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राजस्थानः कोरोना की भेंट चढ़ा कोटा का ऐतिहासिक दशहरा मेला, 126 वर्षों के इतिहास में दूसरी बार हुआ रद्द
Sun, 18 Oct 2020 09:21 PM IST
संजीव कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Sun, 18 Oct 2020 09:21 PM IST
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Kota Dussehra
- फोटो : twitter@kota dussehra
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राजस्थान में कोटा का ऐतिहासिक दशहरे का मेला इस बार कोरोना की भेंट चढ़ गया। मेले की भव्यता इस बार दिखाई नहीं देगी। विशेषज्ञों ने कहा कि कोटा दशहरा मेला रद्द करना अपने 126 साल के इतिहास में दूसरा उदाहरण है।
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दक्षिण कोटा के नगर निगम आयुक्त कीर्ति राठौर ने कहा कि कोरोना के प्रसार को देखते हुए किसी भी प्रकार की बड़ी धार्मिक मण्डली और सरकारी आयोजनों पर रोक लगाने के लिए मेला को रद्द कर दिया गया है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कुछ पारंपरिक दशहरा अनुष्ठान प्रतीकात्मक रूप से किए जाएंगे लेकिन हर साल की तरह एक महीने का मेला नहीं होगा।
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वहीं उन्होंने कहा कि रावण दहन का काम औपचारिक तौर पर ही होगा। राठौड़ ने आगे कहा कि रावण और उसके बेटे मेघनाद और भाई कुंभकरण का पुतला मात्र 11 फीट ऊंचे होंगे, जिसमें सीमित संख्या में अधिकारी और हितधारक शामिल होंगे।
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कोटा में सर्वप्रथम दशहरे के तीन दिवसीय मेले के आयोजन 1892 में शुरू हुई थी। इसके बाद वर्ष 1989 में इस मेले में आंशिक बाधा उस में आई थी उस साल छह सितंबर को सांप्रदायिक दंगे के बाद कोटा में बहुत ही अधिक तनाव का माहौल था।
इसके बावजूद तत्कालीन नगर परिषद प्रशासन ने इसके आयोजन का फैसला किया और यह मेला शुरू हुआ भी लेकिन अलर्ट मिलने के बाद मेले के आयोजन के दौरान किसी अनहोनी की आशंका को देखते हुए तत्कालीन जिला कलेक्टर ने बीच में ही अचानक दशहरा मेले बंद करने की घोषणा कर दी थी। अब 2020 में कोरोना ने इस शुभ आयोजन में व्यवधान डाल दिया है।