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Rajasthan News : क्यों नहीं सुलझ रहा राजनेताओं और ब्यूरोक्रेसी के बीच चला आ रहा विवाद? पढ़िये ये खास रिपोर्ट

Fri, 06 Dec 2024 11:23 AM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: प्रिया वर्मा Updated Fri, 06 Dec 2024 11:23 AM IST
सार

देश में राजस्थान ही एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां अफसरों की चर्चा राजनेताओं से ज्यादा होती है। ऐसा नहीं है कि यह किसी एक दल के सत्ता में आने के बाद होता हो, यह ऐसी परिपाटी है, जो दशकों से चली आ रही है। ऐसा क्यों कहा जाता है जानिए इस रिपोर्ट में

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Rajasthan News: Why is the ongoing dispute between politicians and bureaucracy not being resolved? Read here
राजस्थान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

क्या राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी राजनेताओं से एक कदम आगे निकल चुकी है? सत्ता के समीकरण साधते-साधते अफसर और राजनेताओं के बीच अब फर्क बेहद मुश्किल नजर आने लगा है। राजस्थान में ऐसे अफसरों की संख्या काफी बड़ी है, जिन्होंने किसी राजनीतिक दल को ज्वाइन कर लिया। बीते 2 दिन से राजस्थान की अफसरशाही एक बार फिर चर्चाओं में है, इसकी वजह है कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा।

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उनका एक ताजा बयान है, जिसमें उन्होंने कहा है कि कुछ अधिकारी उनके और सीएम के बीच गलतफहमी और दिक्कत पैदा करने का काम कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह सवाल किया था कि आखिर सीएम उनसे क्यों नहीं मिलना चाहते। किरोड़ी ने कहा कि हमारे रिश्ते में कोई खटास नहीं है लेकिन ये अधिकारी कौन हैं, जो गलतफहमी और समस्याएं पैदा कर रहे हैं? उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि वे यह जानने की कोशिश करें कि कौन अधिकारी उनके और सीएम के बीच झगड़ा उत्पन्न करने की कोशिश कर रहे हैं।
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राजस्थान की राजनीति में यह इकलौता ऐसा बयान नहीं है, जिसमें राजनेता खुद को अफसशाही से पीड़ित बता रहे हों और न ही ये सिर्फ बीजेपी की बात है। राजस्थान में यह सत्ता की परिपाटी रही है, जिसमें सभी दल समान रूप से शामिल हैं।
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गहलोत सरकार में मंत्री और सीएम सचिव की लड़ाई

पिछली गहलोत सरकार में भी ऐसे कई विवाद सामने आए थे, जिसमें कांग्रेस के मंत्रियों ने अफसरशाही से गहरी नाराजगी जताई थी और यह आरोप भी लगाए थे कि अफसर उनके काम नहीं होने देते।

गहलोत सरकार में खेल मंत्री अशोक चांदना ने तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय के कुलदीप रांका से खुलकर नाराजगी जताई थी। यहां तक कि नाराजगी जताते हुए अशोक चांदना ने ट्वीटर अकाउंट पर ट्वीट करके लिखा था कि 'मुख्यमंत्री जी, मेरा आपसे व्यक्तिगत अनुरोध है कि मुझे इस जलालत भरे मंत्री पद से मुक्त कर मेरे सभी विभागों का चार्ज कुलदीप रांका को दे दिया जाए। क्योंकि वैसे भी वे मेरे सभी विभागों के मंत्री हैं।'

बीजेपी ने की थी घेराबंदी

चांदना के विवाद पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के केंद्रीय मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत ने बयान जारी कर कहा था कि अगर प्रदेश के मंत्री और कांग्रेस विधायकों के यह हालात हैं, तो आमजन की स्थिति समझी जा सकती है। बीजेपी के तत्कालीन अध्यक्ष सतीश पूनियां ने चांदना के इस बयान पर चुटकी लेते हुए ट्वीट किया था कि कांग्रेस अब डूबता जहाज है और इसके रुझान आने शुरू हो चुके हैं।

मंत्री-अफसर की लड़ाई में कूदी आईएएस एसो.

पिछली सरकार में तत्कालीन मंत्री रमेश मीणा और बीकानेर कलेक्टर भगवतीप्रसाद कलाल के बीच भी झगड़ा हो गया था। मंत्री ने आरोप लगाया था कि कलेक्टर उनके संबोधन को अनसुना कर फोन पर बातें करने में व्यस्त रहे। इस विवाद पर IAS एसोसिएशन ने नाराजगी जताते हुए तत्कालीन सीएस उषा शर्मा को ज्ञापन देकर मंत्री के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर डाली।

पिछली सरकार में ही अफसरों के रवैये से नाराज विधायक गणेश घोघरा ने तत्कालीन सीएम अशोक गहलोत को इस्तीफा तक भेज दिया था। वहीं सीएम अशोक गहलोत के सलाहकार संयम लोढ़ा ने भी गृह विभाग और राजस्व विभाग के अफसरों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव दिया था।

प्रदेश में अफसरशाही के खिलाफ पूर्व विधायक धीरज गुर्जर ने ट्वीट किया था कि “अधिकारी कभी किसी सरकार के नहीं होते। वो सत्ता के और खुद के होते हैं। जब अपनी कुर्सी को बचाकर रखने के लिए विपक्षी दलों से हाथ मिला लेते हैं तब वो सरकार की कब्र खोद रहे होते हैं। समय पर इनकी पहचान न करने से किसी भी सरकार को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं।”

सत्ता बदलने पर गहलोत ने उठाए सवाल

प्रदेश में भाजपा की सरकार आने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भजनलाल सरकार की ब्यूरोक्रेसी को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के पास कोई पॉवर नहीं है और ना ही किसी मंत्री के पास है। मंत्री तो अपना विशिष्ट सहायक भी अपनी मनमर्जी से नहीं लगा पा रहे हैं। साथ ही कोई विशिष्ट सहायक किसी मंत्री के यहां लग रहा है, तो उसका बार-बार तबादला हो रहा है। पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने तो यहां तक कहा कि मुख्य सचिव सुधांश पंत ही डिफैक्टो सीएम हैं और उन्हीं की चल रही है।

कांग्रेस अब विपक्ष में है और अफसरों को लेकर उनके बयान भी बीजेपी की तरह ही तंज कसने वाले हैं। वहीं बीजेपी का हाल वैसा ही है, जैसा सत्ता में रहते हुए कांग्रेस का था।

खाचरियावास बोले कसा था तंज

पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास ने पिछले दिनों वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अखिल अरोड़ा को लेकर बड़ा बयान दिया था, जिसमें उन्होंने कहा कि जिस अखिल अरोड़ा पर किरोड़ीलाल मीणा ने बहुत बड़े-बड़े आरोप लगाए थे, उसे सरकार ने खजाने की चाबी कैसे सौंप रखी है?

बड़े अफसरों की अभियोजन स्वीकृति पर बीजेपी मौन

पिछली सरकार में अभियोजन स्वीकृति के पेंडिंग मामलों को लेकर बीजेपी ने विपक्ष में रहते हुए विधानसभा में काफी हंगामा किया था लेकिन अब पाला बदल चुका है। बीजेपी सत्ता में है और कांग्रेस विपक्ष में। अब कांग्रेस पेंडिंग अभियोजन स्वीकृतियों को लेकर सरकार को घेर रही है, जिन मामलों को विपक्ष में रहते बीजेपी ने उठाया था, उन्हीं मामलों में बीजेपी सरकार जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ एसीबी को जांच की अनुमति नहीं दे रही। 

इसमें डीओआईटी का भ्रष्टाचार सबसे बड़ा मुद्दा बनाया गया था लेकिन विभाग के तत्कालीन चेयरमैन अखिल अरोड़ा पर कार्रवाई तो दूर की बात सरकार ने उन्हें वित्त विभाग जैसी अहम जिम्मेदारी तक से नहीं हटाया। 


31 मई 2024 तक एसीबी को कुल 10128 परिवाद प्राप्त हुए। इनमें से 254 परिवादों में अनुसंधान के लिए अनुमति के लिए विभागाध्यक्षों को भेजे गए। विभागाध्यक्ष से अनुमति मांगे जाने पर कुल 20 परिवादों पर अनुमति मिली। 1 जनवरी 2023 से मई 2024 तक 182 कर्मचारियों,अफसरों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति लंबित है।

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