जयपुर: बच्चों के खिलाफ अपराध रोकने और बाल संरक्षण की व्यवस्थाओं की मुख्य सचिव ने की समीक्षा
जयपुर में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने बच्चों की सुरक्षा, पॉक्सो मामलों की जांच, बाल श्रम, बाल विवाह और मानव तस्करी की रोकथाम के प्रयासों की समीक्षा की। बैठक में विभागों के समन्वय, अभियोजन और बाल संरक्षण योजनाओं पर चर्चा हुई।
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बच्चों के खिलाफ अपराधों की रोकथाम, पॉक्सो मामलों की जांच और पीड़ित बच्चों को सुरक्षा व पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराने को लेकर मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने गुरुवार को जयपुर स्थित सचिवालय में बैठक की। उन्होंने संबंधित विभागों के बीच समन्वय, जांच और अभियोजन की प्रक्रिया तथा बाल संरक्षण योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की। यह बैठक दो नवंबर को नई दिल्ली में प्रस्तावित संसदीय स्थायी समिति की बैठक की तैयारियों के सिलसिले में हुई।
बैठक में बाल श्रम, बाल विवाह, मानव तस्करी और गुमशुदा बच्चों से जुड़े मामलों की रोकथाम के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी ली गई। मुख्य सचिव ने बच्चों के खिलाफ अपराधों की सूचना मिलने पर कार्रवाई, वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने और न्यायालयों में मामलों की प्रभावी पैरवी से जुड़ी व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की।
पॉक्सो मामलों की निगरानी और जांच पर जोर
अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह भास्कर ए. सावंत ने बताया कि वर्ष 2024 से 28 अक्टूबर 2026 तक आईटीएसएसओ प्रणाली पर अनुपालन 92.3 प्रतिशत रहा। उन्होंने पॉक्सो मामलों की नियमित निगरानी, वैज्ञानिक एवं डिजिटल साक्ष्य जुटाने और संवेदनशील मामलों की जांच करने वाले पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण से जुड़े प्रयासों की जानकारी दी।
बैठक में विद्यालयों और समुदायों में बाल सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने तथा जरूरतमंद बच्चों तक सहायता और संरक्षण सेवाएं पहुंचाने के काम की भी समीक्षा की गई।
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मिशन वात्सल्य के तहत देखभाल और पुनर्वास
अतिरिक्त मुख्य सचिव सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा बाल अधिकारिता विभाग दिनेश कुमार ने मिशन वात्सल्य के तहत बच्चों की देखभाल, संरक्षण और पुनर्वास की व्यवस्थाओं की जानकारी दी। इसमें संस्थागत देखभाल के साथ परिवार आधारित देखभाल, प्रायोजन सहायता और दत्तक ग्रहण के जरिए बच्चों के पुनर्वास के प्रयास शामिल हैं।
बैठक में पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा सहित गृह, विधि एवं विधिक कार्य, महिला एवं बाल विकास, श्रम, प्रारंभिक शिक्षा, अभियोजन और राजस्थान विधि विज्ञान प्रयोगशाला के अधिकारी तथा राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (रालसा) के सदस्य मौजूद रहे।