Exclusive: राजस्थान में नई तबादला नीति का ड्रॉफ्ट तैयार, नेताओं की अब नहीं चलेगी, अफसर ही कर सकेंगे ट्रांसफर
प्रदेश की नई भजनलाल सरकार ने नई तबादला नीति में मंत्री, विधायक और नेताओं का डिजायर सिस्टम को पूरी तरह से खत्म किया जा रहा है। प्रशासनिक सुधार विभाग ने नई तबादला नीति का ड्राफ्ट फाइनल कर लिया है। इसी महीने मुख्य सचिव सुधांश पंत की अध्यक्ष में हुई बैठक में इस ड्रॉफ्ट तैयार करने के लिए निर्देश जारी किए गए थे।
विस्तार
राजस्थान में अब हर साल 30 अप्रैल तक सरकारी कर्मचारियों के तबादले होंगे। इसके लिए प्रशासनिक सुधार विभाग की ओर से एक ड्राफ्ट तैयार फाइनल कर लिया गया है। हालांकि, विधायकों के लिए यह तबादला नीति खासी चिंता बढ़ाने वाली है। क्योंकि अब तबादलों में उनकी डिजायर बिल्कुल नहीं चलेगी। सारा पॉवर ब्यूरोक्रेसी के हाथों में ही रहेगा।
इसमें सभी विभागों को हर साल अपने विभागी पोर्टल पर एक फरवरी से 28 फरवरी तक यह सूचना देनी होगी कि वह कितने कर्मचारियों के तबादले करना चाहता है। तबादलों में कर्मचारियों के साथ काउंसलिंग भी होगी। इसके अलावा कर्मचारी खुद भी पोर्टल के जरिए तबादले के लिए आवेदन कर सकेंगे। नई तबादला नीति सरकारी विभागों, बोर्ड, निगमों पर राजकीय उपक्रमों पर भी लागू होगी। हालांकि, निर्वाचन विभाग, राज्यपाल सचिवालय और विधानसभा सचिवालय पर यह लागू नहीं होगी।
जानिए कैसी होगी नई ट्रांसफर नीति
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स्थानांतरण के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल बनेगा
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प्रशिक्षण काल के दौरान नहीं होगा तबादला
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हर साल 15 जनवरी को सभी विभागों को अपनी वेबसाइट पर यह जानकारी डालनी होगी कि वे कितने पदों पर तबादले कर सकते हैं
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तबादलों के लिए विभागों को अपने विभाग की कर्मचारी स्ट्रेंथ के आधार पर A व B कैटेगिरी बनानी होगी
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A कैटेगिरी उन विभागों की होगी, जिनकी कर्मचारी स्ट्रेंथ दो हजार से ज्यादा हो। वहीं, B कैटेगिरी वाले विभागों की कर्मचारी स्ट्रेंथ दो हजार से कम होगी
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कार्मिकों का स्थानांतरण समकक्ष पदों पर ही किया जा सकेगा। उच्च व निम्न पदों पर नहीं किया जा सकेगा
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विभाग में अधिकारी व कर्मचारी का सेवा काल कम से कम दो वर्ष के लिए ग्रामीण क्षेत्र स्थित कार्यालय में भी होगा
तबादले से पहले कर्मचारियों की काउंसलिंग भी
जो कर्मचारी अपना तबादला करवाना चाहते हैं, वे प्रतिवर्ष 1 फरवरी से 28 फरवरी तक अपने विभाग के पोर्टल पर आवेदन कर सकेंगे। इसके बाद 30 अप्रैल तक कर्मचारियों के तबादले हर साल किए जा सकेंगे। जो कर्मचारी तबादले के लिए ऑनलाइन आवेदन करेंगे, उन्हें काउंसलिंग में शामिल किया जाएगा। काउंसिलिंग में सबसे पहले दिव्यांगजन, एकल महिला, विधवा, तलाकशुदा महिला, भूतपूर्व सैनिक, उत्कृष्ट खिलाड़ी, पति-पत्नी प्रकरण व असाध्य रोग से पीड़ित आवेदक व शहीद के आश्रित सदस्य डार्क जोन में नियत अवधि तक कार्य कर चुके कार्मिकों को बुलाया जाएगा। इनमें असाध्य रोग से पीड़ित व पति-पत्नी को प्राथमिकता दी जाएगी। विभागों को काउंसलिंग के दस्तावेजों को सुरक्षित रखना होगा।
कार्मिक का वर्तमान पद से स्थानांतरण दो वर्ष की अवधि पूर्व होने पर किया जा सकेगा। एक वर्ष की गणना प्रतिवर्ष एक अप्रैल को माना जाएगा। यानी किसी वर्ष विशेष में एक अप्रैल को दो वर्ष पूरे होने पर वह कर्मचारी तबादले के लिए आवेदन कर सकेगा। लेकिन दिव्यांगजन, विधवा, परित्यक्ता एवं एकल महिला तथा असाध्य रोग से पीड़ित, भूतपूर्व सैनिक, उत्कृष्ट खिलाड़ी, पति-पत्नी प्रकरण व शहीद के आश्रित सदस्य डार्क जोन में नियत अवधि तक कार्य कर चुके कार्मिक इस अवधि से पहले भी आवेदन कर सकेंगे। यदि कार्मिक एक ही कार्यालय में तीन वर्ष पूरे कर चुका हो तो प्रशासनिक आधार पर उसका स्थानांतरण किया जा सकेगा। कार्मिक के खिलाफ गंभीर शिकायतें हों तो कर्मचारी का तबादला किया जा सकेगा, ताकि वह जांच को प्रभावित नहीं कर सके। पदोन्नति में जहां तक संभव हो रिक्त पद पर तबादला किया जा सकेगा।
स्थानांतरण से छूट के लिए विशेष प्रकरण
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अंतर विभागीय समायोजन, प्रतिनियुक्ति के मामले में स्थानांतरण प्रकरणों को नीति में निर्धारित समयावधि की बाध्यता से मुक्त रखा जाएगा
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न्यायिक मामलों में स्थानांतरण प्रकरणों को नीति में निर्धारित समयावधि की बाध्यता से मुक्त रखा जाएगा
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पद की समाप्ति अथवा कर्मचारी के पदावनत होने की स्थिति में स्थानांतरण प्रकरणों को नीति में निर्धारित समयावधि की बाध्यता से मुक्त रखा जाएगा
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APO प्रकरणों में भी स्थानांतरण प्रकरणों को नीति में निर्धारित समयावधि की बाध्यता से मुक्त रखा जाएगा