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नए साल से पहले कारगिल के ‘बहादुर’ मिग-27 की वायुसेना से होगी ‘विदाई’

Wed, 25 Dec 2019 03:19 AM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर Published by: योगेश साहू Updated Wed, 25 Dec 2019 03:19 AM IST
सार

  • भारतीय वायुसेना में नहीं दिखेगी इस लड़ाकू विमान की स्क्वाड्रन
  • स्क्वाड्रन के सात विमान भी हमेशा के लिए वायुसेना के गौरवशाली इतिहास का हिस्सा बन जाएंगे
  • मिग-27 विमान को 1984 में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था

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Last Squadron Of Kargil wars Fighter Jet  MiG 27 To Be Decommissioned In Jodhpur On December 27
मिग-27 लड़ाकू विमान

विस्तार

जिस लड़ाकू विमान ने 1999 के कारगिल युद्ध में हिमालयी की ऊंची चोटियों पर कब्जा जमाकर बैठ गए पाकिस्तानियों को भगाने में जबरदस्त क्षमता का प्रदर्शन दिखाकर ‘बहादुर’ निकनेम हासिल किया था, वह मिग-27 लड़ाकू विमान नए साल से भारतीय वायुसेना का हिस्सा नहीं रहेगा।

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‘घातक’ लड़ाकू विमान मिग-27 की आखिरी स्क्वाड्रन को भारतीय वायुसेना शुक्रवार को यहां विदाई देगी। जोधपुर एयरबेस पर 27 दिसंबर को होने वाले विदाई समारोह के बाद इस स्क्वाड्रन के सात विमान भी हमेशा के लिए भारतीय वायुसेना के गौरवशाली इतिहास का हिस्सा बन जाएंगे।
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रक्षा प्रवक्ता कर्नल सांबित घोष ने मंगलवार को कहा, 27 दिसंबर को मिग-27 की आखिरी स्कॉर्पियन-29 स्क्वाड्रन के सभी विमानों को डिकमीशन कर दिया जाएगा। इसके बाद ये देश में कहीं पर भी उड़ान भरते हुए दिखाई नहीं देंगे। उन्होंने बताया कि जोधपुर एयरबेस में इस विमान की दो स्क्वाड्रन थी, जिसमें से एक को इस साल की शुरुआत में डिकमीशन कर दिया गया था।

इससे पहले मिग-27 की दो स्क्वाड्रन को पश्चिमी बंगाल के हाशिमारा एयरबेस पर डिकमीशन किया गया था। कर्नल घोष से जब डिकमीशन होने के बाद विमान के उपयोग के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, अमूमन विदाई के बाद विमानों को सोविनियर के तौर पर उपयोग किया जाता है या एयरबेस या डिपो को वापस कर दिया जाता है या किसी अन्य देश को दे दिया जाता है।

लेकिन इन मिग-27 विमानों का क्या होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, विदाई समारोह के दौरान इस स्क्वाड्रन के सातों मिग-27 विमानों के  पायलट अपने-अपने विमान को आखिरी बार उड़ान के लिए ले जाएंगे और उनके उतरने पर सैल्यूट कर सम्मान दिया जाएगा।

भारत ही कर रहा था उपयोग
इस रूस निर्मित विमान की दक्षिणपश्चिम एयर कमांड से विदाई की घोषणा के बाद नई दिल्ली स्थित एक वायुसेना अधिकारी ने कहा, जोधपुर में विदाई के बाद मिग-27 विमान भारत ही नहीं पूरे विश्व में इतिहास का हिस्सा बन जाएंगे। कोई अन्य देश इस समय मिग-27 विमान का इस्तेमाल नहीं कर रही है।

महज 35 साल में मिला रिटायरमेंट

मिग-27 विमान को 1984 में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था, जबकि इससे कहीं पहले 1960 में मिग-21 को वायुसेना का हिस्सा बनाया गया था। मिग-21 की 6 स्क्वाड्रन अब भी पाकिस्तान सीमा पर इंटरसेप्टर के तौर पर सेवा में हैं, लेकिन मिग-27 को महज 35 साल में ही इसके कलपुर्जों की कमी के कारण रिटायर करना पड़ रहा है।

वायुसेना सूत्रों के मुताबिक, इस विमान का निर्माण करने वाली रूसी कंपनी अब कलपुर्जे पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं करा पा रही है। इसके चलते विमान में दुर्घटनाएं भी बढ़ गई हैं। इसी साल दो मिग-27 विमान दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं।

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