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राजस्थान: अलवर जेल में बंदी के पास मिला था मोबाइल-सिम, दो साल पुराने मामले में हार्डकोर अपराधी गिरफ्तार

Mon, 28 Sep 2026 08:19 PM IST
कोटपुतली ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटपूतली-बहरोड़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटपूतली-बहरोड़ Published by: कोटपुतली ब्यूरो Updated Mon, 28 Sep 2026 08:19 PM IST
सार

अलवर केंद्रीय कारागृह में बंदी के पास मोबाइल फोन और सिम कार्ड मिलने के करीब दो साल पुराने मामले में बहरोड़ पुलिस ने हार्डकोर अपराधी सचिन को प्रोटेक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया। पुलिस मोबाइल-सिम के नेटवर्क और संपर्कों की जांच कर रही है।

 

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Hardcore Criminal Arrested on Protection Warrant in Alwar Jail Mobile Phone and SIM Card Case
आरोपी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्रीय कारागृह अलवर में बंदी के पास मोबाइल फोन और सिम कार्ड मिलने के करीब दो साल पुराने मामले में बहरोड़ कोतवाली थाना पुलिस ने कार्रवाई की है। पुलिस ने मामले में एक हार्डकोर अपराधी को प्रोटेक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया है। आरोपी को बहरोड़ जेल से अलवर लाकर न्यायालय में पेश किया गया। पुलिस अब मोबाइल फोन और सिम कार्ड के इस्तेमाल से जुड़े नेटवर्क की जांच कर रही है।

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थानाधिकारी दिनेश चंद ने बताया कि 14 अगस्त 2024 को केंद्रीय कारागृह अलवर प्रशासन की ओर से बंदी के पास मोबाइल फोन और सिम कार्ड मिलने की सूचना दी गई थी। जेल प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

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जांच के दौरान जेल में बंद आरोपी सचिन पुत्र गुट सिंह निवासी घीलोठ, थाना नीमराणा की भूमिका सामने आई। इसके बाद पुलिस ने उसे बहरोड़ जेल से प्रोटेक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार आरोपी पूर्व में हत्या के मामले में केंद्रीय कारागृह अलवर में बंद था। इसी दौरान उसके पास से मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद हुए थे।

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जेल परिसर में बंदी के पास मोबाइल फोन और सिम कार्ड मिलना सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से गंभीर मामला माना गया। गिरफ्तारी के बाद पुलिस आरोपी को बहरोड़ जेल से अलवर लेकर पहुंची और न्यायालय में पेश किया।


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पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी के पास मोबाइल फोन और सिम कार्ड किस तरह पहुंचे और उसने इनका इस्तेमाल कितने समय तक किया। इसके अलावा मोबाइल में मौजूद जानकारी और सिम कार्ड से किए गए संपर्कों की भी जांच की जा रही है।

पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी ने किन लोगों से बातचीत की और किन नंबरों पर संपर्क किया। इसके लिए तकनीकी साक्ष्यों की मदद ली जा रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि मोबाइल फोन और सिम उपलब्ध कराने में किसी बाहरी व्यक्ति या जेल से जुड़े किसी व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।

जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आने पर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ के साथ मोबाइल फोन, सिम कार्ड और उनसे जुड़े तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि जेल में मोबाइल फोन और सिम कार्ड पहुंचने के पीछे कौन लोग शामिल थे और इनका इस्तेमाल किन गतिविधियों के लिए किया गया।

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