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Kotputli-Behror News: आरजीएचएस योजना ठप होने से पेंशनर्स नाराज, बानसूर में शुरू हुए धरना-प्रदर्शन
Mon, 25 May 2026 06:55 PM IST
कोटपुतली ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटपूतली-बहरोड़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटपूतली-बहरोड़
Published by: कोटपुतली ब्यूरो
Updated Mon, 25 May 2026 06:55 PM IST
सार
पेंशनर्स समाज ने कहा कि अधिकांश बुजुर्ग पेंशनर्स नियमित इलाज और दवाइयों पर निर्भर हैं। चिकित्सा सुविधा बाधित होने से उनकी दिनचर्या और स्वास्थ्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
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बानसूर में धरना-प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजस्थान सरकार की आरजीएचएस (राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम) योजना के तहत पेंशनर्स को निःशुल्क चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने से क्षेत्र में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। राजस्थान पेंशनर्स समाज ने आरोप लगाया है कि पिछले लगभग एक वर्ष से पेंशनर्स को अनुमोदित अस्पतालों और फार्मा स्टोर्स से इलाज एवं दवाइयां प्राप्त करने में लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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पेंशनर्स समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि 14 अप्रैल 2026 से प्रदेशभर में सूचिबद्ध अस्पतालों में निःशुल्क चिकित्सा सुविधा बंद पड़ी है। वहीं फार्मा स्टोर्स से भी दवाइयों का वितरण नहीं हो रहा है। इस कारण वृद्ध पेंशनर्स को निजी स्तर पर इलाज और दवाइयों पर भारी खर्च उठाना पड़ रहा है। संगठन का कहना है कि इस संबंध में पिछले तीन माह के दौरान चिकित्सा विभाग और आरजीएचएस अधिकारियों से कई बार संपर्क कर समस्या समाधान की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
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समाज के अनुसार 6 मई 2026 को मुख्य सचिव राजस्थान को नोटिस देकर चेतावनी दी गई थी कि यदि 11 मई तक व्यवस्था सुचारू नहीं हुई तो आंदोलनात्मक कदम उठाए जाएंगे। इसके बाद 13 मई को प्रदेशभर के जिलों में जिलाध्यक्षों और पेंशनर्स ने ज्ञापन सौंपकर विरोध दर्ज कराया, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।
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पेंशनर्स समाज ने कहा कि अधिकांश बुजुर्ग पेंशनर्स नियमित इलाज और दवाइयों पर निर्भर हैं। चिकित्सा सुविधा बाधित होने से उनकी दिनचर्या और स्वास्थ्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि इलाज के अभाव में किसी पेंशनर के साथ अप्रिय घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
इसी विरोध के तहत अब उपखंड स्तर पर सद्बुद्धि यज्ञ, धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। पेंशनर्स समाज ने सरकार के समक्ष चार प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें आरजीएचएस को बीमा मोड पर नहीं देने, वर्तमान ओपीडी और आईपीडी व्यवस्था यथावत रखने, 14 अप्रैल से अब तक निजी खर्च से कराए गए इलाज का पुनर्भरण करने तथा अनुमोदित अस्पतालों और फार्मा स्टोर्स को समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने की मांग शामिल है।