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कोटपूतली चुनाव: नतीजों से पहले ही शुरू हुआ जोड़-तोड़ का खेल, बीजेपी-कांग्रेस ने शुरू की पार्षदों की बाड़ाबंदी

Fri, 11 Sep 2026 02:49 PM IST
कोटपुतली ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटपूतली-बहरोड़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटपूतली-बहरोड़ Published by: कोटपुतली ब्यूरो Updated Fri, 11 Sep 2026 02:49 PM IST
सार

कोटपूतली नगर परिषद चुनाव में मतदान खत्म होने के बाद अब बोर्ड गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। 60 वार्डों के परिणाम से पहले भाजपा और कांग्रेस संभावित विजेताओं से संपर्क साधने और अपने समर्थक पार्षदों को एकजुट रखने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। करीबी मुकाबले की स्थिति में निर्दलीय पार्षद किंगमेकर की भूमिका निभा सकते हैं।

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Kotputli Civic Polls Post-Voting Horse-Trading Begins BJP and Congress Resort Politics Ahead of Results
चुनाव के बाद भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय प्रत्याशियों की बाड़ाबंदी को लेकर बढ़ी राजनीतिक हलचल - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

कोटपूतली में नगर परिषद चुनाव में मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब राजनीतिक दलों की नजर संभावित परिणामों और बोर्ड गठन पर टिक गई है। चुनावी मैदान में उतरे भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय प्रत्याशियों की ओर से अपने-अपने समर्थक पार्षदों को एकजुट रखने के लिए बाड़ाबंदी शुरू किए जाने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। परिणाम से पहले ही राजनीतिक दलों ने पार्षदों के संपर्क और संभावित समीकरणों पर काम शुरू कर दिया है।
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नगर परिषद के 60 वार्डों में प्रत्याशियों के बीच हुए चुनाव के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि किस दल के पास बोर्ड बनाने के लिए पर्याप्त संख्या में पार्षद होंगे। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपने अधिकृत प्रत्याशियों के साथ-साथ निर्दलीय प्रत्याशियों पर भी नजर बनाए हुए हैं। चुनाव परिणाम के बाद बोर्ड गठन में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका अहम मानी जा रही है।
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परिणाम से पहले ही शुरू हुई जोड़-तोड़ की राजनीति
चुनाव में कई वार्डों में भाजपा और कांग्रेस के बागी तथा निर्दलीय प्रत्याशियों ने मुकाबले को त्रिकोणीय और चतुष्कोणीय बनाया है। ऐसे में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में निर्दलीय पार्षद किंगमेकर की भूमिका में आ सकते हैं। यही वजह है कि राजनीतिक दल परिणाम आने से पहले ही संभावित विजयी प्रत्याशियों से संपर्क साधने में जुटे बताए जा रहे हैं।
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पार्षदों को एकजुट रखने की कवायद
राजनीतिक दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने समर्थक पार्षदों को एकजुट रखने की है। चुनाव परिणाम के बाद पार्षदों की खरीद-फरोख्त और पाला बदलने की आशंकाओं को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं शुरू हो गई हैं। ऐसे में प्रत्याशियों को एक स्थान पर रखने अथवा सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की रणनीति पर काम किए जाने की बात सामने आ रही है। भाजपा और कांग्रेस के स्थानीय नेताओं की ओर से लगातार अपने प्रत्याशियों और प्रमुख समर्थकों से संपर्क बनाए रखने की कवायद चल रही है। वहीं, निर्दलीय प्रत्याशी भी अपने समर्थकों के साथ संपर्क में हैं और बोर्ड गठन की संभावनाओं को लेकर अपने राजनीतिक विकल्प खुले रखे हुए हैं।


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निर्दलीयों पर रहेंगी सभी की नजरें
यदि चुनाव परिणाम में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला करीबी रहता है तो निर्दलीय पार्षदों की अहमियत बढ़ जाएगी। ऐसे में दोनों प्रमुख दल निर्दलीय विजेताओं को अपने पक्ष में लाने के लिए रणनीति बना सकते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बोर्ड गठन का असली खेल परिणाम के बाद शुरू होगा और कई वार्डों के परिणाम पूरे राजनीतिक समीकरण को बदल सकते हैं। अब निगाहें चुनाव परिणाम पर टिकी हैं। परिणाम आने के साथ ही यह तस्वीर साफ होगी कि नगर परिषद में किस दल का पलड़ा भारी रहता है और कौन-कौन से निर्दलीय पार्षद बोर्ड गठन में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। फिलहाल कोटपूतली में चुनावी सरगर्मी मतदान के बाद भी थमती नजर नहीं आ रही है और बाड़ाबंदी की चर्चाओं ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।

 

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