हिरण को बचाते हुए गई जान, अब बवाल
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पुलिस के मुताबिक़ मंगलवार रात करीब एक बजे जंभा थानाक्षेत्र के ननेऊ गाँव के करीब हिरण का शिकार करने आए शिकारियों ने पीछा करने पर गाँव के एक 25 वर्षीय युवक की गोली मार कर हत्या कर दी।
हिरण की जान बचाते हुए युवक की हत्या की ख़बर के बाद बिश्नोई समाज के लोग इकट्ठा होना शुरू हो गए। घटनास्थल पर बुधवार शाम तक हज़ारों की तादाद में लोगों ने प्रदर्शन किया।
दो लोग हिरासत में
मामले की जाँच कर रहे पुलिस अधिकारी घेवर सिंह ने फ़ोन पर बीबीसी को दो लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी।
घेवर सिंह के मुताबिक अभी तक हिरण का शव बरामद नहीं किया जा सका है। उनका ये भी मानना है कि संभवतः शिकारी हिरण का शिकार करने में नाकाम रहे हों।
बिश्नोई समाज की आस्था से जुड़ा मामला
रामरतन के मुताबिक वन और वन्य जीवों की रक्षा को आस्था का विषय मानने वाला बिश्नोई समाज शैतान सिंह की हत्या से आंदोलित है।
बिश्नोई समाज हिरणों की देखभाल करता है जिसकी वजह से इनकी संख्या ज़्यादा है जिस कारण इस इलाक़े में वन्य जीवों का शिकार आम बात है।
रामरतन मानते हैं कि यहां के स्थानीय लोग बाहरी शिकारियों की मदद भी करते हैं।
वे कहते हैं, "स्थानीय लोगों की मदद से बाहरी लोग मनोरंजन और हिरण के माँस के लिए यहाँ शिकार करने आते हैं।"
'सलमान मामले में नहीं हुआ न्याय'
रामरतन बिश्नोई के मुताबिक राजस्थान में रोजाना एक-दो हिरण के शिकार के मामले सामने आते हैं लेकिन अधिकतर में कार्रवाई नहीं की जाती है।
बिश्नोई कहते हैं, "सलमान ख़ान का मामला बेहद चर्चित है लेकिन उसमें भी न्याय नहीं हो पा रहा है। यदि उस मामले में अदालत न्याय कर देती तो शायद लोग शिकार करने से डरते।"
बिश्नोई का आरोप है कि समुदाय तो हिरणों की रक्षा और सेवा के लिए प्रयत्नशील है लेकिन वन विभाग की मदद नहीं मिल पा रही हैं।
वे मानते हैं कि यदि सरकार सख़्त रवैया अख़्तियार करे तो इस तरह के मामले सामने न आए। वे बताते हैं कि पिछले तीस साल में अब तक 17 लोग हिरण के शिकार को रोकते हुए अपनी जान गँवा चुके हैं।