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राजस्थान: बिना जिलाधिकारी की अनुमति नहीं कटेंगे पेड़, एनजीटी का सख्त आदेश

Tue, 03 Nov 2026 04:09 PM IST
प्रतीक कुमार पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: प्रतीक कुमार पाण्डेय Updated Tue, 03 Nov 2026 04:09 PM IST
सार

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने राजस्थान में पेड़ों की सुरक्षा के लिए प्रदेशभर में वृक्षों की गणना और जियो-टैगिंग कराने के सख्त निर्देश दिए हैं। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया है कि जिला कलेक्टर की सक्षम अनुमति के बिना राज्य में किसी भी पेड़ की कटाई नहीं होगी। इसके साथ ही 25 से अधिक पेड़ काटने के प्रस्तावों की जांच प्रधान मुख्य वन संरक्षक द्वारा गठित उच्चस्तरीय सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी करेगी। कमेटी कटाई की आवश्यकता और पेड़ों को बचाने के विकल्पों की पड़ताल करने के बाद ही अपनी सिफारिश सौंपेगी। पेड़ काटने की मंजूरी मिलने पर संबंधित पक्ष को 10 से 100 गुना तक नए पौधे लगाने होंगे और कम से कम पांच साल तक उनके विकास की निगरानी करनी होगी।
 

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Trees cannot be felled in Rajasthan without the District Magistrate permission; strict order from the NGT.
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एनजीटी की भोपाल स्थित सेंट्रल जोन बेंच ने 2 नवंबर को जयपुर के सी-स्कीम स्थित चौमूं हाउस पार्क में लगभग 800 विकसित पेड़ों की अवैध कटाई के मामले में सुनवाई करते हुए यह व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए। मामले की जांच के लिए एनजीटी ने एक संयुक्त कमेटी का गठन किया है। इस समिति में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक, जयपुर जिला कलेक्टर और राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के प्रतिनिधि शामिल हैं। नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करते हुए राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल मौके का निरीक्षण कर छह सप्ताह में तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।
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जियो टैगिंग और वृक्ष गणना के निर्देश
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ट्रिब्यूनल ने राज्य के सभी शहरों और जिलों में पेड़ों की गिनती कर उनकी जियो-टैगिंग अनिवार्य कर दी है। इसके तहत हर पेड़ की स्थिति, प्रजाति और संख्या का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाएगा और इसे मुख्य वन संरक्षक कार्यालय के साथ साझा करना अनिवार्य होगा। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी प्रधान मुख्य वन संरक्षक या उनके द्वारा नामित अधिकारी करेंगे। ट्रिब्यूनल ने रेखांकित किया कि पुराने और विकसित वृक्षों की कटाई से खोई हरियाली को पुनः प्राप्त करने में 70 से 100 साल लग सकते हैं। इसलिए पर्यावरणीय नुकसान के आकलन में पेड़ के पूरे जीवनकाल के दौरान मिलने वाली ऑक्सीजन को ध्यान में रखना आवश्यक है।
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पार्क का इतिहास और अगली सुनवाई
यह मामला अनिल कुमार शर्मा द्वारा दायर आवेदन पर सामने आया था। आवेदन के अनुसार चौमूं हाउस पार्क की जमीन मूल रूप से ठाकुर राज सिंह ने आवंटित की थी और वर्ष 1960 से इसका उपयोग सार्वजनिक पार्क के रूप में हो रहा था। आरोप है कि कुछ अनधिकृत तत्वों ने जयपुर विकास प्राधिकरण की चहारदीवारी तोड़कर बिना किसी मंजूरी के हरे पेड़ों को काट डाला। न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने अवैध कटाई पर तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए। ट्रिब्यूनल अब इस मामले पर अगली सुनवाई 16 दिसंबर 2026 को करेगा।
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