जयपुर: पुलवामा हमले का डर, एसटीएफ अफसर बनने का नाटक और फिर ठगी! में दो लोगों से 5.76 लाख ऐंठे
जयपुर में साइबर ठगी के दो मामलों में दो लोगों से कुल 5,76,925 रुपये ठग लिए गए। चौमूं थाना क्षेत्र में एक जालसाज ने खुद को एसटीएफ अधिकारी बताकर पुलवामा हमले में फर्जी सिम कार्ड के इस्तेमाल का डर दिखाया और संतोष कुमार सिकलीगर से 2.70 लाख रुपये ठग लिए।
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जधानी जयपुर में साइबर ठगी के दो अलग-अलग मामले सामने आए हैं। साइबर अपराधियों ने दो लोगों से कुल 5,76,925 रुपये ठग लिए। पहले मामले में एक जालसाज ने खुद को विशेष कार्य बल (एसटीएफ) का अधिकारी बताकर पीड़ित को पुलवामा हमले में फर्जी सिम कार्ड के इस्तेमाल का डर दिखाया और 2,70,000 रुपये ठग लिए। दूसरा मामला करधनी थाना क्षेत्र का है, जहां कालवाड़ रोड निवासी एक व्यक्ति से 3,06,925 रुपये की धोखाधड़ी की गई। पुलिस ने दोनों मामलों में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
एसटीएफ अधिकारी बनकर पुलवामा हमले का डर दिखाया
चौमूं थाना क्षेत्र में हुई ठगी के मामले में पुरोहितों का मोहल्ला निवासी संतोष कुमार सिकलीगर ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के अनुसार, एक अज्ञात व्यक्ति ने उन्हें फोन किया और खुद को एसटीएफ का वरिष्ठ अधिकारी बताया। इसके बाद आरोपी ने उन्हें डराना शुरू कर दिया। आरोपी ने दावा किया कि पुलवामा हमले में उनके नाम से जारी एक फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल किया गया था। उसने पीड़ित को गंभीर कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का डर दिखाया। इस दबाव में आकर संतोष कुमार ने मामले को खत्म करने और खुद को निर्दोष साबित करने के नाम पर आरोपी के बताए बैंक खाते में 2,70,000 रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में ठगी का अहसास होने पर पीड़ित ने पुलिस से शिकायत की। चौमूं थाना पुलिस ने 14 अक्टूबर 2026 को भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत प्राथमिकी दर्ज की। पुलिस बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर आरोपी की पहचान करने में जुटी है।
करधनी में 3.06 लाख रुपये की साइबर ठगी
साइबर ठगी का दूसरा मामला करधनी थाना क्षेत्र का है। कालवाड़ रोड स्थित विनायक एन्क्लेव निवासी 53 वर्षीय जयदेव सिंह चरण के साथ अज्ञात साइबर ठगों ने 3,06,925 रुपये की धोखाधड़ी की। पीड़ित ने इस संबंध में राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई थी। शुरुआती जांच के बाद साइबर थाने से शिकायत करधनी थाने भेज दी गई। इसके बाद करधनी थाना पुलिस ने 13 अक्टूबर को भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 319(2) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। पुलिस पीड़ित के बैंक खातों के विवरण और डिजिटल लेन-देन से जुड़े साक्ष्यों की जांच कर रही है। जांच का उद्देश्य ठगी में शामिल आरोपियों तक पहुंचना और रकम के लेन-देन की जानकारी जुटाना है।
पुलिस ने संदिग्ध कॉल से सावधान रहने की अपील की
बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि यदि कोई अज्ञात व्यक्ति फोन करके खुद को पुलिस, एसटीएफ या किसी अन्य जांच एजेंसी का अधिकारी बताए और गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई का डर दिखाए, तो घबराकर पैसे न भेजें।
साइबर ठगी होने पर 1930 पर करें शिकायत
पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि साइबर ठगी होने पर बिना देर किए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। समय रहते शिकायत करने से ठगी की रकम को रोकने या वापस पाने की संभावना बढ़ सकती है।