राजस्थान: बॉस का नाम लेकर हो रही साइबर ठगी! WhatsApp-E-mail पर आए मैसेज से रहें सावधान, पुलिस ने किया अलर्ट
राजस्थान पुलिस ने कंपनियों के कर्मचारियों को निशाना बनाने वाले 'बॉस स्कैम' को लेकर चेतावनी जारी की है। साइबर अपराधी वरिष्ठ अधिकारी, कंपनी प्रमुख या बिजनेस पार्टनर बनकर व्हाट्सऐप, ई-मेल और एसएमएस के जरिए तत्काल पैसे ट्रांसफर करने, गिफ्ट कार्ड खरीदने या गोपनीय जानकारी साझा करने का दबाव बना रहे हैं।
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कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों को निशाना बनाकर साइबर ठगी करने वाले अपराधियों ने अब ठगी का नया तरीका अपनाया है। राजस्थान पुलिस ने ऐसे ही 'बॉस स्कैम' को लेकर कर्मचारियों और कंपनियों को सतर्क किया है। साइबर अपराधी कंपनी के बॉस, वरिष्ठ अधिकारी या बिजनेस पार्टनर बनकर व्हाट्सऐप, ई-मेल और एसएमएस के जरिए कर्मचारियों से संपर्क कर रहे हैं। इसके बाद वे तत्काल पैसे ट्रांसफर करने, गिफ्ट कार्ड खरीदने या कंपनी से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा करने का दबाव बनाते हैं।
पहले जुटाते हैं कंपनी और अधिकारियों की जानकारी
पुलिस अधीक्षक विकास सांगवान ने बताया कि साइबर जालसाज ठगी की शुरुआत कंपनी और उसके अधिकारियों से जुड़ी जानकारी जुटाने से करते हैं। इसके लिए वे कंपनी, उसके वरिष्ठ अधिकारियों, ई-मेल के पैटर्न, संपर्क नंबर और सोशल मीडिया अकाउंट से जुड़ी जानकारियां एकत्र करते हैं। इसके बाद अपराधी किसी वरिष्ठ अधिकारी की पहचान अपनाकर कर्मचारियों का विश्वास हासिल करते हैं। ठगी के दौरान वे कंपनी के वास्तविक अधिकारियों के नाम, पदनाम और प्रोजेक्ट से जुड़े विवरण का इस्तेमाल करते हैं, ताकि कर्मचारी को संदेश या निर्देश वास्तविक लगें।
कंप्यूटर में मालवेयर डालकर भी चुराते हैं जानकारी
पुलिस के मुताबिक, अपराधी ठगी के लिए केवल फर्जी पहचान का इस्तेमाल नहीं करते, बल्कि कार्यालय में इस्तेमाल होने वाले कंप्यूटर या लैपटॉप में ट्रोजन हॉर्स मालवेयर डालकर भी महत्वपूर्ण सूचनाएं चुरा सकते हैं। यदि किसी कंप्यूटर पर व्हाट्सऐप वेब सक्रिय है, तो अपराधी लिंक्ड डिवाइस या क्यूआर कोड के जरिए संबंधित खातों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकते हैं। इसके बाद कर्मचारी को कंपनी के अधिकारी के नाम से भुगतान करने के निर्देश भेजे जाते हैं। ठगी के बाद रकम को म्यूल अकाउंट, क्रिप्टोकरेंसी या नकद निकासी के जरिए आगे दूसरे स्थानों पर ट्रांसफर किया जा सकता है, जिससे रकम के वास्तविक स्रोत तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
ई-मेल में मामूली अंतर भी हो सकता है खतरे का संकेत
राजस्थान पुलिस ने 'बॉस स्कैम' की पहचान के लिए कुछ संकेतों पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है। ई-मेल पते में मामूली अंतर, कार्यालय समय के बाद अचानक किसी वरिष्ठ अधिकारी का संपर्क करना, बेहद जल्दबाजी में कार्रवाई करने का दबाव और गोपनीय लेनदेन के निर्देश इसके प्रमुख संकेत हो सकते हैं। इसके अलावा किसी नए बैंक खाते में तुरंत पैसे भेजने के लिए कहना और फोन या वीडियो कॉल के जरिए बात करने से बचना भी संदेह पैदा कर सकता है। संदेश में भाषा या व्याकरण से जुड़ी गलतियां भी यह संकेत दे सकती हैं कि संदेश किसी जालसाज ने भेजा है।
भुगतान से पहले आधिकारिक माध्यम से करें पुष्टि
पुलिस ने कर्मचारियों को सलाह दी है कि वित्तीय लेनदेन या डेटा से संबंधित किसी भी संदेश की पुष्टि हमेशा आधिकारिक माध्यम से करें। केवल व्हाट्सऐप या ई-मेल पर मिले निर्देश के आधार पर किसी खाते में पैसा ट्रांसफर न करें। पुलिस ने कंपनियों को भी बड़े वित्तीय लेनदेन के लिए बहुस्तरीय मंजूरी व्यवस्था लागू करने की सलाह दी है। इससे किसी एक कर्मचारी के पास आए फर्जी निर्देश के आधार पर तत्काल भुगतान होने की संभावना कम की जा सकती है। राजस्थान पुलिस ने कर्मचारियों और कंपनियों से अपील की है कि किसी भी असामान्य भुगतान अनुरोध, गोपनीय जानकारी मांगने या वरिष्ठ अधिकारी के नाम से आए अचानक निर्देश को बिना सत्यापन के स्वीकार न करें और साइबर ठगी से बचने के लिए हमेशा सतर्क रहें।