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Rajasthan News: चहेते अफसरों पर बरस रही है कृपा, मंत्रीजी के आदेश को दिखाया कूड़ेदान का रास्ता

Fri, 12 Jul 2024 11:28 AM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: प्रिया वर्मा Updated Fri, 12 Jul 2024 11:28 AM IST
सार

प्रदेश में सरकार चाहे बदल गई हो लेकिन पिछली सरकार के मंत्रियों और पावरफुल ब्यूरोक्रेट्स के चहेते अफसर अब भी मुख्यधारा में जड़ों तक जमे हुए हैं। सरकार के भीतर इनका सिस्टम ऐसा 'सेट' है कि सरकार किसी की भी हो इनका पूरा ध्यान रखा जाता है।

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Rajasthan News: Blessings are showering on favorite officers, minister's orders showed the way to dustbin
राजस्थान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिजली कंपनी से लेकर वित्त, यूडीएच, फूड डिपार्टमेंट में मर्ज होकर ब्यूरोक्रेट्स के चहेते इंजीनियर मलाईदार पदों पर जम चुके हैं। विभिन्न विभागों में अफसरों के इन चहेतों को एडजस्ट करने का खुला खेल चला। इस सबसे बड़ी बात कि मंत्रीजी के डेपुटेशन निरस्ती के आदेश को भी कूड़ेदान का रास्ता दिखा दिया गया।

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पिछली गहलोत सरकार में यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल के चहेते इंजीनियर को मौजूदा सरकार ने जेडीए में हायर पोस्ट का चार्ज दे रखा है। यह सिर्फ इकलौता मामला नहीं है पिछली सरकार ने बिजली कंपनियों के सैकड़ों इंजीनियर्स को सरकार में एडजस्ट करने का बड़ा खेल चला। इसके बाद प्रदेश में भजनलाल सरकार के ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने डेपुटेशन निरस्त करने के आदेश भी जारी किए लेकिन इसके बावजूद ये अफसर टस से मस नहीं हुए।
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एवीवीएनएल से यूडीएच, फिर जेडीए में पोस्टिंग

पिछली सरकार में यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल के चहेते कनिष्ठ अभियंता जितेंद्र नील को पहले बिजली कंपनी से सरकारी विभाग यूडीएच में मर्ज करवाया गया। इसके बाद यहां से यूडीएच के मलाईदार महकमे जेडीए में पोस्टिंग दी गई। अब मौजूदा भजनलाल सरकार में इसे एईएन की जगह एक्सईएन का चार्ज दिया गया है। हालांकि नियमानुसार सरकारी कंपनी से सरकार में कर्मचारी को मर्ज नहीं किया जा सकता लेकिन इस मामले में मर्ज भी हुए और बड़ी पोस्टिंग पर भी बैठे हैं।
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एवीवीएनएल से यूडीएच, फिर वित्त विभाग में पहुंचे

इसी तरह वित्त मार्गोपाय विभाग ने अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के सीनियर एओ आशीष शर्मा को रिवर्स डेपुटेशन पर यूडीएच विभाग में तैनाती दी। यही नहीं वित्त विभाग में इस एओ को बिजली कंपनियों को टैरिफ सब्सिडी बांटने की जिम्मेदारी भी दे दी गई, जबकि लेखा नियमों के अनुसार यह नहीं होना चाहिए। मजे की बात यह है कि वित्त विभाग में सबऑर्डिनेट के तौर पर काम कर रहे अन्य अफसरों की रिपोर्टिंग भी इन्हीं को दे दी गई।


खाद्य विभाग में चार की नियुक्ति रद्द

इसी तरह पिछली सरकार में खाद्य मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास के अनुमोदन पर जोधपुर विद्युत वितरण निगम और राजस्थान उत्पादक निगम के चार इंजीनियर खाद्य विभाग में मर्ज कर लिए गए थे। इनमें जोधपुर विद्युत वितरण निगम से सहायक अभियंता प्रतीक सोनी, कनिष्ठ अभियंता संध्या सोनी, राजस्थान उत्पादक निगम से सहायक अभियंता भूपराज जाटव, और जितेंद्र सचदेवा को रिवर्स डेपुटेशन पर सरकार में लिया गया। यही नहीं इन इंजीनियरों ने यहां 3 प्रमोशन भी ले लिए लेकिन मामला विवादों में आने के बाद विभाग के प्रमुख सचिव भास्कर सावंत ने इनकी प्रतिनियुक्ति रद्द कर दी।

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