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Rajasthan: गजेंद्र सिंह शेखावत बोले- पत्रकारिता को निष्पक्ष-प्रासंगिक और समाजोपयोगी बनाए रखना चुनौती
Tue, 28 Jan 2025 10:03 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: अरविंद कुमार
Updated Tue, 28 Jan 2025 10:03 PM IST
सार
प्रतिष्ठित माणक अलंकरण पुरस्कार समारोह में वर्ष 2022, 2023 और 2024 के माणक अंलकरण से अठारह चयनित प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। बतौर मुख्य अतिथि गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा, माणक अलंकरण समारोह में पदम मेहता के मिशन राजस्थानी भाषा का जिक्र नहीं होगा, तो इसे पूर्ण नहीं कहा जा सकता।
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गजेंद्र सिंह शेखावत
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने स्थानीय झालाना डूंगरी स्थित राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित 41- 42 - 43 वें माणक अलंकरण समारोह में पत्रकारिता के बदलते संदर्भों और उसकी चुनौतियों पर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता प्रोफेशन नहीं, बल्कि एक मिशन है। उहोंने कहा कि ऐसे पत्रकारों को सम्मानित करना आवश्यक है, जिन्होंने पत्रकारिता को समाजोपयोगी बनाए रखने का प्रयास किया।
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प्रतिष्ठित माणक अलंकरण पुरस्कार समारोह में वर्ष 2022, 2023 व 2024 के माणक अंलकरण से अठारह चयनित प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। बतौर मुख्य अतिथि शेखावत ने कहा कि माणक अलंकरण समारोह में पदम मेहता के मिशन "राजस्थानी भाषा का जिक्र नहीं होगा, तो इसे पूर्ण नहीं कहा जा सकता।" उन्होंने उन पत्रकारों का आभार प्रकट किया, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज के आधुनिक भारत तक अपनी लेखनी के जरिए समाज को दिशा दी। इमरजेंसी के दौरान पत्रकारों द्वारा निभाई गई साहसी भूमिका को याद करते हुए उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी पत्रकारिता ने सत्य के मार्ग को नहीं छोड़ा।
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केंद्रीय मंत्री ने मीडिया के बदलते स्वरूप पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि 24 घंटे वाले चैनलों के आने से समाचार और मनोरंजन के बीच की रेखा धुंधली हो गई है। उन्होंने मुंबई हमले जैसे उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि खबरों को सनसनीखेज बनाने की प्रवृत्ति ने समाज में गलत प्रभाव डाला है। सोशल मीडिया के जमाने में "घटनाओं का चीरहरण" करने की आजादी ने पत्रकारों के कर्तव्य को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
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शेखावत ने कहा कि आज भी लोगों का भरोसा प्रिंट मीडिया पर है, लेकिन इसमें भी "दरबारी और सरकारी" पत्रकारिता के बढ़ते चलन ने इसे चुनौतीपूर्ण बना दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पत्रकारों को स्वतंत्रता और सत्य का पालन करना होगा, ताकि पत्रकारिता समाज के लिए प्रासंगिक और उपयोगी बनी रहे। शेखावत ने भारत की प्राचीन धरोहर, योग और आयुर्वेद का उल्लेख करते हुए कहा कि "आज भारत का हर क्षेत्र वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त कर रहा है। ऐसे समय में पत्रकारों की जिम्मेदारी है कि वे कलम की स्वतंत्रता को बनाए रखें और समाज को सही दिशा दें। उन्होंने समारोह में उपस्थित पत्रकारों और बुद्धिजीवियों को यह संदेश दिया कि देश में बदलाव की प्रक्रिया जारी है। ऐसे में जिम्मेदार नागरिकों के रूप में पत्रकारों को अपनी भूमिका पूरी निष्ठा से निभानी होगी।
शेखावत ने कहा कि इस अवसर पर हमें यह विचार करना चाहिए कि पत्रकारिता कैसे समाजोपयोगी बनी रहे और इसका दायरा समय के साथ और व्यापक हो। उन्होंने कहा, "कलम की ताकत ही समाज को सही दिशा दिखा सकती है, लेकिन इसे जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ निभाना ही सच्चे पत्रकार की पहचान है। शेखावत ने पुनः जोर देकर कहा कि राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करवाना माणक एवं दैनिक जलतेदीप के प्रधान संपादक पदम जी मेहता के जीवन का मिशन है।
इस अवसर पर महानगर टाइम्स के प्रधान संपादक एवं सिविल लाइन्स विधायक गोपाल शर्मा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि चार दशक पहले माणक अलंकरण का महत्व बहुत बड़ा था। उन्होंने 1989 के माणक अलंकरण जो 2 अक्टूबर 1990 में आयोजित हुआ था, प्राप्त करने के समय के प्रसंगों को याद किया, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत ने जयपुर प्रेस क्लब की घोषणा की थी। यह घटना माणक अलंकरण की प्रतिष्ठा को रेखांकित करती है।
पद्मश्री सीपी देवल ने समारोह में राजस्थानी भाषा में अपनी बात रखते हुए भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की पुरजोर वकालात की। उन्होंने कहा कि भाषा हमारी संस्कृति और धरोहरों को संरक्षित रखने का माध्यम है। उन्होंने भरतपुर और बूंदी के गीतों की प्रासंगिकता का उल्लेख करते हुए धरोहरों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने वर्तमान समय में प्रेस की स्वतंत्रता में गिरावट पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बिना विज्ञापन के समाचार पत्रों का संचालन मुश्किल हो गया है, और प्रेस और विपक्ष का रिश्ता समाज के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने पत्रकारिता की नैतिक जिम्मेदारी पर जोर देते हुए कहा कि पत्रकारों को सामाजिक और राजनीतिक पतन रोकने में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. सुधि राजीव ने माणक अलंकरण की परंपरा और संघर्ष को सलाम किया। उन्होंने कहा कि राजस्थानी भाषा को मान्यता दिलाने का संघर्ष अब भी जारी है। कुलपति ने पत्रकारिता विश्वविद्यालय में राजस्थानी भाषा पत्रकारिता पाठ्यक्रम शुरू करने की बात कही। राजस्थानी भाषा में 44 वर्षों से माणक पत्रिका को प्रकाशित करना अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
प्रारंभ में दैनिक जलतेदीप एवं राजस्थानी मासिक माणक के प्रधान संपादक पदम मेहता ने राजस्थानी भाषा और संस्कृति के प्रति अपने मिशनरी संकल्प को दोहराया। राजस्थानी में मेहमानों का स्वागत करते हुए उन्होंने 43 सालों की माणक अलंकरण यात्रा की जानकारी दी। उन्होंने राजस्थान की पत्रकारिता एवं राजस्थानी भाषा के उत्थान के लिए किए गए प्रयासों की जानकारी दी, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के जोधपुर वि.वि. छात्र संघ अध्यक्ष के रूप में वोट क्लब नई दिल्ली पर आयोजित धरने में उनके भाग लेने की भी याद ताजा की। यह समारोह पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, भाषायी संरक्षण और प्रेस की स्वतंत्रता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा का सजीव उदाहरण रहा। माणक अलंकरण न केवल पत्रकारिता में उत्कृष्टता का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जिम्मेदारियों की ओर भी एक कदम है।
प्रबंध सपादक (द्वय) दीपक मेहता व आशीष मेहता ने बताया कि समारोह में वर्ष 2022, 2023 व 2024 का 'माणक अलंकरण' क्रमशः चयनित पत्रकार देवकुमार सिंगोदिया ( राजस्थान पत्रिका, जयपुर), अमित बैजनाथ गर्ग (स्वतंत्र पत्रकार जयपुर) तथा महावीर शर्मा (दैनिक भास्कर, जोधपुर) को प्रदान किया गया। इसके अलावा पांच विशिष्ट पुरस्कारों में जनसम्पर्क कर्मी के रूप में क्रमशः डूंगरपुर की छाया चौबीसा, निफ्ट जोधपुर के डॉ मनीष कुमार शर्मा और बीकानेर के हरीशंकर आचार्य को दिया गया। छायाकार व कार्टूनिस्ट श्रेणी में जयपुर के अशोक जैन, अभिषेक तिवारी व जोधपुर के रामजी व्यास को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में जोधपुर के करनपुरी गोस्वामी, अरूण हर्ष व जयपुर के कमलकांत व्यास को सम्मानित किया गया। वहीं, जलतेदीप समूह श्रेणी में कोलकाता ब्यूरो प्रमुख सच्चिदानंद पारीक, जयपुर डेस्क प्रभारी विपुल श्रीवास्तव व सूरत ब्यूरो प्रमुख राजू तातेड़ को क्रमश: वर्ष 2022, 2023 व 2024 के लिए सम्मानित किया गया। राजस्थानी लेखन महिला श्रेणी में जोधपुर की वरिष्ठ साहित्यकार बंसती पंवार, दमयंती कच्छवाहा तथा बीकानेर की युवा लेखिका डा. रेणुका व्यास को विशिष्ट पुरस्कार से नवाजा गया।