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राजस्थान उच्च न्यायालय का बार काउंसिल को निर्देश: नौ सितंबर तक निपटाएं वकीलों के लंबित पंजीकरण
Sat, 05 Sep 2026 03:45 PM IST
प्रतीक पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: प्रतीक पांडेय
Updated Sat, 05 Sep 2026 03:45 PM IST
सार
Rajasthan News: राजस्थान हाईकोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ राजस्थान को वकीलों के लंबित पंजीकरण आवेदनों का नौ सितंबर तक निस्तारण करने का निर्देश दिया है। अदालत ने देरी पर चिंता जताते हुए पात्र कानून स्नातकों का जल्द नामांकन करने और तय समयसीमा तक अनुपालन रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
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राजस्थान उच्च न्यायालय
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विस्तार
राजस्थान उच्च न्यायालय ने बार काउंसिल ऑफ राजस्थान को वकालत के लिए लंबित सभी पंजीकरण आवेदनों का निपटारा नौ सितंबर तक करने का निर्देश दिया है। उच्च न्यायालय ने इस संबंध में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। न्यायिक पीठ ने बार काउंसिल को स्पष्ट कहा कि पात्र कानून स्नातकों को राज्य बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में नामांकित करने की प्रक्रिया तुरंत पूरी की जाए। न्यायमूर्ति ने देरी पर चिंता जताई और संस्था को निश्चित समयसीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी करने का आदेश सौंपा।
पंजीकरण प्रक्रिया में तेजी का आदेश
पीठ ने बार काउंसिल को सभी कागजातों और आवेदनों का तेजी से सत्यापन करने का निर्देश दिया। बार काउंसिल की नामांकन समिति सभी लंबित फाइलों की जांच करके पात्र अभ्यर्थियों को अधिवक्ता के रूप में नामांकित करेगी। अदालत ने पाया कि नामांकन में अत्यधिक विलंब के कारण नए वकीलों को अपनी कानूनी प्रैक्टिस शुरू करने में बाधा का सामना करना पड़ रहा था। इसी कारण उच्च न्यायालय ने नौ सितंबर की समयसीमा निर्धारित करके बार काउंसिल को सभी लंबित मामलों को शून्य पर लाने का निर्देश जारी किया।
युवा अधिवक्ताओं को राहत
याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने अदालत में दलील रखी कि लॉ की पढ़ाई पूरी करने के बाद भी कई महीनों तक नामांकन न मिलने से स्नातकों का पेशेवर भविष्य प्रभावित हो रहा था। राज्य भर में सैकड़ों अभ्यर्थियों की फाइलें कई महीनों से लंबित रखी थीं। इन अभ्यर्थियों को अदालत में वकालतनामा दाखिल करने और मामलों की पैरवी करने का अधिकार नहीं मिल पा रहा था। अदालत के इस आदेश से उन सभी कानून स्नातकों को बड़ी राहत मिली है, जो महीनों से अपने नामांकन प्रमाणपत्र का इंतजार कर रहे थे।
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यह भी पढ़ें: निकाय चुनाव में ओवैसी-बेनीवाल की जुगलबंदी से सियासी हलचल, क्या कांग्रेस के वोट बैंक में लगेगी सेंध?
समयबद्ध अनुपालन और रिपोर्ट पेश करने के निर्देश
बार काउंसिल ऑफ राजस्थान को नौ सितंबर तक सभी आवेदनों का निस्तारण करके कोर्ट में अनुपालन रिपोर्ट पेश करनी होगी। बार काउंसिल के प्रतिनिधियों ने अदालत को आश्वासन दिया कि वे तय तिथि से पहले विशेष बैठक और नामांकन समारोह करेंगे।
इस आयोजन में सभी योग्य कानून स्नातकों को अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत कर लिया जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि दी गई समयसीमा के भीतर निर्देशों का पालन नहीं हुआ, तो उच्च न्यायालय संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए आवश्यक कार्रवाई करेगा।
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पंजीकरण प्रक्रिया में तेजी का आदेश
पीठ ने बार काउंसिल को सभी कागजातों और आवेदनों का तेजी से सत्यापन करने का निर्देश दिया। बार काउंसिल की नामांकन समिति सभी लंबित फाइलों की जांच करके पात्र अभ्यर्थियों को अधिवक्ता के रूप में नामांकित करेगी। अदालत ने पाया कि नामांकन में अत्यधिक विलंब के कारण नए वकीलों को अपनी कानूनी प्रैक्टिस शुरू करने में बाधा का सामना करना पड़ रहा था। इसी कारण उच्च न्यायालय ने नौ सितंबर की समयसीमा निर्धारित करके बार काउंसिल को सभी लंबित मामलों को शून्य पर लाने का निर्देश जारी किया।
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युवा अधिवक्ताओं को राहत
याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने अदालत में दलील रखी कि लॉ की पढ़ाई पूरी करने के बाद भी कई महीनों तक नामांकन न मिलने से स्नातकों का पेशेवर भविष्य प्रभावित हो रहा था। राज्य भर में सैकड़ों अभ्यर्थियों की फाइलें कई महीनों से लंबित रखी थीं। इन अभ्यर्थियों को अदालत में वकालतनामा दाखिल करने और मामलों की पैरवी करने का अधिकार नहीं मिल पा रहा था। अदालत के इस आदेश से उन सभी कानून स्नातकों को बड़ी राहत मिली है, जो महीनों से अपने नामांकन प्रमाणपत्र का इंतजार कर रहे थे।
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समयबद्ध अनुपालन और रिपोर्ट पेश करने के निर्देश
बार काउंसिल ऑफ राजस्थान को नौ सितंबर तक सभी आवेदनों का निस्तारण करके कोर्ट में अनुपालन रिपोर्ट पेश करनी होगी। बार काउंसिल के प्रतिनिधियों ने अदालत को आश्वासन दिया कि वे तय तिथि से पहले विशेष बैठक और नामांकन समारोह करेंगे।
इस आयोजन में सभी योग्य कानून स्नातकों को अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत कर लिया जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि दी गई समयसीमा के भीतर निर्देशों का पालन नहीं हुआ, तो उच्च न्यायालय संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए आवश्यक कार्रवाई करेगा।