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Rajasthan Election: केंद्रीय मंत्री गजेंद्र शेखावत बोले, कांग्रेस में तो आलाकमान को औकात दिखाने वालों को टिकट
Fri, 10 Nov 2023 06:06 AM IST
जलज मिश्रा
प्रेम प्रताप सिंह, जयपुर
प्रेम प्रताप सिंह, जयपुर
Published by: जलज मिश्रा
Updated Fri, 10 Nov 2023 06:06 AM IST
सार
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत बोले- मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को जोधपुर की जनता ने लोकसभा सीट से चुनाव में हरा दिया है, जिसके कारण वह कुंठा के शिकार हो गए हैं। इसलिए वह मुझ पर बार-बार व्यक्तिगत हमले करते हैं, जिसका मैं हर मंच पर जवाब दे रहा हूं।
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केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जोधपुर से आने वाले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के बीच सियासी अदावत चरम पर है। जिसे जहां मौका मिलता है, एक दूसरे पर वार और पलटवार करने से नहीं चूकता। राजस्थान में राज बदलने और प्रदेश में भाजपा की सरकार बनाने के लिए शेखावत ने अपनी पूरी ताकत लगा दी है। मारवाड़ में अपना सियासी वर्चस्व कायम करने के लिए गहलोत और गजेंद्र आमने-सामने हैं। तीन दिसंबर को तय होगा कि कौन किस पर भारी पड़ा। कांग्रेस की गहलोत सरकार की 7 गारंटियों का भाजपा के पास क्या तोड़ है? भाजपा की सरकार बनने पर कौन सीएम बनेगा? इन तमाम सवालों को लेकर प्रेम प्रताप सिंह से केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने विस्तार से बातचीत की। पढ़िए, बातचीत के मुख्य अंश…
चुनाव के लिए भाजपा कितनी तैयार है?
भाजपा चुनाव मशीन नहीं है। पार्टी पांच साल तक निरंतर काम करती है। पिछले एक साल में बूथ स्तर तक पार्टी ने काम किया है। मौजूदा सरकार की विफलताओं को उजागर करने के लिए यात्राएं निकालीं। किसानों के साथ धोखा, पेपर लीक, महिलाओं के सम्मान से खिलवाड़ और तुष्टीकरण के मामलों को उठाया। इससे लोग खुलकर भाजपा के पक्ष में बोलने लगे हैं। जनता ने कांग्रेस को नकार दिया है।
कांग्रेस की 7 गारंटियों का क्या तोड़ है?
कांग्रेस की गारंटी को जनता ने पूरी तरह नकार दिया है। किसी भी सरकार को अपने अंतिम छह महीने में अगर ताबड़तोड़ घोषणाएं, लोकलुभावन वादे करने पड़ें तो समझ लीजिए कि सरकार साढ़े चार साल तक डिलीवर करने में विफल रही है। 2018 के िवस चुनाव में कांग्रेस को किसान कर्जमाफी के मुद्दे पर सबसे अधिक वोट मिला था, लेकिन किसानों का कर्ज माफ नहीं हुआ। वसुंधरा सरकार के कार्यकाल में किसानों को जो 50 हजार रुपये तक का किसान कर्ज माफ किया था, केवल वहीं माफ हुआ। किसानों के सामने कांग्रेस की पोल खुई गई है। युवाओं को 3500 रुपये स्टाइपेंड देने, महिलाओं सुरक्षा की गारंटी, भ्रष्टाचार मुक्त शासन की गारंटी दी थी। सभी वादे फेल रहे। कोई भी योजना ये धरातल पर नहीं उतार पाए। केंद्र की योजनाओं को धरातल पर लागू करने में फेल रहे। मिलावट रोकना सरकार का काम था, लेकिन सरकार ने गरीबों को सीएम का फोटो लगाकर जो राशन बांटा, उसमें मिलावट की बात सामने आई। ऐसे में जनता कहने लगी है कि जो गारंटी पहले दी थी, वो तो फेल हो चुकी है। अब नई गारंटी पर जनता को यकीन नहीं है।
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कांग्रेस तो राज्य के लोगों को फ्री बिजली दे रही है। यदि भाजपा की सरकार बनी तो क्या ऐसे ही फ्री बिजली मिलती रहेगी?
फ्री बिजली का सच सुन लीजिए। पूरे प्रदेश में उपभोक्ताओं के बिजली के बिल कई गुना बढ़कर आ रहे हैं। इससे जनता परेशान है। एक बार किसानों को कुरेद कर तो देखियेे। वसुंधरा सरकार के कार्यकाल में किसानों को 850 रुपये प्रतिमाह कृषि कनेक्शन अनुदान मिलता था, जिसे कांग्रेस सरकार ने बंद कर दिया। मार्च में गहलोत सरकार ने बजट में घोषणा की थी कि किसानों को दो हजार यूनिट फ्री बिजली देंगे। अप्रैल, मई और जून में कुछ किया नहीं है। जून, जुलाई में शिविर लगाया। फिर शर्त लगा दी कि जिसके पास 15 हार्स पॉवर से ज्यादा का कनेक्शन है, उसको नहीं देंगे। 80 फीसदी से ज्यादा किसानों के पास 15 हार्स पॉवर से ज्यादा का कनेक्शन है। किसानों को छह घंटे बिजली देने का वादा किया था, लेकिन एक घंटे भी बिजली नहीं मिली। बिजली कटौती से किसान परेशान हैं।
सीएम गहलोत संजीवनी घोटाले को लेकर आपको क्यों घेरते हैं? आप पर व्यक्तिगत हमले भी करते हैं?
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को जोधपुर की जनता ने लोकसभा सीट से चुनाव में हरा दिया है, जिसके कारण वह कुंठा के शिकार हो गए हैं। इसलिए वह मुझ पर बार-बार व्यक्तिगत हमले करते हैं, जिसका मैं हर मंच पर जवाब दे रहा हूं।
चुनाव की तारीखों का एलान होते ही ईडी-इनकम टैक्स की कार्रवाई क्यों शुरू हो गई है? सीएम गहलोत इसे कांग्रेस और भाजपा का नहीं, कांग्रेस बनाम ईडी-सीबीआई चुनाव बता रहे हैं।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत केवल राजनीतिक लाभ लेने के लिए ऐसे बयान देते हैं। मेरा एक सवाल है कि क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए मुहुर्त निकलवाना चाहिए। ईडी की एंट्री किसी मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद ही तो होती है।
आप अक्सर गहलोत-पायलट के बीच द्वंद की बात करते हैं, कांग्रेस में कलह की बात करते हैं, लेकिन इस बार तो भाजपा में ही टिकटों को लेकर घमासान मचा हुआ है।
ऐसा नहीं है। भाजपा में नेतृत्व बहुत मजबूत है। पीएम मोदी, अमित शाह, जेपी नड्डा आंख दिखा दें तो हमारी बोलती बंद हो जाती है, लेकिन कांग्रेस में तो आलाकमान को औकात दिखाने वालों को भी टिकट मिल जाता है। भाजपा में ऐसा हो सकता है क्या? कांग्रेस ने ईआरसीपी का मुद्दा पूरे जोर-शोर से उठाया है। आपका एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें आप कह रहे हैं कि 41 हजार करोड़ दे दूंगा, ईआरसीपी दे दूंगा। राज बना दो। एक सहज भाव से टिप्पणी थी। एक वर्कर ने कहा था कि ईस्टर्न कैनाल बनवा दीजिए, उस पर मैं भी बोल पड़ा कि राज बनवा दो तो इसे बनवा दूंगा। ईस्टर्न कैनाल को लटकाने, भटकाने और रोकने का काम गहलोत सरकार ने किया है। मानक के अनुसार प्रस्ताव बनाकर नहीं भेजा।
मारवाड़ क्षेत्र में गहलोत भारी पड़ेंगे या गजेंद्र?
इसका जवाब तो तीन दिसंबर को मिलेगा, लेकिन इतना तय है कि जनता कांग्रेस के झूठे वादों से परेशान हो चुकी है।
सरकार बनने के बाद कौन से काम पहले होंगे?
सुशासन की स्थापना करना। कानून के राज की स्थापना करना। अभी राजस्थान में जंगलराज है। निवेश के लिए सबसे बड़ी जरूरत है कि शांति और कानून व्यवस्था। राजस्थान देश का ग्रोथ इंजन बनेगा।
आप प्रचंड बहुमत की बात कह रहे हैं, इस चुनाव में भाजपा कितनी सीटें जीत रही है?
गिनती के मकड़जाल में नहीं फंसने वाला। प्रचंड बहुमत तय है। यह मान लीजिए। कांग्रेस ने जोधपुर के विधायक को राजस्थान का सीएम बनाया है, क्या भाजपा सरकार में भी इस बार सीएम जोधपुर से होने वाला है?सीएम कौन बनेंगा? यह तय करना विधायकों और संसदीय बोर्ड का काम है। जिस व्यक्ति की उपयोगिता संसदीय बोर्ड समझेगा। उसके पीछे पार्टी के सभी नेता एकजुट होकर कार्य करेंगे।
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चुनाव के लिए भाजपा कितनी तैयार है?
भाजपा चुनाव मशीन नहीं है। पार्टी पांच साल तक निरंतर काम करती है। पिछले एक साल में बूथ स्तर तक पार्टी ने काम किया है। मौजूदा सरकार की विफलताओं को उजागर करने के लिए यात्राएं निकालीं। किसानों के साथ धोखा, पेपर लीक, महिलाओं के सम्मान से खिलवाड़ और तुष्टीकरण के मामलों को उठाया। इससे लोग खुलकर भाजपा के पक्ष में बोलने लगे हैं। जनता ने कांग्रेस को नकार दिया है।
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कांग्रेस की 7 गारंटियों का क्या तोड़ है?
कांग्रेस की गारंटी को जनता ने पूरी तरह नकार दिया है। किसी भी सरकार को अपने अंतिम छह महीने में अगर ताबड़तोड़ घोषणाएं, लोकलुभावन वादे करने पड़ें तो समझ लीजिए कि सरकार साढ़े चार साल तक डिलीवर करने में विफल रही है। 2018 के िवस चुनाव में कांग्रेस को किसान कर्जमाफी के मुद्दे पर सबसे अधिक वोट मिला था, लेकिन किसानों का कर्ज माफ नहीं हुआ। वसुंधरा सरकार के कार्यकाल में किसानों को जो 50 हजार रुपये तक का किसान कर्ज माफ किया था, केवल वहीं माफ हुआ। किसानों के सामने कांग्रेस की पोल खुई गई है। युवाओं को 3500 रुपये स्टाइपेंड देने, महिलाओं सुरक्षा की गारंटी, भ्रष्टाचार मुक्त शासन की गारंटी दी थी। सभी वादे फेल रहे। कोई भी योजना ये धरातल पर नहीं उतार पाए। केंद्र की योजनाओं को धरातल पर लागू करने में फेल रहे। मिलावट रोकना सरकार का काम था, लेकिन सरकार ने गरीबों को सीएम का फोटो लगाकर जो राशन बांटा, उसमें मिलावट की बात सामने आई। ऐसे में जनता कहने लगी है कि जो गारंटी पहले दी थी, वो तो फेल हो चुकी है। अब नई गारंटी पर जनता को यकीन नहीं है।
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कांग्रेस तो राज्य के लोगों को फ्री बिजली दे रही है। यदि भाजपा की सरकार बनी तो क्या ऐसे ही फ्री बिजली मिलती रहेगी?
फ्री बिजली का सच सुन लीजिए। पूरे प्रदेश में उपभोक्ताओं के बिजली के बिल कई गुना बढ़कर आ रहे हैं। इससे जनता परेशान है। एक बार किसानों को कुरेद कर तो देखियेे। वसुंधरा सरकार के कार्यकाल में किसानों को 850 रुपये प्रतिमाह कृषि कनेक्शन अनुदान मिलता था, जिसे कांग्रेस सरकार ने बंद कर दिया। मार्च में गहलोत सरकार ने बजट में घोषणा की थी कि किसानों को दो हजार यूनिट फ्री बिजली देंगे। अप्रैल, मई और जून में कुछ किया नहीं है। जून, जुलाई में शिविर लगाया। फिर शर्त लगा दी कि जिसके पास 15 हार्स पॉवर से ज्यादा का कनेक्शन है, उसको नहीं देंगे। 80 फीसदी से ज्यादा किसानों के पास 15 हार्स पॉवर से ज्यादा का कनेक्शन है। किसानों को छह घंटे बिजली देने का वादा किया था, लेकिन एक घंटे भी बिजली नहीं मिली। बिजली कटौती से किसान परेशान हैं।
सीएम गहलोत संजीवनी घोटाले को लेकर आपको क्यों घेरते हैं? आप पर व्यक्तिगत हमले भी करते हैं?
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को जोधपुर की जनता ने लोकसभा सीट से चुनाव में हरा दिया है, जिसके कारण वह कुंठा के शिकार हो गए हैं। इसलिए वह मुझ पर बार-बार व्यक्तिगत हमले करते हैं, जिसका मैं हर मंच पर जवाब दे रहा हूं।
चुनाव की तारीखों का एलान होते ही ईडी-इनकम टैक्स की कार्रवाई क्यों शुरू हो गई है? सीएम गहलोत इसे कांग्रेस और भाजपा का नहीं, कांग्रेस बनाम ईडी-सीबीआई चुनाव बता रहे हैं।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत केवल राजनीतिक लाभ लेने के लिए ऐसे बयान देते हैं। मेरा एक सवाल है कि क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए मुहुर्त निकलवाना चाहिए। ईडी की एंट्री किसी मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद ही तो होती है।
आप अक्सर गहलोत-पायलट के बीच द्वंद की बात करते हैं, कांग्रेस में कलह की बात करते हैं, लेकिन इस बार तो भाजपा में ही टिकटों को लेकर घमासान मचा हुआ है।
ऐसा नहीं है। भाजपा में नेतृत्व बहुत मजबूत है। पीएम मोदी, अमित शाह, जेपी नड्डा आंख दिखा दें तो हमारी बोलती बंद हो जाती है, लेकिन कांग्रेस में तो आलाकमान को औकात दिखाने वालों को भी टिकट मिल जाता है। भाजपा में ऐसा हो सकता है क्या? कांग्रेस ने ईआरसीपी का मुद्दा पूरे जोर-शोर से उठाया है। आपका एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें आप कह रहे हैं कि 41 हजार करोड़ दे दूंगा, ईआरसीपी दे दूंगा। राज बना दो। एक सहज भाव से टिप्पणी थी। एक वर्कर ने कहा था कि ईस्टर्न कैनाल बनवा दीजिए, उस पर मैं भी बोल पड़ा कि राज बनवा दो तो इसे बनवा दूंगा। ईस्टर्न कैनाल को लटकाने, भटकाने और रोकने का काम गहलोत सरकार ने किया है। मानक के अनुसार प्रस्ताव बनाकर नहीं भेजा।
मारवाड़ क्षेत्र में गहलोत भारी पड़ेंगे या गजेंद्र?
इसका जवाब तो तीन दिसंबर को मिलेगा, लेकिन इतना तय है कि जनता कांग्रेस के झूठे वादों से परेशान हो चुकी है।
सरकार बनने के बाद कौन से काम पहले होंगे?
सुशासन की स्थापना करना। कानून के राज की स्थापना करना। अभी राजस्थान में जंगलराज है। निवेश के लिए सबसे बड़ी जरूरत है कि शांति और कानून व्यवस्था। राजस्थान देश का ग्रोथ इंजन बनेगा।
आप प्रचंड बहुमत की बात कह रहे हैं, इस चुनाव में भाजपा कितनी सीटें जीत रही है?
गिनती के मकड़जाल में नहीं फंसने वाला। प्रचंड बहुमत तय है। यह मान लीजिए। कांग्रेस ने जोधपुर के विधायक को राजस्थान का सीएम बनाया है, क्या भाजपा सरकार में भी इस बार सीएम जोधपुर से होने वाला है?सीएम कौन बनेंगा? यह तय करना विधायकों और संसदीय बोर्ड का काम है। जिस व्यक्ति की उपयोगिता संसदीय बोर्ड समझेगा। उसके पीछे पार्टी के सभी नेता एकजुट होकर कार्य करेंगे।