RJ Election Result: हार के बाद छलका पूनिया का दर्द; जातियों का जंजाल बताकर छोड़ा आमेर, लिखी भावुक पोस्ट
राजस्थान विधानसभा चुनावों में बीजेपी के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां आमेर विधानसभा सीट को भविष्य में छोड़ने का एलान कर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना दर्द बयां करते हुए बहुत कुछ लिखा। पढ़िए उनकी भावुक पोस्ट....
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राजस्थान में चुनावों के लिए कहा जाता है कि यह मुद्दों से शुरू जरूर होता है, लेकिन खत्म जातियों पर ही होता है। आमेर में बीजेपी के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां ने अपनी हार के लिए भी जातियों को ही जिम्मेदार बताया है। ऐसा माना जा रहा था इस बार सतीश पूनियां के लिए आमेर का मुकाबला बेहद कठिन रहने वाला है, क्योंकि यहां ब्राह्मणों के वोट इस बार प्रशांत शर्मा के पक्ष में लामबद्ध हो रहे थे। इसका असर नतीजो में भी दिखा। कांग्रेस के प्रशांत शर्मा ने उन्हें 9 हजार से भी ज्यादा वोटों हरा दिया। पूनिया को यह हार कितना कचोट रही है इसका अंदाजा उनके सोशल मीडिया पर साझा किए गए पोस्ट से लग रहा है। उन्होंने भविष्य में आमेर में काम करने से इंकार कर दिया है।
राम राम सा,
लोकतंत्र में जनता जनार्दन होती है, मैं आमेर की जनता के निर्णय को स्वीकार करता हूँ और कांग्रेस के विजयी प्रत्याशी श्री प्रशान्त शर्मा जी को बधाई देता हूँ, आशा करता हूँ कि वो आमेर के विकास को यथावत गति देते रहेंगे और जन भावनाओं का सम्मान करेंगे।विज्ञापन
आमेर से मेरा रिश्ता दस…— Satish Poonia (@DrSatishPoonia) December 4, 2023
पूनिया ने पोस्ट-
"लोकतंत्र में जनता जनार्दन होती है, मैं आमेर की जनता के निर्णय को स्वीकार करता हूं और कांग्रेस के विजयी प्रत्याशी श्री प्रशांत शर्मा जी को बधाई देता हूं, आशा करता हूं कि वो आमेर के विकास को यथावत गति देते रहेंगे और जन भावनाओं का सम्मान करेंगे।"
उन्होंने कहा "आमेर से मेरा रिश्ता दस बरसों से है, 2013 में पार्टी के निर्देश पर चुनाव लड़ने आया था, चुनाव में मात्र 329 वोटों की हार हुई लेकिन भाजपा की सरकार के दौरान हमने यहां विकास को मुद्दा बनाकर काम किया। हालांकि लोग कहते हैं कि यहां बड़ी-बड़ी जातियों का बाहुल्य है और जातियों के इस जंजाल में जाति से ऊपर उठकर कोई विकास की सोचें थोड़ा मुश्किल है, 2013-2018 में हमने कोशिश की, थोड़ा सफल हुए, विकास कार्यों से लेकर कोरोना के दौरान सेवा कार्यों से लोगों में भरोसा पैदा करने की कोशिश की थी, लेकिन शायद लोगों को समझाने में हम विफल रहे।"
उन्होंने कहा "माना कि चुनाव में हार जीत एक सिक्के के दो पहलू हैं, लेकिन आमेर की यह हार मेरे लिए सोचने पर मजबूर करने वाली है, एक आघात जैसी है, हमने सपने देखे थे कि आमेर इस बार रिवाज बदलेगा और हम मिलकर सरकार के माध्यम से कार्यकर्ताओं का सम्मान और जनता का बेहतरीन काम करके इसे आदर्श विधानसभा क्षेत्र बनाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, यह समय मेरे लिए कठिन परीक्षा की घड़ी जैसा है, परन्तु परिस्थितियों और मनोवैज्ञानिक रूप से मैं यह निर्णय करने के लिए मजबूर हूं कि मैं अब भविष्य में आमेर क्षेत्र के लोगों और कार्यकर्ताओं को सेवा और समय नहीं दे पाऊंगा, पार्टी नेतृत्व को भी मैं अपने निर्णय से अवगत करवाकर आग्रह करूंगा कि यहां कि समस्याओं के समाधान के लिए योग्य व्यक्तियों की नियुक्ति करें, साथ ही एक लंबे अरसे से पार्टी संगठन को पूरा समय देने के कारण पारिवारिक कामों से दूर रहा हूं, अत: अब मैं कुछ समय अपने पारिवारिक कामों को पूरा करने में लगूंगा, ईश्वर मुझे शक्ति दे।"