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राजस्थान: नागौर में भाजपा-आरएलपी प्रत्याशियों को मिले एक-एक वोट, अपने परिवार का भी नहीं मिला समर्थन; वजह क्या?
Mon, 14 Sep 2026 04:24 PM IST
नागौर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर
Published by: नागौर ब्यूरो
Updated Mon, 14 Sep 2026 04:24 PM IST
सार
नागौर के परबतसर नगर पालिका चुनाव में BJP और RLP के दो प्रत्याशियों को महज एक-एक वोट मिला। BJP प्रत्याशी कैलाश चंद्र का वोट वार्ड 12 में होने से परिणाम की वजह सामने आई, लेकिन इस नतीजे ने स्थानीय संगठन और चुनावी रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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भाजपा-आरएलपी प्रत्याशी को मिले एक-एक वोट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
नगर निकाय चुनाव के नतीजों में परबतसर नगर पालिका से एक ऐसा परिणाम सामने आया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी है। यहां अलग-अलग वार्डों में चुनाव लड़ने वाले भाजपा और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के प्रत्याशियों को महज एक-एक वोट मिला।
भाजपा प्रत्याशी को सिर्फ एक वोट, वजह भी दिलचस्प
परबतसर के वार्ड नंबर 13 से भाजपा प्रत्याशी कैलाश चंद्र को सिर्फ एक वोट मिला, जबकि वार्ड नंबर 20 से RLP प्रत्याशी भंवरलाल को भी केवल एक वोट हासिल हुआ। कैलाश चंद्र का वोट और उनका परिवार वार्ड नंबर 12 में है। ऐसे में वे वार्ड नंबर 13 में खुद मतदान नहीं कर सकते थे।
बताया गया कि वार्ड नंबर 13 में पार्टी की ओर से प्रत्याशी उतारने के लिए कैलाश चंद्र ने नामांकन दाखिल किया था। ऐसे में उनका एक वोट वाला परिणाम इसी चुनावी रणनीति का असामान्य नतीजा माना जा रहा है।
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पार्टी का वोट प्रत्याशी तक क्यों नहीं पहुंचा?
हालांकि केवल एक वोट के आधार पर पूरे संगठन की मजबूती या कमजोरी का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी, लेकिन भाजपा जैसे बड़े राजनीतिक संगठन के प्रत्याशी को सिर्फ एक वोट मिलना स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय जरूर बन गया है। सवाल है कि क्या पार्टी का पारंपरिक वोट प्रत्याशी के पक्ष में ट्रांसफर नहीं हुआ?
RLP प्रत्याशी भंवरलाल भी एक वोट पर सिमटे
दूसरी तरफ वार्ड नंबर 20 से राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रत्याशी भंवरलाल को भी महज एक वोट मिला। राजस्थान की राजनीति में RLP का अपना प्रभाव और आधार रहा है। ऐसे में पार्टी प्रत्याशी का एक वोट तक सीमित रह जाना भी स्थानीय चुनावी समीकरणों पर सवाल खड़े करता है।
‘एक वोट’ बना चुनाव का सबसे बड़ा चर्चा-बिंदु
परबतसर के चुनाव परिणामों में ‘एक वोट’ सबसे ज्यादा चर्चा में आ गया है। सवाल है कि यह सिर्फ संयोग है, प्रत्याशी चयन की रणनीति का नतीजा है या स्थानीय स्तर पर संगठन की जमीनी पकड़ का संकेत। आने वाले दिनों में यह परिणाम भाजपा और RLP दोनों के लिए आत्ममंथन का विषय बन सकता है।
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भाजपा प्रत्याशी को सिर्फ एक वोट, वजह भी दिलचस्प
परबतसर के वार्ड नंबर 13 से भाजपा प्रत्याशी कैलाश चंद्र को सिर्फ एक वोट मिला, जबकि वार्ड नंबर 20 से RLP प्रत्याशी भंवरलाल को भी केवल एक वोट हासिल हुआ। कैलाश चंद्र का वोट और उनका परिवार वार्ड नंबर 12 में है। ऐसे में वे वार्ड नंबर 13 में खुद मतदान नहीं कर सकते थे।
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बताया गया कि वार्ड नंबर 13 में पार्टी की ओर से प्रत्याशी उतारने के लिए कैलाश चंद्र ने नामांकन दाखिल किया था। ऐसे में उनका एक वोट वाला परिणाम इसी चुनावी रणनीति का असामान्य नतीजा माना जा रहा है।
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पार्टी का वोट प्रत्याशी तक क्यों नहीं पहुंचा?
हालांकि केवल एक वोट के आधार पर पूरे संगठन की मजबूती या कमजोरी का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी, लेकिन भाजपा जैसे बड़े राजनीतिक संगठन के प्रत्याशी को सिर्फ एक वोट मिलना स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय जरूर बन गया है। सवाल है कि क्या पार्टी का पारंपरिक वोट प्रत्याशी के पक्ष में ट्रांसफर नहीं हुआ?
RLP प्रत्याशी भंवरलाल भी एक वोट पर सिमटे
दूसरी तरफ वार्ड नंबर 20 से राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रत्याशी भंवरलाल को भी महज एक वोट मिला। राजस्थान की राजनीति में RLP का अपना प्रभाव और आधार रहा है। ऐसे में पार्टी प्रत्याशी का एक वोट तक सीमित रह जाना भी स्थानीय चुनावी समीकरणों पर सवाल खड़े करता है।
‘एक वोट’ बना चुनाव का सबसे बड़ा चर्चा-बिंदु
परबतसर के चुनाव परिणामों में ‘एक वोट’ सबसे ज्यादा चर्चा में आ गया है। सवाल है कि यह सिर्फ संयोग है, प्रत्याशी चयन की रणनीति का नतीजा है या स्थानीय स्तर पर संगठन की जमीनी पकड़ का संकेत। आने वाले दिनों में यह परिणाम भाजपा और RLP दोनों के लिए आत्ममंथन का विषय बन सकता है।