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राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: मोटर वाहन उप निरीक्षक भर्ती में डिप्लोमा वाले पात्र, डिग्री धारकों को झटका
Thu, 28 May 2026 12:07 PM IST
जयपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: जयपुर ब्यूरो
Updated Thu, 28 May 2026 12:07 PM IST
सार
राजस्थान हाई कोर्ट ने MVSI भर्ती मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि जहां नियमों में केवल डिप्लोमा योग्यता तय है, वहां डिग्री धारकों को पात्र नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने सभी अपीलें खारिज कर भर्ती प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए।
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राजस्थान हाईकोर्ट
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
राजस्थान हाई कोर्ट की जयपुर पीठ ने परिवहन उप निरीक्षक (Motor Vehicle Sub Inspector-MVSI) भर्ती विवाद में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि भर्ती नियमों में जहां केवल डिप्लोमा योग्यता निर्धारित है, वहां डिग्री धारकों को स्वतः पात्र नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि न्यायालय भर्ती नियमों में नई योग्यता जोड़ने का अधिकार नहीं रखता।
राज्य सरकार को भर्ती प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने का निर्देश
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस बिपिन गुप्ता की खंडपीठ ने परिवहन उप निरीक्षक भर्ती से जुड़ी विशेष अपीलों पर सुनवाई करते हुए सभी अपीलें खारिज कर दीं। साथ ही राज्य सरकार को भर्ती प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने के निर्देश भी दिए।
न्यूनतम योग्यता शब्द का प्रयोग नहीं किया
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि भर्ती नियमों के शेड्यूल में ने परिवहन उप निरीक्षक पद के लिए 'Minimum Qualification' शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है। नियमों में स्पष्ट रूप से केवल ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग या मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा को ही पात्रता माना गया है। इसके अलावा वही योग्यता मान्य होगी, जिसे केंद्र या राज्य सरकार समकक्ष घोषित करे।
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जानबूझकर डिग्री धार शब्द नहीं किया शामिल
खंडपीठ ने कहा कि नियम बनाने वाली प्राधिकरण ने जानबूझकर उच्च योग्यता या 'डिग्री धारक' शब्द शामिल नहीं किए। भर्ती समिति ने भी डिप्लोमा और डिग्री को समान योग्यता नहीं माना। ऐसे में अदालत नियमों में ऐसी पात्रता नहीं जोड़ सकती, जो पहले से निर्धारित नहीं है।
ये भी पढ़ें- एक्शन मोड में प्रशासन, हाईवे से हटेंगे 430 से ज्यादा अवैध निर्माण; बुलडोजर चलाने की तैयारी
कोर्ट ने जहूर अहमद मामले का हवाला दिया
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के जहूर अहमद मामले का हवाला देते हुए कहा कि यदि किसी पद को विशेष रूप से डिप्लोमा धारकों के लिए निर्धारित किया गया है, तो उसका उद्देश्य डिप्लोमा अभ्यर्थियों को रोजगार देना है, न कि डिग्री धारकों को शामिल करना। इसके अलावा कोर्ट ने तेज प्रकाश पाठक बनाम राजस्थान हाई कोर्ट मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि 'Rules of the Game cannot be changed after the game has already started' अर्थात भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद नियमों में बदलाव लागू नहीं किया जा सकता।
हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड और परिवहन विभाग के लिए भर्ती प्रक्रिया पूरी करने का रास्ता साफ हो गया है।
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राज्य सरकार को भर्ती प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने का निर्देश
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस बिपिन गुप्ता की खंडपीठ ने परिवहन उप निरीक्षक भर्ती से जुड़ी विशेष अपीलों पर सुनवाई करते हुए सभी अपीलें खारिज कर दीं। साथ ही राज्य सरकार को भर्ती प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने के निर्देश भी दिए।
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न्यूनतम योग्यता शब्द का प्रयोग नहीं किया
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि भर्ती नियमों के शेड्यूल में ने परिवहन उप निरीक्षक पद के लिए 'Minimum Qualification' शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है। नियमों में स्पष्ट रूप से केवल ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग या मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा को ही पात्रता माना गया है। इसके अलावा वही योग्यता मान्य होगी, जिसे केंद्र या राज्य सरकार समकक्ष घोषित करे।
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जानबूझकर डिग्री धार शब्द नहीं किया शामिल
खंडपीठ ने कहा कि नियम बनाने वाली प्राधिकरण ने जानबूझकर उच्च योग्यता या 'डिग्री धारक' शब्द शामिल नहीं किए। भर्ती समिति ने भी डिप्लोमा और डिग्री को समान योग्यता नहीं माना। ऐसे में अदालत नियमों में ऐसी पात्रता नहीं जोड़ सकती, जो पहले से निर्धारित नहीं है।
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कोर्ट ने जहूर अहमद मामले का हवाला दिया
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के जहूर अहमद मामले का हवाला देते हुए कहा कि यदि किसी पद को विशेष रूप से डिप्लोमा धारकों के लिए निर्धारित किया गया है, तो उसका उद्देश्य डिप्लोमा अभ्यर्थियों को रोजगार देना है, न कि डिग्री धारकों को शामिल करना। इसके अलावा कोर्ट ने तेज प्रकाश पाठक बनाम राजस्थान हाई कोर्ट मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि 'Rules of the Game cannot be changed after the game has already started' अर्थात भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद नियमों में बदलाव लागू नहीं किया जा सकता।
हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड और परिवहन विभाग के लिए भर्ती प्रक्रिया पूरी करने का रास्ता साफ हो गया है।