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Rajasthan LS Election Result: जीत का श्रेय लेने के लिए गुटों में बंटी कांग्रेस, किसकी पकड़ होगी मजबूत?
Fri, 07 Jun 2024 03:53 PM IST
प्रिया वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Fri, 07 Jun 2024 03:53 PM IST
सार
राजस्थान में जहां भाजपा अपने हाथ से फिसली सीटों पर हारने को लेकर मंथन कर रही है, वहीं कांग्रेस को मिली जीत का सेहरा बंधवाने वालों के गुट बनते नजर आ रहे हैं। बहरहाल देखा जाए तो कांग्रेस यहां डोटासरा, गहलोत और पायलट के गुट में बंटी नजर आ रही है।
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राजस्थान
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
प्रदेश में लोकसभा चुनावों में हुई हार को लेकर जहां बीजेपी में इसकी जिम्मेदारी को लेकर मंथन चल रहा है, वहीं कांग्रेस भी जीत के श्रेय को लेकर गुटों में बंटती नजर आ रही है। राजस्थान कांग्रेस फिलहाल तीन बड़े गुटों में बंटीं नजर आ रही है, प्रदेशाध्यक्ष गोविंदसिंह डोटासरा, पूर्व सीएम अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट।
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चुनावों के निपटते ही राजस्थान कांग्रेस में गुटबाजी तेज हो गई है। जीत का श्रेय लेने के लिए कांग्रेस के शीर्ष नेता अपने समर्थक सांसदों से मिल रहे हैं लेकिन बीते 2 लोकसभा चुनावों के बाद पहली बार राजस्थान में कांग्रेस का खाता खुलने का क्रेडिट किसके खाते में जाने वाला है यह देखने वाली बात होगी।
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बड़े नेता के रूप में उभरे डोटासरा
लोकसभा चुनावों के बाद डोटासरा पार्टी में बड़े नेता के रूप में उभरकर सामने आए हैं। डोटासरा के प्रदेशाध्यक्ष रहते कांग्रेस ने 2 बड़े चुनाव 2023 का विधानसभा चुनाव और 2024 का लोकसभा चुनाव लड़े हैं। विधानसभा चुनावों में भी कांग्रेस का प्रदर्शन अच्छा रहा, वहीं लोकसभा चुनावों में इस बार कांग्रेस 11 सीटें जीतकर आई। डोटासरा ने अपने गृह जिले सीकर में माकपा के साथ कांग्रेस का अलायंस करवाया। उनकी सबसे बड़ी सफलता यही रही कि कांग्रेस का पूरा वोट मापका को ट्रांसफर हुआ, जिससे माकपा यह सीट जीत पाई।
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इसके अलावा जाट बेल्ट में विधानसभा चुनावों से लेकर लोकसभा चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन जबरदस्त रहा। डोटासरा का कद इस मायने में भी बढ़ा है कि विधानसभा चुनावों में उनके ऊपर ईडी की रेड हुई और बीजेपी के दिग्गज नेता राजेंद्र राठौड़ से उनकी अदावत खुलकर सामने आई। इसका असर विधानसभा के नतीजों पर आया। राठौड़ विधानसभा चुनाव हार गए और डोटासरा ने शेखावाटी में परचम लहरा दिया।
पूर्वी राजस्थान में जीत से मजबूत हुए पायलट
लोकसभा चुनावों में पूर्वी राजस्थान में कांग्रेस को जबरदस्त जीत मिली है। पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने यहां गुर्जर वोटों के ध्रुवीकरण में अहम भूमिका निभाई है। हालांकि जब वे कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष थे तब राजस्थान में कांग्रेस लोकसभा में एक भी सीट नहीं मिली थी। वहीं विधानसभा में भी कांग्रेस महज 21 सीटों पर सिमट गई थी लेकिन इस बार लोकसभा चुनावों में उन्होंने सिर्फ पूर्वी राजस्थान में प्रचार पर अपना जोर लगाया। जिसके चलते भरतपुर, करौली-धौलुपर, दौसा और टोंक-सवाई माधोपुर में कांग्रेस को जीत मिली।
गहलोत का रुख अब केंद्र की ओर
अशोक गहलोत राजस्थान में कांग्रेस के सबसे बड़े चेहरे हैं लेकिन लोकसभा चुनावों में लगातार दूसरी बार उनके पुत्र वैभव गहलोत हार गए। वे पिछला चुनाव जोधपुर से हारे और इस बार जालौर से। यही नहीं जोधपुर से कांग्रेस प्रत्याशी करणसिंह उचियारड़ा गहलोत के बूथ पर चुनाव हार गए। हालांकि बांसवाड़ा और नागौर की सीट पर जो गठबंधन हुआ, वह अशोक गहलोत की वजह से ही हुआ। लोकसभा चुनावों में इन सीटों पर गठबंधन का फायदा कांग्रेस को अन्य जगहों पर भी मिला लेकिन अब कांग्रेस न राजस्थान में सत्ता में है और न ही केंद्र में आने के आसार हैं। ऐसे में गहलोत का रुख दिल्ली की ओर हो सकता है।