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धमकी मामला: विधायक गणेश राज बंसल को बड़ी राहत, राजस्थान उच्च न्यायालय ने लगाई गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक

Sat, 17 Oct 2026 03:07 PM IST
प्रतीक पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर Published by: प्रतीक पांडेय Updated Sat, 17 Oct 2026 03:07 PM IST
सार

हनुमानगढ़ विधायक गणेश राज बंसल को बड़ी राहत मिली है। राजस्थान उच्च न्यायालय ने धमकी मामले में उनकी अंतरिम गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। जानिए किस मामले में विधायक को यह राहत दी गई है।

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Major relief for MLA Ganesh Raj Bansal; Rajasthan High Court grants interim stay on his arrest
राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान उच्च न्यायालय ने हनुमानगढ़ विधायक गणेश राज बंसल को बड़ी राहत देते हुए धमकी मामले में उनकी अंतरिम गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। जोधपुर स्थित उच्च न्यायालय में 16 अक्तूबर को हुई सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति आशुतोष कुमार ने हनुमानगढ़ जंक्शन थाने में दर्ज प्राथमिकी संख्या 669/2026 के संबंध में विधायक को अगले आदेश तक गिरफ्तार न करने का निर्देश दिया। अदालत ने विधायक को मामले की जांच में शामिल होने का आदेश दिया है। इस याचिका पर अगली सुनवाई आठ सप्ताह बाद होगी।
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एफआईआर निरस्त करने की मांग पर सुनवाई
विधायक गणेश राज बंसल ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 528 के तहत उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को निरस्त करने की मांग की थी। अदालत ने इस चरण में प्राथमिकी निरस्त करने पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया। यह मामला भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 351(3), 61(2) और 111(2)(बी) के अंतर्गत दर्ज हुआ है। शिकायतकर्ता रिछपाल सिंह खर्रा ने आरोप लगाया है कि हनी बॉक्सर नामक व्यक्ति ने 3 जनवरी 2026 को फोन करके उन्हें जान से मारने की धमकी दी थी। शिकायत में इस धमकी का संबंध विधायक गणेश राज बंसल से भी जोड़ा गया है।
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देरी से दर्ज प्राथमिकी और पुरानी रंजिश की दलील
बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने अदालत में तर्क दिया कि कथित घटना 3 जनवरी की है, जबकि इस मामले में प्राथमिकी 7 अक्तूबर 2026 को दर्ज कराई गई। उन्होंने प्राथमिकी दर्ज कराने में हुई अत्यधिक देरी और विधायक द्वारा शिकायतकर्ता को सीधे धमकी न देने की बात को अपनी दलीलों का मुख्य आधार बनाया। अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से पुरानी प्रतिद्वंद्विता चली आ रही है और इसी पृष्ठभूमि में विधायक के विरुद्ध कई मामले दर्ज कराए गए हैं। बचाव पक्ष ने प्राथमिकी संख्या 624/2026 और 625/2026 का संदर्भ दिया, जिन्हें उच्च न्यायालय की समन्वय पीठ ने 23 सितंबर 2026 को निरस्त कर दिया था। इसके साथ ही उन्होंने प्राथमिकी संख्या 641/2026 में विधायक को मिले अंतरिम संरक्षण का भी उल्लेख किया।
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सरकारी पक्ष और शिकायतकर्ता का विरोध
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपक चौधरी और शिकायतकर्ता की तरफ से अधिवक्ता हस्तीमल सारस्वत ने याचिका का कड़ा विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि प्राथमिकी में गंभीर आरोप लगाए गए हैं और शिकायतकर्ता के बयान दर्ज होना अभी बाकी है। शिकायतकर्ता पक्ष ने उच्चतम न्यायालय के नीहारिका इंफ्रास्ट्रक्चर बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले का हवाला दिया। उन्होंने समाचार पत्रों की कतरनें प्रस्तुत कर विधायक के खिलाफ दर्ज अन्य आरोपों की जानकारी अदालत के समक्ष रखी। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने विधायक को जांच में शामिल होने का निर्देश देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी।
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