Jaipur News: डिस्टर्ब एरिया बिल पर युवाओं के तीखे सवाल, आखिर कोई क्षेत्र अशांत क्यों है? सरकार से मांगा जवाब
राज्य में डिस्टर्ब एरिया बिल को लेकर बहस का माहौल बना हुआ है। जयपुर के कुछ युवकों ने अमर उजाला के साथ बातचीत में इस कानून पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सरकार और विपक्ष दोनों की भूमिका पर सवाल उठाए और इसे लेकर अपनी राय रखी।
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राज्य सरकार द्वारा विधानसभा में पारित किए गए अशांत क्षेत्र बिल को लेकर शहर में चर्चा तेज हो गई है। इस मुद्दे पर जब जयपुर के कुछ मुस्लिम युवकों से बातचीत की गई तो उन्होंने बिल को लेकर कई सवाल उठाए और सरकार के साथ-साथ विपक्ष पर भी निशाना साधा।
जयपुर के एक युवक सलीम ने कहा कि इस बिल पर चर्चा करने से पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि आखिर सरकार और राजनीतिक दल कैसे तय करते हैं कि कौन सा क्षेत्र अशांत है और कौन सा नहीं। उनका कहना था कि यदि सरकार और विपक्ष ने पहले से ही शांत और अशांत क्षेत्रों की पहचान कर ली है, तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कोई क्षेत्र अशांत क्यों है?
सलीम ने कहा कि आज आम लोगों के सामने बिजली, पानी, शिक्षा, चिकित्सा और रोजगार जैसी बुनियादी समस्याएं हैं। सरकारों को इन मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए, न कि ऐसे बिल लाकर केवल राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने विपक्ष को भी घेरते हुए कहा कि विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर अपनी राजनीति साधने में लगा है। उनके अनुसार विपक्ष का उद्देश्य भी आने वाले समय में सत्ता तक पहुंचने का रास्ता तैयार करना है।
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इस दौरान मौजूद अन्य युवकों ने भी अपनी राय रखते हुए कहा कि सरकार और विपक्ष को जनता की मूलभूत समस्याओं पर गंभीरता से काम करना चाहिए। युवकों का कहना था कि समाज में शांति और विकास के लिए जरूरी है कि सरकार लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों पर प्राथमिकता से ध्यान दे।
बता दें कि शुक्रवार को चर्चा के बाद विधानसभा में डिस्टर्ब एरिया बिल-2026 पारित किया गया है। इस कानून के तहत राज्य सरकार दंगा प्रभावित या सामाजिक तनाव वाले क्षेत्रों को डिस्टर्ब एरिया घोषित कर सकेगी। ऐसे क्षेत्रों में किसी भी मकान, जमीन या अन्य संपत्ति की खरीद-फरोख्त के लिए एडीएम या एसडीएम की अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
सरकार का कहना है कि यह कानून कमजोर लोगों को दबाव में संपत्ति बेचने से बचाने और संवेदनशील इलाकों में शांति बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। वहीं विपक्ष का आरोप है कि इस कानून का इस्तेमाल राजनीतिक और सामाजिक ध्रुवीकरण के लिए किया जा सकता है, इसी वजह से इस बिल को लेकर राज्य में बहस और राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
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