Rajasthan: विधानसभा में मारवाड़ चिकित्सा विश्वविद्यालय विधेयक 2023 पास, 'ओबीसी आरक्षण आर्थिक आधार पर हो'
राजस्थान विधानसभा में मारवाड़ चिकित्सा विश्वविद्यालय विधेयक 2023 पारित हुआ। इस दौरान पूर्व कैबिनेट मंत्री ऑक्ट बायतु विधायक हरीश चौधरी ने विधानसभा में बोलते हुए चिकित्सा विश्वविद्यालय में शोध पर जोर दिया। उन्होंने कहा, राजस्थान में ओबीसी आरक्षण आर्थिक आधार पर लागू हो।
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विधायक हरीश चौधरी ने कहा कि जब देश आजाद हुआ, तब नेहरू जी ने बिना संसाधनों के संस्थाओं का निर्माण किया और आज के दिन अमेरिका इतना विकसित हुआ है, तो अपने शोध के बल पर हुआ है। चौधरी ने कहा कि कांग्रेस की सरकार ने बाड़मेर में मेडिकल कॉलेज स्वीकृत कराया पर भाजपा ने पांच साल में उसका काम शुरू नहीं कराया। कांग्रेस की सरकार वापस आई, तब बाड़मेर मेडिकल कॉलेज का काम शुरू हुआ। चौधरी ने कहा कि राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में ओबीसी आरक्षण नहीं है, हमारी मांग है कि राजस्थान में ओबीसी आरक्षण आर्थिक आधार पर हो।
साथ ही जातिगत जनगणना की मांग करते हुए चौधरी ने कहा कि भाजपा की सरकार में जनगणना की कमेटी अभी तक नहीं बनी और मैं चाहता हूं कि इसकी शुरुआत राजस्थान से हो। उन्होंने कहा कि एससी आरक्षण की शुरुआत भी कांग्रेस की सरकार में हुई। आरक्षण इनका संवैधानिक हक़ है, और भाजपा सरकार में यह हक़ मारा जा रहा है, अन्याय किया जा रहा है।
'भाजपा नेताओं को चिरंजीवी योजना के बारे में नहीं पता'
बीजेपी नेताओं पर तंज कसते हुए हरीश चौधरी ने कहा कि भाजपा नेताओं को चिरंजीवी योजना के बारे में नहीं पता, क्योंकि वो सिर्फ उद्योगपतियों के पास जाते हैं। जनता के पास जाते तो उन्हें इस योजना की जानकारी होती। हरीश चौधरी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर ज़ोर देते हुए कहा कि यह हमारा भविष्य है। उन्होंने कहा कि भारतीय चिकित्सा क्षेत्र के अंदर 2025 तक एआई की कुल 11.78 बिलियन डॉलर की हिस्सेदारी होगी, और 2035 तक यह हिस्सेदारी एक ट्रिलियन डॉलर हो जाएगी। एआई से सर्जरी, डायग्नोसिस, रिकवरी में मदद होगी, हॉस्पिटल में भर्ती नहीं होना पड़ेगा और डॉक्टरों के ऊपर बोझ भी कम होगा जिससे वो शोध पर ध्यान लगा सकेंगे। विधायक हरीश चौधरी ने कहा कि राजस्थान में चिकित्सा का दृष्टिकोण Pro-Active होगा।
उन्होंने विपक्ष को संकीर्ण सोच से ऊपर उठकर भारत की 'सामंजस्य' और 'समग्रता' की सोच रख कर राजस्थान को आगे बढ़ाने का अनुरोध किया। विधायक चौधरी ने स्वास्थ्य मंत्री परसादी लाल मीणा और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को विश्वविद्यालय और उसके स्टाफ और डॉक्टरों के लिए धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान चिकित्सा ने कोरोना काल में को प्रबंध किए वो इतिहास में दर्ज है, और यह मारवाड़ विश्वविद्यालय भी इतिहास दर्ज करने की ओर एक और कदम है। उन्होंने विश्वविद्यालय के अकेडेमिक और नॉन अकेडेमिक स्टाफ के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू करने का भी आग्रह किया।
स्वास्थ्य मंत्री बोले- दौसा, बूंदी, करौली, अलवर और हनुमानगढ़ जिलों में भी इसी साल शुरू होंगे मेडिकल कॉलेज
चिकित्सा और स्वास्थ्य मंत्री परसादी लाल मीणा ने कहा कि जोधपुर में मारवाड़ चिकित्सा विश्वविद्यालय खुलने से पश्चिमी राजस्थान के मरीजों को अपने निकट ही बेहतर चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध हो सकेगी। इस विश्वविद्यालय को खोलने के लिए 500 करोड़ रूपये की वित्तीय स्वीकृति भी जारी कर दी गई है।
स्वास्थ्य मंत्री परसादीलाल मीणा गुरुवार को विधानसभा में मारवाड़ चिकित्सा विश्वविद्यालय विधेयक-2023 पर हुई चर्चा के बाद अपना जवाब दे रहे थे। इससे पहले मीणा ने विधेयक को चर्चा के लिए सदन में प्रस्तुत किया और चर्चा के बाद सदन ने विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। चिकित्सा और स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मेडिकल कॉलेजों की स्थापना कर प्रदेश में चिकित्सा सुविधाओं और सेवाओं का निरंतर विस्तार कर रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में ही 16 मेडिकल कॉलेज की शुरूआत की गई है और दौसा, बूंदी, करौली, अलवर और हनुमानगढ़ जिलों में भी इसी वर्ष मेडिकल कॉलेज शुरू हो जाएंगे। साथ ही, राज्य सरकार तीन जिलों जालौर, प्रतापगढ़ और राजसमंद में अपने वित्तीय संसाधनों से भी मेडिकल कॉलेज खोल रही है।
500 करोड़ रुपये वित्तीय स्वीकृति के साथ पोस्ट भी क्रिएट...
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि जोधपुर में मारवाड़ चिकित्सा विश्वविद्यालय को जल्द संचालित करने के लिए 500 करोड़ रूपये की वित्तीय स्वीकृति देने के साथ ही पद भी सृजित कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के भवन के लिए डीपीआर के लिए निर्देश भी जारी कर दिए है। उन्होंने बताया कि विभाग निरंतर महत्वपूर्ण निर्णय लेकर प्रदेश में चिकित्सीय तंत्र को सुदृढ़ कर रहा है और विभाग ने 400 सहायक आचार्यों की भर्ती की है। वहीं, प्रदेश में एमबीबीएस की सीटें भी 750 से बढ़कर तीन हजार 230 हो जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रत्येक प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र और सामुदायिक चिकित्सा केन्द्र पर चिकित्सक नियुक्त किए गए है। इससे पहले विधेयक को जनमत जानने के प्रस्ताव को सदन ने ध्वनिमत से अस्वीकार कर दिया।