Exclusive News एक्सक्लूसिव खबरें
Free E-Paper फ्री में ई-पेपर पढ़ें
ऐप डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Jaipur News ›   rajasthan high court government hospitals healthcare facilities ground level improvement article 21

राजस्थान: सरकारी अस्पतालों की बदहाल व्यवस्था पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- आश्वासन नहीं, धरातल पर दिखना चाहिए सुधार

Thu, 05 Nov 2026 08:59 AM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: आशुतोष प्रताप सिंह Updated Thu, 05 Nov 2026 08:59 AM IST
सार

राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकारी अस्पतालों की बदहाल व्यवस्थाओं और चिकित्सा सुविधाओं में कमियों को लेकर राज्य सरकार को स्पष्ट संदेश दिया है। मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल और न्यायमूर्ति समीर जैन की खंडपीठ ने कहा कि अस्पतालों में सुधार केवल कागजी आश्वासनों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका असर जमीन पर दिखना चाहिए।

विज्ञापन
rajasthan high court government hospitals healthcare facilities ground level improvement article 21
राजस्थान हाईकोर्ट -फोटो अमर उजाला

विस्तार

सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल और न्यायमूर्ति समीर जैन की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था सुधारने के लिए सरकार की कार्रवाई केवल कागजी आश्वासनों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसका असर धरातल पर भी दिखाई देना चाहिए। अदालत ने कहा कि नागरिकों को पर्याप्त, सुलभ और समय पर चिकित्सा सुविधाएं मिलना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के मौलिक अधिकार का अभिन्न हिस्सा है।

विज्ञापन


अदालत ने असीम सिमलोट की ओर से दायर जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए ये निर्देश दिए। याचिका में राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में बुनियादी ढांचे, सुरक्षा व्यवस्था, दवाइयों की गुणवत्ता और चिकित्सीय सुविधाओं की कमियों का मुद्दा उठाया गया था। याचिकाकर्ता ने वर्ष 2024 में प्रस्तुत नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा था कि अस्पतालों की खामियां सामने आने के करीब दो साल बाद भी प्रभावी सुधार नहीं किए गए हैं।

विज्ञापन

एसएमएस अस्पताल में आग की घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के कदम

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत में जवाब दाखिल कर सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था सुधारने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी। सरकार ने बताया कि एसएमएस अस्पताल में आग लगने की घटना के बाद अग्निशमन सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए विशेष अधिकारियों की तैनाती की गई है। अग्निशमन प्रणाली की मरम्मत और रखरखाव के लिए निविदाएं जारी की गई हैं। वहीं, शेष भवनों के लिए अग्निशमन अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

विज्ञापन
विज्ञापन


सरकार के अनुसार, चिकित्सा महाविद्यालयों, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों, जिला और उप-जिला अस्पतालों को इलेक्ट्रॉनिक ऑडिट कराने के निर्देश दिए गए हैं। आपात स्थिति में मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए विशेष योजना भी तैयार की गई है। इसके अलावा एसएमएस अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू), वार्डों और अन्य बुनियादी ढांचे का राष्ट्रीय भवन संहिता के मानकों के अनुरूप नवीनीकरण किया गया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अस्पतालों की मरम्मत और रखरखाव के लिए 10 करोड़ रुपये का बजट भी आवंटित किया गया है।

निशुल्क दवा योजना के तहत दवाइयों की गुणवत्ता पर जोर

सरकार ने अदालत को बताया कि मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के तहत राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड दवाइयों और शल्य चिकित्सा से जुड़े सामान की खरीद करता है। इनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली स्थापित की गई है।
दवाइयों की आपूर्ति के लिए निविदा प्रक्रिया में हिस्सा लेने वाली कंपनियों के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का जीएमपी प्रमाण पत्र, विनिर्माण लाइसेंस और अन्य जरूरी दस्तावेज अनिवार्य किए गए हैं। इसका उद्देश्य अस्पतालों में मरीजों को गुणवत्तापूर्ण दवाइयां और चिकित्सा सामग्री उपलब्ध कराना है।

अस्पतालों में जैविक कचरे के निस्तारण की व्यवस्था

अस्पतालों में निकलने वाले जैविक और चिकित्सीय कचरे के सुरक्षित निस्तारण के लिए भी सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी दी गई। सरकार ने बताया कि अस्पतालों में अलग-अलग रंग के कूड़ेदानों का इस्तेमाल किया जा रहा है। जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के तहत कचरे के संग्रहण और निस्तारण की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही इस काम की प्रगति पर नजर रखने के लिए जिला स्तर पर नियमित रिपोर्ट तैयार की जा रही है।

सरकार के कदमों का संज्ञान लेकर जनहित याचिका का निस्तारण

राज्य सरकार की ओर से पेश किए गए जवाब और सुधार के लिए उठाए गए कदमों का संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने माना कि सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे की कमियों को दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में अदालत ने इस जनहित याचिका में अलग से अतिरिक्त निर्देश देना आवश्यक नहीं समझा और याचिका का निस्तारण कर दिया। हालांकि, पीठ ने साफ किया कि पर्याप्त, सुलभ और समयबद्ध चिकित्सा सेवाएं हासिल करना नागरिकों के जीवन के मौलिक अधिकार से जुड़ा है। सरकार और संबंधित अधिकारियों को अस्पतालों में मौजूद बाकी कमियों को दूर करने के लिए लगातार काम करना होगा। अदालत ने जोर देकर कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार केवल सरकारी दस्तावेजों और आश्वासनों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि मरीजों को अस्पतालों में बेहतर सुविधाओं के रूप में इसका वास्तविक लाभ मिलना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed