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Hindi News ›   Rajasthan ›   Jaipur News ›   Rajasthan News: High Court makes ED a party in Jal Jeevan scam, seeks status report in 4 weeks

Rajasthan News : जल जीवन घोटाले में हाईकोर्ट ने ईडी को पार्टी बनाया, 4 सप्ताह में मांगी स्टेटस रिपोर्ट

Wed, 13 Nov 2024 05:30 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: प्रिया वर्मा Updated Wed, 13 Nov 2024 05:30 PM IST
सार

राजस्थान में जल जीवन मिशन में हाईकोर्ट ने आज एक अहम फैसला देते हुए मामले से जुड़ी एक याचिका में ईडी तथा जीआई इंफ्रा को पार्टी बनाने के आदेश दे दिए हैं।

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Rajasthan News: High Court makes ED a party in Jal Jeevan scam, seeks status report in 4 weeks
राजस्थान - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

जल जीवन मिशन घोटाले से जुड़े मामले में जिस याचिका पर हाईकोर्ट सुनवाई कर रहा है, उसमें ED को भी पार्टी बनाने की मांग की गई थी, जिस पर राजस्थान हाईकोर्ट ने आज अहम फैसला देते हुए सुनवाई के दौरान ईडी को पार्टी बनाया है।

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याचिकाकर्ता पब्लिक अगेंस्ट करप्शन के सदस्य डॉ. टी.एन. शर्मा ने बताया कि हमने इस मामले में कोर्ट से अपील की थी कि मामले में ED को पार्टी बनाया जाए। इस पर आज हाईकोर्ट ने ED को पार्टी बनाने के आदेश जारी कर दिए हैं, इसके अलावा मामले में घोटालों के आरोपों से घिरी जीआई इंफ्रा को भी पार्टी बनाया गया है। 
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हाईकोर्ट ने ED को निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई तक मामले से जुड़ी स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट में पेश करे। गौरतलब है कि इससे पहले 2 बार हाईकोर्ट में यह मामला सुना जा चुका है। दूसरी सुनवाई के बाद बीते दिनों में मामले में एसीबी की एंट्री भी हुई थी। एसीबी ने इस प्रकरण में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के पीएचईडी मंत्री महेश जोशी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर की थी।
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979 करोड़ के इस घोटाले में राजस्थान में ED से लेकर CBI तक छापे मार चुकी है। जलदाय विभाग की जांच रिपोर्ट में भी ये पुख्ता साक्ष्य जुटाए जा चुके हैं कि करोड़ों के इस घोटाले में इरकॉन के नाम पर फर्जी प्रमाण पत्र बनाए गए थे। 

हालांकि विधानसभा चुनावों के दौरान जोर-शोर से इस मुद्दे को उठाने वाली भाजपा ने सत्ता में आने के बाद अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की है और एक साल बाद भी जलदाय विभाग ने सिर्फ एक एक्सईएन विशाल सक्सेना को मामले में सस्पेंड किया है।


याचिकाकर्ता का कहना है कि पूरी एफआईआर फर्जी दस्तावेजों द्वारा दो फर्म के टेंडर लेने तक सीमित है, जबकि योजना की जांच में सब स्टैंडर्ड काम का जिक्र भी है, जिस पर लगभग कोई कार्रवाई अब तक नहीं की गई है।

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