फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Mahashivaratri Shivling splits into two parts during month Shravan unique story Pareshwar Mahadev temple Kekri

Mahashivaratri: श्रावण मास में दो भागों में बंट जाता है शिवलिंग, केकड़ी के पारेश्वर महादेव मंदिर की अनोखी कहानी

Tue, 25 Feb 2025 10:10 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, केकड़ी
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, केकड़ी Published by: अरविंद कुमार Updated Tue, 25 Feb 2025 10:10 PM IST
सार

Kekri News: केकड़ी शहर से 12 किलोमीटर दूर ग्राम पारा में स्थित प्राचीन पारेश्वर महादेव मंदिर जन-जन की आस्था का केन्द्र है। माना जाता है कि यहां आने वाले हर भक्त की मनोकामना अवश्य पूरी होती है। इस मंदिर में भोले भंडारी महादेव की अद्भुद लीला देखने को मिलती है। क्या है जानिए।

विज्ञापन
Mahashivaratri Shivling splits into two parts during month Shravan unique story Pareshwar Mahadev temple Kekri
पारेश्वर महादेव मंदिर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केकड़ी क्षेत्र का पारेश्वर महादेव मंदिर अत्यन्त प्राचीन मंदिर है। बताया जाता है कि यह मंदिर करीब 6630 वर्ष पुराना है। यह मंदिर लाखों लोगों की आस्था का केन्द्र है। यह मंदिर क्षेत्र के अत्यंत चमत्कारिक स्थानों में शामिल है। श्रावण मास में मंदिर में स्थापित शिवलिंग दो भागों में विभक्त हो जाता है। इस चमत्कार को देखने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है।

विज्ञापन


श्रावण मास के पश्चात यह शिवलिंग खुद-ब-खुद वापस पहले जैसा हो जाता है। यहां महाशिवरात्रि के अवसर पर अगले दिन विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। मेले के दौरान दूरदराज से श्रद्धालु दर्शन करने आते है। इस दौरान यहां विशाल भजन संध्या सहित विविध आयोजन होते है। केकड़ी के ग्राम पारा में स्थित भोलेनाथ की अनोखी कहानी सुनकर भक्तगण शिवलिंग के दर्शन करने को लालायित हो जाते है। यहां हर सोमवार को श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।
विज्ञापन




गोबर की रोड़ी में प्रकटा शिवलिंग
किवंदती के अनुसार हजारों वर्ष पूर्व गांव के बाहर कचरा डालने आई महिलाओं को गोबर की रोड़ी में से दूध निकलता नजर आया। अनिष्ट की आशंका से घबराई महिलाओं ने इसकी सूचना गांव के पुरुषों को दी। पुरूषों ने इस घटना की जानकारी पारा गढ़ के राजा को दी। रोड़ी से दूध निकलने का समाचार सुन राजा अचंभित रह गए। उन्होंने ज्योतिषियों को बुलाकर इसका फलित बताने के लिए कहा।
विज्ञापन
विज्ञापन


ज्योतिषियों के साथ मौके पर पहुंचे राजा व ग्रामीण गोबर की रोड़ी में दूध भरा देख अचंभित रह गए। देखते ही देखते वहां से दूध गायब हो गया और पारद का बना विशालकाय शिवलिंग नजर आने लगा। ज्योतिषियों के सुझाव पर शिवलिंग को किसी मंदिर में स्थापित करने का प्रयत्न किया गया, लेकिन लाख कोशिश के बाद भी शिवलिंग यथावत रहा। कुछ समय बाद राजा को सपना आया और सपने में उन्हें निर्देश मिला कि जिस स्थान पर शिवलिंग प्रकट हुआ है, वहीं पर मंदिर बना कर पूजा अर्चना की जाए। इसके बाद उसी स्थान पर मंदिर बनाकर शिवलिंग स्थापित किया गया।



पारद पत्थर का बना है शिवलिंग
रोड़ी में प्रकट हुआ यह शिवलिंग पारद पत्थर का बना हुआ है। पारद का होने के कारण इस स्थान का नाम पारेश्वर महादेव रखा गया। महादेव मंदिर के नाम पर ही गांव का नाम भी पारा हो गया। मंदिर में सेवा-पूजा का कार्य करने वाले पुजारी संदीप गिरी ने बताया कि श्रावण मास में शिवलिंग दो भागों में विभक्त हो जाता है। इसके मध्य स्पष्ट दरार नजर आने लगती है। यह दरार इतनी चौड़ी हो जाती है कि इसमें अंगुलिया घुस जाती है।


भक्तों के अनुसार यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। श्रावण मास के पश्चात शिवलिंग वापस पूर्ववत स्थिति में आ जाता है। मंदिर में पूजा-अर्चना का कार्य प्राचीन काल से ही गोस्वामी परिवार करता आ रहा है। कुनबा बढने के साथ ही पारा में गोस्वामी परिवार के कई घर हो गए है। पूजा अर्चना करने वाले एक परिवार का नम्बर वापस लगभग एक वर्ष बाद आता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed