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Tikaram Julie: 'विधानसभा का गतिरोध सोची समझी नीति का हिस्सा, सरकार चाहती है कि नेता प्रतिपक्ष का भाषण न हो'

Tue, 25 Feb 2025 08:37 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: अरविंद कुमार Updated Tue, 25 Feb 2025 08:37 PM IST
सार

टीकाराम जूली ने कहा कि सदन की यह परंपरा रही है कि यदि किसी सदस्य द्वारा कोई आपत्तिजनक या भावनाओं को आहत करने वाला शब्द कहा जाता है तो उसे आहत पक्ष की भावना के अनुरूप सदन की कार्यवाही से निकाल दिया जाता है।

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Tikaram Julie deadlock assembly part of well thought out policy government wants that should not give speech
टीकाराम जूली - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सदन में पैदा हुए गतिरोध का कारण सरकार की सोची समझी रणनीति और हठधर्मिता को बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार के मंत्री द्वारा जानबूझकर दिवंगत प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी के बारे में अमर्यादित टिप्पणी की गई। जूली ने कहा कि सदन में कहा गया असंसदीय शब्द ही आपत्तिजनक नहीं होता, वह शब्द किस भाव से कहा गया है, यह महत्वपूर्ण होता है। 

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प्रतिपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने कहा कि सदन की यह परम्परा रही है कि यदि किसी सदस्य द्वारा कोई आपत्तिजनक या भावनाओं को आहत करने वाला कोई शब्द कहा जाता है, तो उसे आहत पक्ष की भावना के अनुरूप सदन की कार्यवाही से निकाल दिया जाता है, लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण रहा कि कई बार प्रतिपक्ष के द्वारा आसन से निवेदन किये जाने के बावजूद प्रतिपक्ष की गुहार को नजरअंदाज कर दिया गया। उन्होंने कहा कि यदि प्रतिपक्ष के निवेदन को स्वीकार कर आपत्तिजनक शब्द को सदन की कार्यवाही से निकाल दिया जाता तो इस दुर्भाग्यपूर्ण गतिरोध को टाला जा सकता था।
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प्रतिपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने सरकार पर आरोप लगाया है कि सरकार सदन को चलाना ही नहीं चाहती। उन्होंने कहा कि सत्र प्रारम्भ होने से पहले हुई सर्वदलीय बैठक में प्रतिपक्ष द्वारा यह आश्वस्त किया गया था, कि प्रतिपक्ष सदन की कार्यवाही को चलाने में सकारात्मक सहयोग प्रदान करेगा और उसी अनुरूप राज्यपाल महोदय का अभिभाषण निर्विघ्न रूप से पूरा हुआ, लेकिन उसके बाद सदन में जब भी प्रतिपक्ष के सदस्यों द्वारा कोई प्रश्न पूछा जाता है, तो उसका पूरा जबाव नहीं आता है। जब किसी जनहित के मुद्दे को उठाया जाता है और सरकार उसका जवाब नहीं दे पाती है, तो सत्ता पक्ष के कई सदस्य एक साथ खड़े होकर बोलना शुरू कर देते हैं, इस प्रकार मंत्री को जबाव देने से बचाने का प्रयास किया जाता है। यहां तक कि मंत्रीगण भी व्यवधान में शामिल हो जाते हैं। इस प्रकार सदन में संख्या बल की ताकत पर प्रतिपक्ष की आवाज को दबाया जाता है।
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प्रतिपक्ष के नेता जूली ने कहा, जब सरकार के कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा द्वारा सरकार पर फोन टैपिंग के आरोप लगाए गए तो प्रतिपक्ष द्वारा इस गंभीर विषय पर शासकीय वक्तव्य की मांग की गई, लेकिन गृह राज्यमंत्री द्वारा सदन में वक्तव्य नहीं देकर, विधानसभा में ही मीडिया के सामने बयान देकर किरोड़ीलाल मीणा के आरोपों को झूठा बताया गया। यदि यही बात सदन में कह दी जाती तो कोई गतिरोध ही उत्पन्न नहीं होता। सदन में कांग्रेस द्वारा इस सम्बन्ध में वस्तुस्थिति की जानकारी चाही गई तो योजनाबद्ध तरीके से सदन में गतिरोध उत्पन्न कर मुद्दे को दबाने का प्रयास किया गया। इसके बाद भी मंत्री द्वारा अपने आरोपों को दोहराना बहुत गंभीर विषय है, लेकिन इस विषय पर प्रतिपक्ष द्वारा सरकार को कटघरे में खड़ा करने की आशंका को देखते हुए सदन में गतिरोध को जारी रखा गया। इससे यह जाहिर होता है कि यह सारा घटनाक्रम सरकार की सोची समझी रणनीति का हिस्सा था, ताकि नेता प्रतिपक्ष के रूप में मैं सदन में सरकार की विफलता, अकर्मण्यता और जनता से जुड़े विषयों को नहीं उठा सकूं।

जूली ने कहा कि राज्यपाल अभिभाषण पर चर्चा के दौरान जब प्रतिपक्ष के नेता का वक्तव्य होना था, उससे पूर्व ही योजनाबद्ध तरीके से सदन में ऐसा माहौल उत्पन्न कर दिया, जिसके कारण मुझे जनता से जुडे महत्वपूर्ण मुद्दों और सरकार की विफलताओं को सदन में उठाने के अधिकार से वंचित हो पड़ा।प्रतिपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने सदन में चले गतिरोध और कांग्रेस विधायक दल के धरने और सारे घटनाक्रम पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कि जब माननीय अध्यक्ष महोदय में वैश्म में लिये गये निर्णय के अनुसार मेरे स्वयं के द्वारा पूरे घटनाक्रम पर खेद व्यक्त किये जाने और हमारे दल के वरिष्ठ सदस्य राजेन्द्र पारीक द्वारा पूरे प्रकरण पर पूर्व के दृष्टांत और परम्पराओं का हवाला देते हुए आसन की उदरता की गुहार लगाते हुए सदन की कार्यवाही को चलाने का अनुरोध किया। जूली ने कहा कि हम आसन के आभारी हैं कि उन्होंने एक नई परम्परा कायम करते हुए सदन से निलम्बित सदस्य गोविन्द सिंह डोटासरा को सदन में बुलाने का अवसर दिया।

इस पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने भी सम्पूर्ण घटनाक्रम को खेदजनक बताते हुए अपनी बात सदन में रखी और तय मसौदे के अनुसार जिन मंत्री की आपत्तिजनक टिप्पणी पर विवाद हुआ, उनसे सदन माफी मंगवाए जाने की मांग की गई, लेकिन मंत्री द्वारा माफी मंगवाये जाने की मांग को दरकिनारे करते हुए संसदीय कार्य मंत्री द्वारा राजनीतिक भाषण कर पुनः गतिरोध को बढा दिया गया। इसके बाद तीन बार मेरे द्वारा आसन से अनुरोध किये जाने के उपरान्त भी आसन की ओर से सख्त रूख अख्तियार करते हुए लोकसभा की तर्ज और नियमों का हवाला देते हुए सख्ती अपनाये जाने और यह कहे जाने पर कि अब संभव नहीं है, हम सदन की कार्यवाही चलायेंगे आपको करना है, वो करलो। आसन के सख्त रवैये के बाद प्रतिपक्ष ने कार्यवाही का बहिष्कार किया और सदन से बाहर आ गये और सदन से निलम्बित 6 माननीय सदस्यों के साथ एकजुटता के साथ शांतिपूर्वक लोकतांत्रिक तरीके से लोकतंत्र के मन्दिर के बाहर बैठकर लोकतंत्र और संविधान को बचाने की प्रार्थना की। 

प्रतिपक्ष के नेता जूली ने कहा कि हमने हर सम्भव प्रयास किया कि यह सदन चले, हम जनता के मुद्दों को सदन में उठाकर उन्हें राहत दिलाने के लिये प्रयास करें, लेकिन सरकार राज्यपाल अभिभाषण की भांति बजट पर भी मुझे नहीं बोलने देना चाहती, इसीलिए सरकार द्वारा यह सारा षडयंत्र रचा गया है।

उन्होंने कहा कि सदन को चलाने की जिम्मेदारी सत्ता पक्ष की होती है और प्रतिपक्ष उसमें सहयोग प्रदान करता है। प्रतिपक्ष तो अपना राजधर्म पूरी ईमानदारी से निभा रहा है, लेकिन सत्ता पक्ष अपनी जिम्मेदारी को गम्भीरतापूर्वक निभाने में असमर्थ रहा है। यह गतिरोध सरकार की अकर्मण्यता और सरकार व संगठन की आपसी खींचतान का परिणाम है। जूली ने कहा कि कांग्रेस गतिरोध के सम्मानजनक हल के लिये वार्ता को पहले भी तैयार थी और आज भी तैयार है, लेकिन सरकार तो गम्भीरतापूर्वक प्रयास करती। कांग्रेस कभी असत्य और अन्याय के खिलाफ नहीं झुकेगी और संसदीय परम्पराओं के अनुरूप अपने अधिकारों की रक्षा के लिये हर गलत बात का मुखर तरीके से विरोध करेगी।


प्रतिपक्ष के नेता जूली ने कहा कि उम्मीद है, सरकार को सद्बुद्धि आए और वह सदन को चलाने के लिये सौहार्दपूर्ण वातावरण तैयार करे। यदि सरकार अपनी हठधर्मिता पर कायम रही, तो कांग्रेस नियमों और परम्पराओं के अनुसार अपनी आवाज को हर स्तर पर पहुंचाएगी और जनभावना को गूंगी बहरी और अकर्मण्य सरकार तक पहुंचाने के लिए हरसंभव प्रयास करेगी।

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