Rajasthan News: 64 साल का साथ, मौत में भी नहीं टूटा रिश्ता; पत्नी के बाद डेढ़ घंटे में पति ने भी छोड़ी दुनिया
जालोर के भवराणी गांव में 64 साल, 4 महीने और 26 दिन तक साथ जीवन बिताने वाले बुजुर्ग दंपती की अंतिम यात्रा भी साथ निकली। 90 वर्षीय पुनी देवी की मौत के करीब डेढ़ घंटे बाद उनके 89 वर्षीय पति दरगाराम प्रजापत ने भी दम तोड़ दिया।
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जालोर के भवराणी गांव में पति-पत्नी के अटूट रिश्ते की भावुक कहानी सामने आई है। करीब 64 साल, 4 महीने और 26 दिन तक साथ जीवन बिताने वाले 90 वर्षीय पुनी देवी और 89 वर्षीय दरगाराम प्रजापत ने भी दुनिया को अलविदा कहने में ज्यादा फासला नहीं रखा। शनिवार को पहले पत्नी की मौत हुई और करीब डेढ़ घंटे बाद पति ने भी प्राण त्याग दिए। इसके बाद परिवार ने दोनों की अंतिम यात्रा एक साथ निकाली। दोनों की अर्थियों को गठजोड़े में बांधकर श्मशान घाट ले जाया गया, जहां पेड़ के फेरे करवाने के बाद बड़े बेटे कालूराम ने एक ही चिता पर माता-पिता को मुखाग्नि दी। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए।
पत्नी की मौत के डेढ़ घंटे बाद पति ने भी तोड़ा दम
जालोर जिले के भवराणी गांव निवासी पुनी देवी और उनके पति दरगाराम प्रजापत ने करीब 64 साल, 4 महीने और 26 दिन तक एक-दूसरे का हर सुख-दुख में साथ निभाया। शनिवार को दोनों ने कुछ ही समय के अंतराल में दुनिया को अलविदा कह दिया। जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह 90 वर्षीय पुनी देवी की अचानक तबीयत बिगड़ गई। उन्हें चक्कर आया और करीब 11 बजे उन्होंने घर पर ही दम तोड़ दिया। परिवार में उनकी मौत से मातम छा गया। पोती पिंकी ने जब 89 वर्षीय दरगाराम को उनकी जीवनसंगिनी के निधन की जानकारी दी तो वे बेहद भावुक हो गए और बेचैन हो उठे। करीब छह दशक से अधिक समय तक साथ रही पत्नी के निधन का सदमा वे सह नहीं सके। करीब डेढ़ घंटे बाद दोपहर 12:30 बजे दरगाराम ने भी घर पर अंतिम सांस ली। पति-पत्नी की कुछ ही समय के अंतराल में मौत से परिवार के साथ पूरा गांव शोक में डूब गया।
गठजोड़े में बंधी दोनों अर्थियां, एक ही चिता पर अंतिम संस्कार
दंपती के निधन के बाद परिजनों ने उनकी अंतिम यात्रा भी एक साथ निकालने का फैसला किया। दोनों की अर्थियों को गठजोड़े में बांधा गया और एक साथ श्मशान घाट ले जाया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण अंतिम यात्रा में शामिल हुए। श्मशान घाट पहुंचने के बाद गठजोड़े में बंधी दोनों अर्थियों के पेड़ के फेरे करवाए गए। इसके बाद बड़े बेटे कालूराम ने एक ही चिता पर अपने माता-पिता को मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार का यह दृश्य देखकर वहां मौजूद ग्रामीण भी भावुक हो गए।
ग्रामीण बोले- जीवनभर साथ निभाया, अंतिम सफर में भी नहीं छोड़ा साथ
पड़ोसी गणपतसिंह मंडलावत ने बताया कि करीब 90 वर्ष की उम्र तक पति-पत्नी का साथ रहना, बिना किसी लंबी बीमारी के चलते-फिरते संसार से विदा होना और अंतिम यात्रा में भी गठजोड़े में साथ जाना बेहद भावुक करने वाला है। उन्होंने इसे दंपती के सात्विक जीवन और पूर्व जन्मों के पुण्य का फल बताया।
ग्रामीणों का कहना है कि पुनी देवी और दरगाराम ने जीवनभर एक-दूसरे का साथ निभाया और अंतिम समय में भी उनका साथ नहीं छूटा। करीब 64 साल पहले जिन हाथों ने एक-दूसरे का हाथ थामा था, उनका साथ जीवन की आखिरी यात्रा तक बना रहा।