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राजस्थान का अनोखा रेलवे स्टेशन जहां कोई कर्मचारी नहीं, ग्रामीण बांटते हैं टिकट

Wed, 02 Oct 2019 02:18 PM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: अनवर अंसारी Updated Wed, 02 Oct 2019 02:18 PM IST
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Jalsu Nanak Railway Station There are no employees, villagers give tickets they also take care
सांकेतिक तस्वीर

राजस्थान में नागौर में स्थित हैं जालसू नानक रेलवे स्टेशन। यह एक ऐसा स्टेशन हैं, जहां कोई रेलवे अधिकारी या कर्मचारी नहीं है। इसके बावजूद भी यहां 10 से ज्यादा ट्रेनें रुकती हैं। गांव के लोग ही टिकट काटते हैं और चंदा जुटाकर हर माह करीब 1500 टिकट खरीदते हैं। 

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दरअसल, जानसू नानक गांव में हर घर से एक व्यक्ति फौज में हैं। उनकी सुविधा के लिए सरकार ने 43 साल पहले 1976 में गांव में स्टेशन की सौगात दी। वर्तमान में गांव से 160 से ज्यादा लोग सेना, बीएसएफ, नेवी, एयरफोर्स और सीआरपीएफ में हैं। जबकि गांव में 200 से ज्यादा सेवानिवृत्त फौजी हैं। 
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पूर्व सरपंच गिरवर सिंह ने बताया कि सरकार ने 2005 में जोधपुर रीजन में कम आमदनी वाले स्टेशनों को बंद कर दिया था। यह स्टेशन भी बंद हो गया था। इसके बाद सेवानिवृत्त फौजियों और ग्रामीणों ने धरना देकर विरोध प्रदर्शन किया। जिसके बाद रेलवे ने 11वें दिन स्टेशन तो शुरू कर दिया, लेकिन ग्रामीणों के सामने एक शर्त रखी। शर्त में रेलवे ने ग्रामीणों से कहा कि उन्हें हर माह 1500 टिकट और प्रतिदिन 50 टिकट बिक्री करने होंगे। 
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विंडो संचालक रह चुके रतन सिंह ने बताया कि ग्रामीणों ने स्टेशन संचालन के लिए एक लाख 50 हजार रुपये का चंदा कर रखा है। यह राशि गांव में ब्याज पर दी गई है। इससे हर महीने तीन हजार रुपये ब्याज मिलता है। वहीं, 1500 टिकट बिक्री के चलते बुकिंग संभालने वाले ग्रामीण को 15 प्रतिशत कमीशन मिलता है। इस राशि से मानदेय भुगतान किया जाता है। 

1976 में रेलवे स्टेशन स्वीकृत होने के बाद रेलवे ने यहां एक लकड़ी की कुटिया बनाकर ट्रेनों का ठहराव शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने टिकट वितरण तो शुरू कर दिया। लेकिन 2001 तक इस स्टेशन पर किसी भी प्रकार की सुविधा नहीं थी। 


तब तत्कालीन सरपंच सुशीला कंवर ने पंचायत मद से यहां एक हॉल और बरामदे का निर्माण करवाया। साथ ही ग्रामीणों ने चंदा जुटाकर प्याऊ बनवाया। साथ ही सेवानिवृत्त फौजियों ने मिलकर फूलों का बगीचा तैयार किया।   

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