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जयपुर: फर्जी डिग्री से डॉक्टर बने दो आरोपी गिरफ्तार, एसओजी ने किया खुलासा; एक आरोपी आठवीं पास

Fri, 16 Oct 2026 03:45 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Fri, 16 Oct 2026 03:45 PM IST
सार

राजस्थान में फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों से डॉक्टर के रूप में पंजीकरण कराने के आरोप में एसओजी ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक आरोपी आठवीं पास है, जो रानीवाड़ा में अस्पताल चलाता था।

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SOG Arrests Two for Allegedly Using Fake Degrees to Register as Doctors in Rajasthan
आरोपी पंकज यादव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

। राजस्थान में फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर डॉक्टर के रूप में पंजीकरण कराने के मामले में एसओजी ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी एमबीबीएस डिग्री और स्त्री रोग एवं प्रसूति विज्ञान में डिप्लोमा के दस्तावेजों के आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण कराया था। इनमें से एक आरोपी पंकज यादव ने कथित तौर पर फर्जी एमबीबीएस डिग्री और अंकतालिका तैयार करवाई, जबकि दूसरे आरोपी नानजीराम चौधरी के शैक्षणिक दस्तावेजों के सत्यापन में भी फर्जीवाड़ा सामने आया। एसओजी मामले में अन्य आरोपियों और मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन पदाधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर रही है।

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छह बार एफएमजी परीक्षा दी, लेकिन पास नहीं हुआ

एसओजी की जांच के अनुसार, पंकज यादव ने वर्ष 2013 से 2018 के बीच कजाकिस्तान से एमबीबीएस की पढ़ाई की थी। इसके बाद उसने विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स परीक्षा (एफएमजी) करीब छह बार दी, लेकिन सफल नहीं हो सका। आरोप है कि इसके बाद उसने बिहार के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज की फर्जी एमबीबीएस डिग्री और अंकतालिका तैयार की। साथ ही बिहार मेडिकल काउंसिल का फर्जी पंजीकरण प्रमाणपत्र बनाकर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पेश किया और डॉक्टर के रूप में पंजीकरण करा लिया।

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दस्तावेजों का बिहार मेडिकल काउंसिल, आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, पटना और श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज, मुजफ्फरपुर से सत्यापन कराया गया। जांच में श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज में आरोपी का पंजीकरण नहीं मिला। आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, उसकी डिग्री और अंकतालिका फर्जी पाई गईं। एसओजी ने पंकज यादव को हरियाणा के कैथल से गिरफ्तार किया। जांच के मुताबिक, गिरफ्तारी से बचने के लिए वह वहां रह रहा था।

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आठवीं पास आरोपी ने स्त्री रोग विशेषज्ञ का डिप्लोमा दिखाया

दूसरे आरोपी नानजीराम चौधरी पर स्त्री रोग एवं प्रसूति विज्ञान में डिप्लोमा (डीजीओ) से जुड़े फर्जी दस्तावेज पेश कर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण कराने का आरोप है। एसओजी के अनुसार, संबंधित संस्था द कॉलेज ऑफ फिजिशियंस एंड सर्जन्स, मुंबई से दस्तावेजों का सत्यापन कराने पर डिप्लोमा प्रमाणपत्र, अलॉटमेंट लेटर, पासिंग सर्टिफिकेट और परीक्षा में शामिल होने से जुड़े प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए।

जांच में यह भी सामने आया कि नानजीराम चौधरी कथित तौर पर केवल आठवीं कक्षा तक पढ़ा है। इसके बावजूद उसने दसवीं और बारहवीं की अंकतालिकाएं, एमबीबीएस डिग्री और स्त्री रोग से संबंधित डिप्लोमा के दस्तावेज पेश किए थे। एसओजी ने उसे जालोर जिले के रानीवाड़ा से गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, वह रानीवाड़ा स्थित भास्कर हॉस्पिटल का संचालक है।

पहले पर्चियां काटता था, बाद में अस्पताल का मालिक बना

एसओजी की जांच के मुताबिक, नानजीराम चौधरी ने वर्ष 2010 के आसपास रानीवाड़ा में एक निजी चिकित्सक के क्लीनिक पर ओपीडी काउंटर में मरीजों की पर्चियां काटने का काम किया था। इसके बाद उसने कुछ वर्षों तक रेडीमेड कपड़ों की दुकान पर काम किया। वर्ष 2014 में वह रानीवाड़ा के राजदेव हॉस्पिटल में ओपीडी काउंटर पर पर्चियां काटने लगा।

आरोप है कि वर्ष 2015 में उसने अस्पताल के मालिक से अस्पताल खरीद लिया और 2016 में उसका नाम बदलकर भास्कर हॉस्पिटल कर दिया। शुरुआत में अस्पताल में जनरल मेडिसिन के चिकित्सक काम करते थे। वर्ष 2019 में आरोपी ने वहां एक स्त्री रोग विशेषज्ञ को भी नियुक्त किया।

अस्पताल में कार्यरत डॉक्टरों के पंजीकरण से जुड़े काम के सिलसिले में उसे राजस्थान मेडिकल काउंसिल के कार्यालय जाना पड़ता था। एसओजी के अनुसार, इसी दौरान उसने काउंसिल के तत्कालीन पदाधिकारियों और कुछ कर्मचारियों से संपर्क स्थापित किया और कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अपना पंजीकरण करवा लिया।

आठ अन्य लोगों के खिलाफ भी दर्ज हुआ था मामला

राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. गिरिधर गोपाल ने 6 अक्टूबर 2024 को जयपुर के अशोक नगर थाने में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर डॉक्टर के रूप में पंजीकरण कराने के मामले में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शुरुआती जांच में आठ लोगों के नाम सामने आए थे। बाद में जांच के दौरान नानजीराम चौधरी के कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पंजीकरण कराने की जानकारी मिलने पर उसके संबंध में भी अतिरिक्त रिपोर्ट दी गई।

शुरुआत में नामजद आठ लोगों में शांतनु कुमार चारण, दीपक चौधरी, देवेंद्र नेहरा, गीता कुमारी, पंकज यादव, महेश कुमार गुर्जर, सरीमुल मजूमदार और रामकिशोर महावर शामिल हैं। मामले की जांच बाद में एसओजी को सौंप दी गई थी।

मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका की जांच

एसओजी के अनुसार, जांच में कथित तौर पर फर्जी और कूटरचित शैक्षणिक दस्तावेज तैयार करने या उपलब्ध कराने तथा उनके आधार पर पंजीकरण कराने का तरीका सामने आया है। राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन पदाधिकारियों और कर्मचारियों की संभावित भूमिका की भी जांच की जा रही है।

पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी डिग्री और अन्य दस्तावेज किसने तैयार किए या उपलब्ध कराए, आरोपियों को पंजीकरण दिलाने में किन लोगों ने मदद की और मामले में नामजद अन्य आरोपियों की क्या भूमिका रही। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पंजीकरण कराने वाले दूसरे लोगों के संबंध में भी जानकारी जुटाई जा रही है। एसओजी ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उनकी पुलिस अभिरक्षा प्राप्त की गई। मामले में आगे की जांच जारी है।

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