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Rajasthan News: एसआई भर्ती मामले की सुनवाई से पहले AAG ने लगाया प्रार्थना पत्र, कोर्ट ने 1 जुलाई की तारीख दी
Mon, 26 May 2025 12:19 PM IST
प्रिया वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Mon, 26 May 2025 12:19 PM IST
सार
राजस्थान में SI भर्ती को लेकर हाईकोर्ट ने 1 जुलाई को अगली सुनवाई की तारीख दे दी है। इससे पहले सरकार की पैरवी कर रहे एएजी विज्ञान शाह ने कोर्ट को बताया था कि सीएम दिल्ली में नीति आयोग की बैठक में व्यस्त थे इसलिए फैसला नहीं ले पाए।
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राजस्थान
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
विवादित SI भर्ती 2021 को लेकर सरकार को हाईकोर्ट से आज राहत मिल गई है। कोर्ट ने मामले में 1 जुलाई को अगली सुनवाई करने तारीख तय कर दी है। इससे पहले राज्य सरकार की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल विज्ञान शाह ने कोर्ट में एक प्रार्थना पत्र पेश किया। इसमें कहा गया है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा दिल्ली में नीति आयोग की बैठक में व्यस्त हैं, जिसके चलते इस मामले पर अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका। इससे पहले याचिकाकर्ताओं के वकील हरेंद्र नील ने प्रार्थना पत्र का विरोध करते हुए कहा- सरकार भर्ती पर कोई निर्णय नहीं लेना चाहती है, इसलिए इस तरह से समय निकाला जा रहा है।
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सरकार ने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार 20 मई को कैबिनेट सब कमेटी की बैठक आयोजित की गई थी। हालांकि इसके बाद 24 और 25 मई को दिल्ली में नीति आयोग की बैठक थी, जिसमें मुख्यमंत्री को भाग लेना पड़ा। इसलिए मुख्यमंत्री स्तर पर निर्णय नहीं हो सका। सरकार ने कोर्ट से अपील की है कि उसे अंतिम निर्णय के लिए और समय दिया जाए।
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इससे पहले भी सरकार ने समय की मांग करते हुए 13 मई को एक सब-कमेटी मीटिंग बुलाई थी, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के कारण कई मंत्री उसमें शामिल नहीं हो सके। साथ ही कमेटी के एक सदस्य मंत्री की तबीयत खराब होने के चलते बैठक पूरी नहीं हो पाई। इसके बाद सरकार ने 21 मई को दूसरी बैठक रखी और 20 मई को इसे आयोजित भी किया, लेकिन अब तक मुख्यमंत्री स्तर पर विचार-विमर्श नहीं हो सका।
वहीं याचिकाकर्ताओं के वकील हरेन्द्र नील ने सरकार के इस प्रार्थना पत्र का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि सरकार जान-बूझकर फैसला टाल रही है और कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं कर रही है।
पिछली सुनवाई में जस्टिस समीर जैन की पीठ ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी थी कि अगर 26 मई तक निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों और जिम्मेदारों को इसके परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। अब देखना यह होगा कि सोमवार को कोर्ट सरकार के रुख से कितना संतुष्ट होता है और आगे क्या आदेश जारी करता है।