Election: राजस्थान की चौरासी सीट का तीन राज्यों से नाता, उपचुनाव के लिए BJP-संघ एक्टिव, पर्दे के पीछे खेल क्या
राजस्थान की सात विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं। संभवतया महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के ऐलान के साथ इन उपचुनाव की तारीख भी घोषित कर दी जाएगी। राजस्थान में जिन 7 सीटों पर उपचुनाव हैं होने हैं, उनमें चौरासी सीट भाजपा और संघ के लिए साख का सवाल बन चुकी है। रिपोर्ट में जानिए ऐसा क्यों हैं?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राजस्थान की सात विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं। संभवतया महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के ऐलान के साथ इन उपचुनाव की तारीख भी घोषित कर दी जाएगी। राजस्थान में जिन 7 सीटों पर उपचुनाव हैं होने हैं, उनमें चौरासी सीट भाजपा और संघ के लिए साख का सवाल बन चुकी है। रिपोर्ट में जानिए ऐसा क्यों हैं?
हरियाणा के नतीजे आने के साथ ही भाजपा ने राजस्थान में उपचुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा बीते बुधवार को डूंगरपुर पहुंचे, जहां उन्होंने चौरासी और सलूंबर विधानसभा कार्यकर्ताओं की संगठनात्मक बैठक ली। लेकिन, यह कोई संयोग नहीं है कि उप चुनाव कैंपेन की शुरुआत चौरासी विधानसभा से की गई है। हार्ड कोर ट्राइबल बेल्ट की यह सीट भजापा और आरएसएस के लिए साख का सवाल बन चुकी है। सूत्रों की मानें तो इस सीट पर उपचुनाव सबसे जबरदस्त होगा। भाजपा और संघ ने 2 महीने पहले से ही यहां बाहर से आए कुछ कार्यकर्ताओं की टीम तैनात कर दी है।
संघ के निशाने पर चौरासी ही क्यों?
सियासत की दिलचस्पी यह जानने में है कि चौरासी विधानसभा सीट में आखिर ऐसा क्या है कि भाजपा और संघ ने यहां अपनी पूरी ताकत यहां झौंक दी है। जबकि बीते दो विधानसभा चुनाव से यहां भारत आदिवासी पार्टी बड़े अंतर से चुनाव जीत रही है।
बॉर्डर सीट- इसलिए मोमेंटम तोड़ना रणनीति
- चौरासी सीट राजस्थान, एमपी और गुजरात तीनों राज्यों की सीमा पर स्थित है। इसका असर इन तीनों स्टेट पर पड़ता है।
- आरएसएस ट्राइबल बेल्ट में लंबे समय से काम कर रही है। यहां आरएसएस की तरफ से वनवासी कल्याण परिषद के हॉस्टल भी चलाए जाते हैं।
- यदि भाजपा उपचुनाव में इस सीट के नतीजों को उलटने में कामयाब हो जाती है तो यह उसके लिए एक रणनीतिक जीत होगी। जिससे जरिए वह अगल ट्राइबल रिलीजन कोड से लेकर अगल ट्राइबल स्टेट के बढ़ती मांग के मोमेंटम को भी कुछ हद तक रोक पाएगी।
मुस्लिम ट्राइबल गठजोड़ के साथ नया थर्ड फ्रंट तैयार करने में जुटी बीएपी
संघ के यहां सक्रिय होने की एक बड़ी वजह यह भी है कि यहां पिछले कुछ असरे से ट्राइबल और मुस्लिम समीकरण तेजी से पनपे हैं। एमपी के नीमच-मंदसौर से बड़ी संख्या में मुस्लिम आबादी प्रतापगढ़, बांसवाड़ा और उदयपुर में जमीने ले रही है। ये नई मुस्लिम बेल्ट तैयार हो रही है, ऐसे उनके लिए भाजपा से मुकाबले के लिए बीएपी एक बड़ा विकल्प बनती नजर आ रही है।
एमपी-गुजरात की ट्राइबल सीटें जीतीं, लेकिन यहां भाजपा हारी
लोकसभा चुनाव में भाजपा ने एमपी और गुजरात की सभी ट्राइबल सीटें जीतीं। इनमें एमपी की धार, खरगोन, रतलाम, शहडोल, मंडला और बैतूल सीट तथा गुजरात की बारडोली, वलसाड़, दाहोद और छोटा उदयपुर शामिल हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र की नंदूरबार, डिंडोरी, पालघर व दादरा एवं नागर हवेली (यूटी) की एक सीट भी शामिल है।
यह 13 आदिवासी सीटें आपस में जुड़ी हुई है। इनमें महाराष्ट्र की दो सीटें कांग्रेस और एनसीपी शरद पंवार ने जीती। उससे उत्तर में बांसवाड़ा-डूंगरपुर को छोड़कर सभी 10 आदिवासी रिजर्व सीटें और उनसे लगी अन्य सभी सीटें, जहां आदिवासी वोट काफी तादाद में है, भाजपा बड़े मार्जिन से जीतने में कामयाब रही। लेकिन, बांसवाड़ा-डूंगरपुर में उसे बाप के हाथों करीब ढाई लाख की हार झेलनी पड़ी, जहां प्रधानमंत्री ने जनसभा भी की थी। साथ ही उदयपुर लोकसभा सीट पर बाप उम्मीदवार ने करीब सवा दो लाख वोट लेकर भाजपा की जीत का मार्जिन साढ़े चार लाख से ढाई लाख पहुंचा दिया।
2018 में विधानसभा की 2 सीट से 2024 में संसद तक
भारतीय ट्राइबल पार्टी के नाम से 2018 में राजस्थान की 2 विधानसभा सीटों जीत कर अपना राजनीतिक सफर शुरू करने वाले आदिवासी नेताओं ने 2024 आते-आते संसद में दस्तक दे दी। यही नहीं, राजस्थान की कम से कम 10 विधानसभा सीटें ऐसी रहीं जिन पर बीएपी विधानसभा चुनाव में दूसरे नंबर पर रही।
थ्रर्ड फ्रंट तैयार करने में जुटे रोत
बीएपी गंगानगर से लेकर बाड़मेर तक थ्रर्ड फ्रंट की संभावनाएं तलाश रही है। हालांकि, राजस्थान में पहले भी कई बार थर्ड फ्रंट तैयार करने की कमजोर कोशिशें हुई हैं। पिछले दिनों रोत बाड़मेर में आदिवासी सम्मेलन किया जिसमें 20 हजार से ज्यादा स्थानीय आदिवासी शामिल हुए। यहि वजह है कि बाड़मेर में आरएलपी के हनुमान बेनीवाल और निर्दलीय विधायक रविंद्र भाटी भी बीएपी के सांसद राजकुमार रोत के साथ मंच साझा कर चुके हैं।
पर्दे के पीछे रोत को क्यों साध रही भाजपा
चौरासी सीट राजकुमार रोत के सांसद बनने के बाद खाली हुई। भाजपा किसी तरह रोत से नजदीकी बढ़ाना चाहती थी। पिछले दिनों भाजपा के प्रभारी राधा मोहन दास ने रोत की तारीफ करते हुए यह बयान भी दिया था कि हम चाहते हैं कि रोत बड़े नेता बने और अपने क्षेत्र में मिलकर विकास के काम करें। हालांकि, रोत ने भाजपा के साथ जाने से मना कर दिया। हालांकि, भाजपा लोकसभा चुनाव में महेंद्रजीत मालवीय पर अपना दांव खेल चुकी है जो रोत से पहले ट्राइबल बेल्ट के सबसे कद्दावर नेता माने जाते थे। लेकिन, रोत ने लोकसभा चुनाव में उन्हें जोरदार पटखनी दे दी। अब भाजपा के पास यहां इस नए ट्राइबल नरेटिव को काउंटर करने के लिए कोई मजबूत पॉलिटकल लीडरशिप नहीं है।
मध्य राजस्थान तक कनर्वजन चिंता का विषय
यह मुद्दा इसलिए भी संघ के फोकस में है क्योंकि, जहां-जहां ऐसे समीकरण बन रहे हैं वहां एंटी हिंदू ड्राइव का प्रभाव भी बढ़ रहा है। ब्यावर जिले में धर्म परिवर्तन का मुद्दा राजस्थान में संघ के फोकस में रहा है। इसकी वजह यह है कि मेवाड़ का लिंक यहां से सीधा जुड़ता नजर आया है। पिछले दिनों राजस्थान के दौरे पर आए संघ के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले की मीटिंग में भी मध्य राजस्थान में कनवर्जन का मुद्दा सामने आया था। कन्हैयालाल हत्याकांड में शामिल हत्यारे भी मगरा क्षेत्र के भीम में शरण लेने के लिए पहुंचे थे और उनको बचाने के लिए स्थानीय मुस्लिम भीड़ ने पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट की थी। पिछले विधानसभा चुनावों 2018 में एक मुस्लिम प्रत्याशी जिस पर उस समय देश द्रोह का मुकदमा चल रहा था, बीस हजार वोट से अधिक लेने में कामयाब रहा और बाद में कांग्रेस ज्वॉइन कर ली।