{"_id":"6ac223b1ba798ee3a7054c30","slug":"kanhaiya-lal-murder-case-rajasthan-high-court-rejects-bail-pleas-terrorism-national-soul-2026-10-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"कन्हैया लाल हत्याकांड: 'आतंकवाद राष्ट्र की आत्मा पर चोट', हाईकोर्ट ने खारिज की पांच आरोपियों की जमानत याचिकाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कन्हैया लाल हत्याकांड: 'आतंकवाद राष्ट्र की आत्मा पर चोट', हाईकोर्ट ने खारिज की पांच आरोपियों की जमानत याचिकाएं
Sun, 04 Oct 2026 03:30 PM IST
प्रतीक पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: प्रतीक पांडेय
Updated Sun, 04 Oct 2026 03:30 PM IST
सार
राजस्थान हाईकोर्ट ने कन्हैया लाल हत्याकांड में पांच आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। अदालत ने आतंकवाद को राष्ट्र की मनोवैज्ञानिक संप्रभुता और आत्मा पर चोट बताते हुए अपराध की गंभीरता पर टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी की सामग्री प्रथम दृष्टया आरोपों की पुष्टि के लिए पर्याप्त है।
विज्ञापन
राजस्थान हाई कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजस्थान हाईकोर्ट ने कन्हैया लाल हत्याकांड में शामिल पांच आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। मुख्य न्यायाधीश संजय अग्रवाल और जस्टिस समीर जैन की पीठ ने वसीम अली, मुस्लिम खान, मोहसिन खान, मोहम्मद मोहसिन और आसिफ हुसैन की याचिकाओं पर निर्णय सुनाते हुए अपराध की गंभीरता का उल्लेख किया। अदालत ने महात्मा गांधी के विचारों का स्मरण कराते हुए कहा कि आतंकवाद और धोखेबाजी ताकतवर लोगों के नहीं, बल्कि कमजोर लोगों के हथियार हैं। पीठ ने स्पष्ट किया कि जघन्य आपराधिक साजिश और आतंकी घटना की विभीषिका को देखते हुए आरोपी जमानत पाने के हकदार नहीं हैं।
कठोर टिप्पणी-आतंकवाद देश की मनोवैज्ञानिक संप्रभुता पर चोट
पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि जब कोई अपराध किसी व्यक्ति विशेष के बजाय राष्ट्र की आत्मा को निशाना बनाता है, तो जमानत का संपूर्ण आधार बदल जाता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद केवल शारीरिक हमला नहीं है, बल्कि यह देश की मनोवैज्ञानिक संप्रभुता पर सोची-समझी योजनाबद्ध चोट है। इसका अंतिम उद्देश्य केवल आपराधिक घटना को अंजाम देना नहीं, बल्कि शांति भंग करना और कानून के शासन को भय के शासन में तब्दील करना है।
न्यायाधीशों ने टिप्पणी की कि न्यायाधीश का आसन एक भारी और अदृश्य भार से बंधा होता है। यह भार देश के नागरिकों के उन अधिकारों की रक्षा करने का है जो भारत के संविधान के तहत निहित हैं। पीठ ने रामधारी सिंह दिनकर की सहिष्णुता पर लिखी कविता का उल्लेख भी किया। अदालत के अनुसार, राष्ट्रीय जांच एजेंसी की सामग्री पहली नजर में आरोपों की पुष्टि के लिए पर्याप्त आधार प्रदान करती है।
विज्ञापन
कन्हैया लाल हत्याकांड का घटनाक्रम
उदयपुर में 28 जून, 2022 को दो व्यक्तियों, मोहम्मद रियाज अटारी और गौस मोहम्मद ने ग्राहक बनकर कन्हैया लाल तेली की उनकी दुकान में हत्या कर दी थी। इस घटना का कारण कन्हैया लाल द्वारा सोशल मीडिया पर साझा की गई एक पोस्ट थी, जिसे उन्होंने बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा के समर्थन में डाला था। हत्याकांड के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने मामले की विस्तृत जांच पूरी कर 22 अगस्त 2022 को आरोप पत्र दाखिल किया। इसके पश्चात विशेष अदालत ने 2024 की शुरुआत में सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए। गिरफ्तारी के बाद से ही पांचों आरोपी जेल में बंद हैं। इससे पूर्व एक विशेष अदालत ने अक्तूबर और नवंबर 2024 में इनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं।
अपराध में सक्रिय, अपरिहार्य और अभिन्न भूमिका
सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से पेश हुए अधिवक्ता सैयद सादात अली व अन्य ने मुख्य रूप से तर्क दिया कि 10 जून से 28 जून 2022 के बीच आरोपी मृतक की दुकान पर या उसके आसपास मौजूद थे, ऐसा कोई ठोस सबूत रिकॉर्ड पर मौजूद नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि आरोपियों ने किसी भी व्हाट्सएप ग्रुप पर कोई ऐसा संदेश, वॉयस नोट या टेक्स्ट नहीं भेजा, जिसे किसी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने या दुश्मनी को बढ़ावा देने वाला माना जा सके। बचाव पक्ष ने मामले के दो अन्य सह-आरोपियों फरहाद मोहम्मद और मोहम्मद जावेद को मिली जमानत पर भरोसा जताते हुए समानता के आधार पर राहत मांगी। उन्होंने कहा कि आरोपी साढ़े चार साल से अधिक समय से हिरासत में हैं और मुकदमे में काफी समय लगेगा।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील राजा ठाकरे ने इन तर्कों का विरोध करते हुए कहा कि पांचों आरोपियों ने अपराध को अंजाम देने में सक्रिय, अपरिहार्य और अभिन्न भूमिका निभाई। एजेंसी ने शीर्ष अदालत के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जमानत के स्तर पर अदालत को साक्ष्यों को बहुत बारीकी से तौलने की आवश्यकता नहीं होती। गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत जमानत देने पर कानूनी रोक है, यदि उपलब्ध सामग्री पहली नजर में आरोपों को सच मानती है।
अदालती कार्यवाही को आगे बढ़ाएगी निचली अदालत
उच्च न्यायालय ने याचिकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि उसकी ये टिप्पणियां केवल जमानत के आवेदन पर निर्णय लेने के उद्देश्य से हैं। अदालत ने कहा कि निचली अदालत इन टिप्पणियों से अप्रभावित रहकर मुख्य मुकदमे की सुनवाई और अदालती कार्यवाही को आगे बढ़ाएगी।
विज्ञापन
कठोर टिप्पणी-आतंकवाद देश की मनोवैज्ञानिक संप्रभुता पर चोट
पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि जब कोई अपराध किसी व्यक्ति विशेष के बजाय राष्ट्र की आत्मा को निशाना बनाता है, तो जमानत का संपूर्ण आधार बदल जाता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद केवल शारीरिक हमला नहीं है, बल्कि यह देश की मनोवैज्ञानिक संप्रभुता पर सोची-समझी योजनाबद्ध चोट है। इसका अंतिम उद्देश्य केवल आपराधिक घटना को अंजाम देना नहीं, बल्कि शांति भंग करना और कानून के शासन को भय के शासन में तब्दील करना है।
विज्ञापन
न्यायाधीशों ने टिप्पणी की कि न्यायाधीश का आसन एक भारी और अदृश्य भार से बंधा होता है। यह भार देश के नागरिकों के उन अधिकारों की रक्षा करने का है जो भारत के संविधान के तहत निहित हैं। पीठ ने रामधारी सिंह दिनकर की सहिष्णुता पर लिखी कविता का उल्लेख भी किया। अदालत के अनुसार, राष्ट्रीय जांच एजेंसी की सामग्री पहली नजर में आरोपों की पुष्टि के लिए पर्याप्त आधार प्रदान करती है।
विज्ञापन
कन्हैया लाल हत्याकांड का घटनाक्रम
उदयपुर में 28 जून, 2022 को दो व्यक्तियों, मोहम्मद रियाज अटारी और गौस मोहम्मद ने ग्राहक बनकर कन्हैया लाल तेली की उनकी दुकान में हत्या कर दी थी। इस घटना का कारण कन्हैया लाल द्वारा सोशल मीडिया पर साझा की गई एक पोस्ट थी, जिसे उन्होंने बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा के समर्थन में डाला था। हत्याकांड के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने मामले की विस्तृत जांच पूरी कर 22 अगस्त 2022 को आरोप पत्र दाखिल किया। इसके पश्चात विशेष अदालत ने 2024 की शुरुआत में सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए। गिरफ्तारी के बाद से ही पांचों आरोपी जेल में बंद हैं। इससे पूर्व एक विशेष अदालत ने अक्तूबर और नवंबर 2024 में इनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं।
अपराध में सक्रिय, अपरिहार्य और अभिन्न भूमिका
सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से पेश हुए अधिवक्ता सैयद सादात अली व अन्य ने मुख्य रूप से तर्क दिया कि 10 जून से 28 जून 2022 के बीच आरोपी मृतक की दुकान पर या उसके आसपास मौजूद थे, ऐसा कोई ठोस सबूत रिकॉर्ड पर मौजूद नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि आरोपियों ने किसी भी व्हाट्सएप ग्रुप पर कोई ऐसा संदेश, वॉयस नोट या टेक्स्ट नहीं भेजा, जिसे किसी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने या दुश्मनी को बढ़ावा देने वाला माना जा सके। बचाव पक्ष ने मामले के दो अन्य सह-आरोपियों फरहाद मोहम्मद और मोहम्मद जावेद को मिली जमानत पर भरोसा जताते हुए समानता के आधार पर राहत मांगी। उन्होंने कहा कि आरोपी साढ़े चार साल से अधिक समय से हिरासत में हैं और मुकदमे में काफी समय लगेगा।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील राजा ठाकरे ने इन तर्कों का विरोध करते हुए कहा कि पांचों आरोपियों ने अपराध को अंजाम देने में सक्रिय, अपरिहार्य और अभिन्न भूमिका निभाई। एजेंसी ने शीर्ष अदालत के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जमानत के स्तर पर अदालत को साक्ष्यों को बहुत बारीकी से तौलने की आवश्यकता नहीं होती। गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत जमानत देने पर कानूनी रोक है, यदि उपलब्ध सामग्री पहली नजर में आरोपों को सच मानती है।
अदालती कार्यवाही को आगे बढ़ाएगी निचली अदालत
उच्च न्यायालय ने याचिकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि उसकी ये टिप्पणियां केवल जमानत के आवेदन पर निर्णय लेने के उद्देश्य से हैं। अदालत ने कहा कि निचली अदालत इन टिप्पणियों से अप्रभावित रहकर मुख्य मुकदमे की सुनवाई और अदालती कार्यवाही को आगे बढ़ाएगी।