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Jaipur News: 20 साल बाद चला रणजीत! जेके लोन में स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी टाइप-2 का इलाज सफल

Sat, 20 Sep 2025 07:28 AM IST
सौरभ भट्ट न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: सौरभ भट्ट Updated Sat, 20 Sep 2025 07:28 AM IST
सार

Jaipur News: जयपुर के जेके लोन अस्पताल ने स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी टाइप-2 का मुफ्त इलाज शुरू किया। पहली बार बाल संबल योजना के तहत मरीज को रिसडिप्लाम दवा दी गई, जिससे वह अपने पैरों पर खड़ा हो सका।

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Jaipur News: JK Lon Hospital Makes History; Provide Free SMA Type-2 Treatment
सरकारी अस्पताल जेके लोन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जयपुर के जेके लोन अस्पताल ने दुर्लभ बीमारी स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी टाइप-2 (SMA Type-2) के सफल इलाज से इतिहास रच दिया है। यह अस्पताल उत्तर भारत का पहला सरकारी चिकित्सा संस्थान बन गया है जहां सरकार की बाल संबल योजना के तहत इस बीमारी के मरीजों को मुफ्त में दवा उपलब्ध कराई जा रही है।

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जयपुर जिले के दूदू निवासी 20 वर्षीय रणजीत, जो बचपन से इस गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, अब इलाज के बाद बिना सहारे के चलने में सक्षम हो गए हैं। रणजीत के परिवार ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसके बाद उन्हें जेके लोन में मुफ्त इलाज मिला।

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डॉ. प्रियांशु माथुर, वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ और मेडिकल जेनेटिक्स विभाग के इंचार्ज ने बताया कि इस बीमारी में प्रयोग की जाने वाली दवा "रिसडिप्लाम" की कीमत लगभग 5 लाख रुपये है। यह ओरल दवा 12 खुराक में दी जाती है और मरीज के मांसपेशियों को सक्रिय करती है।

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डॉ. माथुर ने बताया कि बाल संबल योजना के तहत राज्य सरकार ने 50 करोड़ रुपये का बजट दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए जारी किया है। इस योजना का संचालन सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग कर रहा है। अब यह दवा अन्य योग्य मरीजों को भी निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।

क्या है स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी टाइप-2?
यह एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी है जो रीढ़ की हड्डी में मौजूद मोटर न्यूरॉन्स को प्रभावित करती है, जिससे मांसपेशियां कमजोर होकर सिकुड़ने लगती हैं।

मुख्य लक्षणों में शामिल हैं:

  • मांसपेशियों में कमजोरी

  • उंगलियों में कंपन

  • सांस लेने में कठिनाई

  • बैठने की क्षमता तो होती है, लेकिन खड़े या चल नहीं पाते

अब तक जेके लोन में 20-25 मरीज रजिस्टर्ड हैं।
डॉ. माथुर ने बताया कि 2 साल से कम उम्र के मरीजों के लिए एक इंजेक्शन की कीमत 17 करोड़ रुपये तक होती है, जबकि बड़े बच्चों को ओरल दवा दी जाती है।

 

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