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हाईकोर्ट सख्त: आदेश के पांच महीने बाद भी अनुकंपा नियुक्ति नही, अवमानना नोटिस जारी

Sun, 01 Nov 2026 08:04 AM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Sun, 01 Nov 2026 08:04 AM IST
सार

राजस्थान हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के आदेश का पांच महीने बाद भी पालन नहीं होने पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को अवमानना नोटिस जारी किया है। मृत सहायक अभियंता के अविवाहित भाई रोमिल जैन को चार सप्ताह में नियुक्ति देने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने अधिकारियों से जवाब मांगा है।

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rajasthan high court contempt notice compassionate appointment delay romil jain
Rajasthan High Court - फोटो : https://hcraj.nic.in/hcraj

विस्तार

राजस्थान उच्च न्यायालय ने राज्य के जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को अनुकंपा नियुक्ति के संबंध में दिए गए अदालती आदेश की अवहेलना करने पर अवमानना का नोटिस थमाया है। एकलपीठ ने संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब किया है।
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झालावाड़ जिले में पदस्थ सहायक अभियंता (एईएन) रजत जैन की सड़क दुर्घटना में असमय मृत्यु हो गई थी। उनके निधन के पश्चात उनके आश्रित अविवाहित भाई रोमिल जैन ने परिवार में कोई अन्य कमाने वाला सदस्य न होने का हवाला देते हुए विभाग में अनुकंपा नियुक्ति पाने के लिए नियमानुसार आवेदन प्रस्तुत किया था। हालांकि, संबंधित विभाग ने उनके आवेदन को यह आधार बनाकर निरस्त कर दिया था कि मृत सरकारी सेवक का अविवाहित भाई नियमावली के तहत अनुकंपा नियुक्ति पाने का पात्र नहीं माना जा सकता।
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आश्रित भाई भी वैधानिक हकदार
विभाग के इस नकारात्मक रवैये से व्यथित होकर रोमिल जैन ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर विभागीय आदेश को चुनौती दी। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता एसजे मूथा ने पीठ को अवगत कराया कि राजस्थान सरकार के कार्मिक विभाग ने 28 अक्तूबर, 2021 को , स्पष्ट परिपत्र जारी किया था। इस प्रशासनिक परिपत्र के प्रावधानों के अंतर्गत यदि किसी मृत कर्मचारी के परिवार में कोई अन्य आश्रित उपलब्ध नहीं है, तो उसका आश्रित भाई भी अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त करने का पूर्ण रूप से वैधानिक हकदार है।


स्पष्ट निर्देश के बाद भी कार्रवाई नहीं
मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च न्यायालय की एकलपीठ ने 18 मई को अपना निर्णय सुनाया था। अदालत ने राज्य सरकार और जलदाय विभाग को स्पष्ट निर्देश दिया था कि याचिकाकर्ता के आवेदन पर परिपत्र के अनुसार पुनर्विचार किया जाए और चार सप्ताह की निर्धारित अवधि के भीतर उसे अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की जाए। इसके बावजूद अदालती आदेश पारित होने के पांच महीने से अधिक का समय बीत जाने के उपरांत भी विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई और न ही पीड़ित को नियुक्ति पत्र जारी किया गया।

अदालत ने पूछा-नियुक्ति क्यों नहीं
अदालती आदेश की सरेआम अवहेलना से क्षुब्ध होकर याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की। याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश गणेश राम मीणा की पीठ ने प्रशासनिक ढिलाई पर गहरा असंतोष व्यक्त किया। पीठ ने जल संसाधन विभाग के सचिव, मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता और अन्य संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों को अवमानना का नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने अधिकारियों से पूछा है कि स्पष्ट अदालती दिशा-निर्देशों के बावजूद समय पर नियुक्ति क्यों प्रदान नहीं की गई।
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