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राजस्थान: मामूली स्पेलिंग की गलती पर छात्र का करिअर बर्बाद न करें, नीट छात्र को कोर्ट से राहत; क्या था मामला?

Tue, 25 Aug 2026 03:42 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: शबाहत हुसैन Updated Tue, 25 Aug 2026 03:42 PM IST
सार

राजस्थान हाईकोर्ट ने नीट यूजी के सफल छात्र को राहत दी। पिता के उपनाम की स्पेलिंग में मामूली अंतर के कारण काउंसलिंग रोकने पर अदालत ने छात्र को प्रक्रिया में शामिल करने और अन्य वैध दस्तावेजों से सत्यापन कर प्रवेश आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।

 

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Rajasthan: Don't ruin a student career over a minor spelling error NEET aspirant gets relief from court
राजस्थान हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान उच्च न्यायालय ने नीट यूजी के एक सफल अभ्यर्थी को राहत देते हुए संबंधित अधिकारियों को उसकी काउंसलिंग प्रक्रिया बिना किसी बाधा के पूरी करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि पिता के उपनाम में लिपिकीय अंतर या मामूली स्पेलिंग की गलती के आधार पर किसी योग्य विद्यार्थी को प्रवेश से वंचित नहीं किया जा सकता। उच्च न्यायालय ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) और नीट काउंसलिंग समिति को निर्देश दिया कि छात्र को मेडिकल कॉलेज में प्रवेश की प्रक्रिया से बाहर न किया जाए।

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दस्तावेजों में उपनाम का अंतर बना बाधा
याचिकाकर्ता छात्र ने नीट यूजी परीक्षा में अच्छे अंक हासिल कर मेरिट सूची में स्थान बनाया था। हालांकि, ऑनलाइन आवेदन पत्र और 10वीं व 12वीं की अंकसूची में उसके पिता के उपनाम की स्पेलिंग में अंतर था। इसी तकनीकी अंतर के चलते काउंसलिंग प्राधिकारियों ने उसकी उम्मीदवारी निरस्त करने की बात कही थी। इसके बाद छात्र ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिका में बताया गया कि छात्र के सभी शैक्षणिक दस्तावेज प्रमाणिक हैं और केवल पिता के नाम की स्पेलिंग में अंतर के कारण उसे मेडिकल क्षेत्र में जाने से रोकना उचित नहीं है।

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हाईकोर्ट ने अपनाया व्यावहारिक रुख
मामले की सुनवाई के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट की एकल पीठ ने कहा कि प्रशासनिक संस्थाओं को छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में संवेदनशील और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। अदालत ने पाया कि अभ्यर्थी की पहचान, शैक्षणिक रिकॉर्ड और प्राप्त अंकों को लेकर कोई संदेह नहीं है।

ऐसी स्थिति में केवल पिता के नाम या उपनाम की स्पेलिंग में अंतर के कारण छात्र को प्रवेश प्रक्रिया से बाहर करना उचित नहीं होगा। अदालत ने कहा कि इस तरह की लिपिकीय गलती को हलफनामा लेकर आसानी से सुधारा जा सकता है।

काउंसलिंग समिति को प्रवेश प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश
हाईकोर्ट ने नीट काउंसलिंग कराने वाले सक्षम अधिकारियों को निर्देश दिया कि छात्र को मौजूदा सत्र की काउंसलिंग प्रक्रिया में बिना किसी बाधा के शामिल होने दिया जाए। साथ ही, अन्य वैध सरकारी दस्तावेजों के जरिए उसकी पहचान का सत्यापन कर प्रवेश की आगे की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। अदालत के इस फैसले से उन अभ्यर्थियों को भी राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके दस्तावेजों में मामूली लिपिकीय या स्पेलिंग की त्रुटियों के कारण प्रवेश प्रक्रिया में परेशानी आती है।

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