राजस्थान: मेडिकल कॉलेजों में बढ़ीं 479 पीजी सीटें, अब कुल संख्या 3,950; देश में आठवां स्थान
नेशनल मेडिकल कमीशन के संशोधित सीट मैट्रिक्स के अनुसार राजस्थान के मेडिकल कॉलेजों में पीजी की 479 सीटें बढ़ी हैं। इसके बाद प्रदेश में कुल सीटों की संख्या 3,471 से बढ़कर 3,950 हो गई है। करीब 13.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ राजस्थान देश में आठवें स्थान पर पहुंच गया है।
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राजस्थान में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले अभ्यर्थियों के लिए अच्छी खबर है। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) मेडिकल सीटों का संशोधित सीट मैट्रिक्स जारी किया है। इसके अनुसार, राजस्थान के मेडिकल कॉलेजों में पीजी की 479 सीटें बढ़ाई गई हैं। इस बढ़ोतरी के बाद प्रदेश में कुल पीजी सीटों की संख्या 3,471 से बढ़कर 3,950 हो गई है। सीटों में करीब 13.8 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। इसके साथ ही पीजी मेडिकल सीटों की उपलब्धता के मामले में राजस्थान देश में आठवें स्थान पर पहुंच गया है।
सरकारी कॉलेजों में 55 प्रतिशत सीटें
संशोधित आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान के मेडिकल कॉलेजों में उपलब्ध कुल 3,950 पीजी सीटों में से 55 प्रतिशत सरकारी और 45 प्रतिशत निजी मेडिकल कॉलेजों में हैं। सीटों की संख्या बढ़ने से प्रदेश में पीजी मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के अवसर भी बढ़ेंगे।
नीट-पीजी काउंसलिंग के पहले दौर में 361 सीटें खाली
प्रदेश में नीट-पीजी 2026-27 की काउंसलिंग प्रक्रिया जारी है। स्टेट नीट-पीजी 2026 के पहले दौर में कुल 1,366 सीटों में से 995 सीटों पर अभ्यर्थियों ने रिपोर्टिंग की है। इस तरह पहले दौर के बाद 361 सीटें खाली रह गई हैं।
नीट-पीजी 2026 प्रवेश कमेटी की प्रमुख डॉ. मोनिका जैन ने बताया कि संशोधित सीट मैट्रिक्स और काउंसलिंग का दूसरा शेड्यूल जल्द जारी किया जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि संशोधित सीटों के साथ काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी होने पर सभी सीटें भर जाएंगी।
नए पाठ्यक्रम और बढ़ी सीटों के लिए ई-बैंक गारंटी जरूरी
नेशनल मेडिकल कमीशन ने नए पीजी पाठ्यक्रम शुरू करने या सीटों की संख्या बढ़ाने की अनुमति पाने वाले मेडिकल कॉलेजों के लिए कुछ शर्तें भी तय की हैं। संबंधित कॉलेजों को सात दिनों के भीतर निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक बैंक गारंटी (ई-बीजी) जमा करानी होगी। बैंक गारंटी का सत्यापन होने के बाद ही लेटर ऑफ परमिशन जारी किया जाएगा।
इसके अलावा कॉलेजों को नए पाठ्यक्रमों और बढ़ाई गई सीटों के लिए संबंधित विश्वविद्यालय से संबद्धता लेना अनिवार्य होगा। काउंसलिंग कराने वाले प्राधिकरणों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रवेश केवल नेशनल मेडिकल कमीशन की ओर से जारी अद्यतन स्वीकृत सीटों की सूची के आधार पर ही दें।