Shri Sanwaliyaji Temple: नए साल पर श्रीसांवलियाजी मंदिर में जुटेंगे लाखों भक्त, सिंहद्वार से दिया जाएगा प्रवेश
Shri Sanwaliyaji Temple: जिला कलेक्टर प्रभा गौतम ने बताया कि नववर्ष 2025 पर भगवान श्री सांवलिया सेठ के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए दर्शन मार्ग यथावत रखा गया है। इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।
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नए साल के दिन हर कोई अपने ईष्ट प्रभु के दर्शन कर दिन की शुरुआत करना चाहता है। इसी कारण से चित्तौड़गढ़ के श्री सांवलियाजी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती जा रही है। गत वर्ष, एक ही दिन में करीब पांच से छह लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे। इस बार भी भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद कर दिया है। सिंहद्वार से श्रद्धालुओं के प्रवेश की व्यवस्था की गई है। नए साल से पहले अमावस्या होने के कारण लगातार चार दिनों तक भीड़ रहने की संभावना है।
मंदिर मंडल की मुख्य कार्यपालक अधिकारी एवं अतिरिक्त जिला कलेक्टर प्रभा गौतम ने बताया कि नववर्ष 2025 के अवसर पर भगवान श्री सांवलिया सेठ के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए दर्शन मार्ग यथावत रखा गया है। दर्शन मार्ग में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अलग-अलग मार्गों से आने वाले वाहनों के लिए अलग-अलग पार्किंग स्थान निर्धारित किए गए हैं।
- भादसोडा चौराहा फोरलेन से आने वाले वाहनों के लिए रेफरल चिकित्सालय के पास बाईपास पार्किंग।
- बानसेन व भदेसर मार्ग से आने वाले वाहनों के लिए कुरेठा बाईपास के पास पार्किंग।
- निम्बाहेड़ा मार्ग से आने वाले वाहनों के लिए गोशाला रोड के पास और गोकुल विश्रांति गृह के सामने पार्किंग।
- असावरा माताजी मार्ग से आने वाले वाहनों के लिए गोकुल विश्रांति गृह के सामने पार्किंग।
कीमती सामान न लाएं भक्त
अतिरिक्त जिला कलेक्टर ने बताया कि मंदिर में केवल निर्धारित गेट/मार्ग से ही प्रवेश दिया जाएगा। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे अपने साथ कीमती सामान, कैमरा या बैग न लाएं। जेबतराशी और चैन स्नेचिंग जैसी घटनाओं से बचने के लिए विशेष सतर्कता बरतें और मंदिर प्रशासन का सहयोग करें।
नए साल से पहले अमावस्या का मेला
मंदिर मंडल के प्रशासनिक अधिकारी नंद किशोर टेलर ने बताया कि नए साल से दो दिन पहले अमावस्या का मेला आयोजित किया जाएगा। 29 दिसंबर को चतुर्दशी पर भंडार खोला जाएगा और 30 दिसंबर को सोमवती अमावस्या के मेले का मुख्य दिन रहेगा। इस दिन का विशेष महत्व होता है। इसके बाद 31 दिसंबर और 1 जनवरी को भी भारी भीड़ की संभावना है।