की खबर अमर उजाला पर प्रकाशित करने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया और अवैध रूप से पत्थर खनन करने वालों पर कार्रवाई को अंजाम दिया। मांउटआबू उपखंड अधिकारी राहुल जैन के निर्देश पर पूरी कारवाई हुई है। नायब तहसीलदार मोहनलाल डांगी के नेतृत्व में अवैध माफियाओं पर शिकंजा कसा गया है, जिससे खनन माफियाओं में भी हड़कंप मचा हुआ है। इस दौरान ट्रैक्टर, कंप्रेशर मशीन, ड्रिल और खनन करने की सामग्री भी जप्त कर आबूरोड सदर पुलिस को सुपुर्द की गई। अग्रिम कार्रवाई के लिए खनन विभाग को सूचना दे दी गई है।
राज्य सरकार द्वारा अवैध खनन को रोकने के भले ही तमाम दावा किए जाते हैं। परंतु सिरोही जिले से जो तस्वीरें सामने आती हैं, उससे जिम्मेदारों की कार्यशैली और भूमिका पर सवाल उठना भी वाज़िब है। ज़िले में आज आलम यह है कि ऐतिहासिक पहाड़ के पहाड़ अवैध खनन माफिया डकार गए। अवैध खनन को रोकने के कोई प्रभावी प्रयास सिरोही जिला प्रशासन आज दिन तक नहीं कर पाया। आज नतीजा सबके समक्ष है। दिनदहाड़े अवैध खनन माफिया ब्लास्टिंग मशीने लगाकर ऐतिहासिक पहाड़ों को भारी मात्रा में नुकसान पहुंचा रहे हैं।
सिरोही में अवैध खनन का खेल लंबे अर्से से चल रहा है। इस दौरान कई अधिकारी सिरोही जिले में आए और चले भी गए। लेकिन किसी ने भी अवैध खनन को रोकने की प्रभावी कार्रवाई करने की जहमत तक नहीं उठाई। आज जिले के बसंतगढ़, नांदिया, रोहिडा, वाटेरा, भारजा, भीमाणा, वाड़ा और वासा सहित अन्य तहसील के एक नहीं दर्जनों गांवों के सरकारी पहाड़ों का अस्तित्व ही ख़तरे में है। जिला कलेक्टर से लेकर सभी अधीनस्थ जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदकर यह सब देख रहे हैं।
प्रभावी नकेल न कसने के पीछे क्या खास वज़ह, जवाब मांगते सवाल?
अवैध खनन के बारे में जिम्मेदारों द्वारा प्रभावी नकेल न कसने के पीछे क्या खास वजह है? दिनदहाड़े हो रहे अवैध खनन का जिम्मेदार कौन? आज दिन तक अवैध खनन से सरकार को हुए करोड़ों के राजस्व के नुकसान का जिम्मेदार कौन? राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी भी अवैध खनन को रोकने में नाकाम क्यों? क्या अवैध खनन पर कार्रवाई न करने के पीछे चलता है आपसी सांठगांठ या लेनदेन का खेल? यदि नहीं तो फिर आज दिन तक ज़िले में क्यों नहीं हुई प्रभावी कार्रवाई? साथ ही ऐतिहासिक पहाड़ों को हो रहे भारी भरकम नुकसान का जिम्मेदार कौन है? क्या राज्य सरकार के जिम्मेदार करेंगे इस पर मंथन, आखिर सिरोही जिले में यह चल क्या रहा है और कब रुकेगा अवैध खनन? सरकारी कारिंदों द्वारा अवैध खनन को रोकने के बड़े-बड़े दावे तो किए जाते हैं, परन्तु जमीनी स्तर पर क्यों नहीं होती कार्रवाई।
लंबे समय से अवैध खनन जारी, जिम्मेदार मूकदर्शक...
अवैध खनन का विषय सागर जितना गहर हो चुका है। उस पर कार्रवाई करने के लिए सरकार द्वारा खनन विभाग और पुलिस विभाग के विजिलेंस शाखा को सक्रिय होकर प्रभावी कार्रवाई करनी होगी। विशेष टीमों का गठन करना बेहद आवश्यक है। क्योंकि खनिज विभाग के पास स्टाफ की कमी के चलते केवल खनिज विभाग अवैध खनन को रोक पाए, यह सम्भव नहीं। साथ ही अवैध खनन माफियाओं द्वारा किए गए खनन पर नियमानुसार जुर्माना लगाकर ठोस कानूनी कार्रवाई की पहल करनी होगी। ताकि कुछ हद तक इस पर अंकुश लग सके। महज औपचारिक कार्रवाई करने से अवैध खनन रुकने वाला नहीं है, जिस तरह अवैध खनन माफिया बेख़ौफ हैं, उन्हें किसी विधिक कार्रवाई का डर तक नहीं है। जब तक उच्च स्तर से कठोर एक्शन नहीं होगा, तब तक यूं ही ज़िले में दिनों-दिन ऐतिहासिक पहाड़ खत्म होते रहेंगे।
क्या कहते हैं जिम्मेदार...
सिरोही पुलिस अधीक्षक ममता गुप्ता ने बताया, पुलिस प्रशासन द्वारा खनिज विभाग को सहयोग दिया जाएगा। यदि खनिज विभाग के पास कार्मिकों की कमी या मैन पॉवर की कमी है तो उनके कहने पर पुलिस उन्हें सहयोग करेगी। भले मौखिक में कहें, लिखित में भी किसी पत्र कि आवश्यकता नहीं है।