जावेद अख्तर बोले, 'हमारी भाषा हिंदुस्तानी है'
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गीतकार और लेखक गुलजार का मानना है कि हम कुदरत को जिंदा मानेंगे, तो हमारा उससे रिश्ता अपने आप जुड़ जाएगा। गुलजार ने जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में रविवार को कुदरत के इसी जादू को अपनी नज्मों के जरिये बयान किया।
फेस्टिवल में रविवार को गुलजार और पवन के. वर्मा का सत्र ‘नज्म उलझी है सीने में’ में सबसे ज्यादा भीड़ रही। डिग्गी पैलेस के फ्रंटलॉन में आयोजित इस सत्र में सुनने वाले इतने थे कि पैर रखने की जगह नहीं बची और गुलजार ने भी अपने चाहने वालों को कतई निराश नहीं किया। प्रकृति से इंसान के रिश्ते को समाने वाली नौ नज्में और छोटी कविताएं गुलजार ने सुनाईं।
जब समझ में नहीं आती तब कहते हैं कि उर्दू है
एक अन्य सत्र में फिल्म गीतकार जावेद अख्तर ने हिंदी और उर्दू जबान पर बात की और कहा कि हमें कोई भी पूरी तरह हिंदी या उर्दू नहीं बोलते और न बोलना चाहिए। हमारी जुबान हिंदुस्तानी है। उन्होंने कहा कि उर्दू के साथ तो समस्या यह है कि जब तक लोगों को यह समझ आती है, वे इसे हिंदी समझते हैं और जब समझ आनी बंद हो जाती है, तो कहते हैं कि उर्दू है।
सरकार चला रही अवार्ड वापसी अभियान : उदय प्रकाश
देश में असहिष्णुता के मुद्दे पर साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने वाले लेखक उदय प्रकाश ने कहा कि वह अपने लौटाए पुरस्कार को वापस नहीं लेंगे। लेखक ने कहा कि सरकार अवार्ड वापसी का अभियान चला कर अपनी छवि सुधारने का प्रयास कर रही है। ‘काव्य और निजता’ विषय सत्र में उन्होंने लेखन पर भी बात की। उन्होंने कहा कि लेखक को नहीं लेखन को देखना चाहिए और लेखन की चर्चा होनी चाहिए।