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International Women's day: गायकी से दुनिया तक का सफर, पद्मश्री बेगम बैतूल की संघर्ष और सफलता की कहानी; जानें
Sat, 08 Mar 2025 10:15 AM IST
शबाहत हुसैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: शबाहत हुसैन
Updated Sat, 08 Mar 2025 10:15 AM IST
सार
International Women's day: सहेलियों के साथ मंदिर में जाना और वहीं ढोलक बजाना और गाना सीखना बेगम बैतूल का अंदाज निराला था। उन्होंने बताया कि तब यह अंदाजा नहीं था कि मंदिर में शुरू हुआ यह सफर उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच तक ले जाएगा। आइये जानते हैं उनके अनसुने किस्से।
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बेगम बैतूल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी मांड गायकी से पहचान बनाने वाली पद्मश्री बेगम बैतूल ने महिला दिवस पर अपनी भावनाओं को साझा किया। उन्होंने अपने जीवन के संघर्ष, पारिवारिक सख्ती, समाज की चुनौतियों और अपनी उपलब्धियों के बारे में खुलकर बात की। इस दौरान वह अपनी मां, पिता और बेटी को याद कर भावुक हो गईं और कहा ‘जब सब कुछ मिल गया, तब देखने वाला कोई नहीं रहा।’
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संघर्ष भरा बचपन, पर सपने बड़े थे
बेगम बैतूल का बचपन बेहद संघर्षपूर्ण रहा। उन्होंने बताया कि पुराने समय में बेटियों की पढ़ाई-लिखाई को महत्व नहीं दिया जाता था। घर में लड़कियों के लिए पढ़ाई से ज्यादा घरेलू कामों पर जोर दिया जाता था। स्कूल जाने का अवसर बहुत कम मिला, लेकिन पढ़ने की तीव्र इच्छा थी। इस इच्छा को पूरा करने के लिए उन्होंने अपने भाइयों से बाराखड़ी सीख ली। उन्होंने बताया कि सड़क किनारे लगे बोर्डों पर जो लिखा होता था, उसे समझने के लिए वह राहगीरों से पूछती थीं और अपनी स्मृति में चित्र बनाकर शब्दों को पहचानने की कोशिश करती थीं। गलतियां भी होती थीं, लेकिन उन्हें पूछकर सुधार लिया करती थीं। इस तरह उन्होंने धीरे-धीरे पढ़ाई की दुनिया में कदम रखा।
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गायकी की शुरुआत ठाकुर जी के मंदिर से
गायन और भजन गाने का शौक बचपन से था। अपने परिवार से जिद करके उन्होंने घर के पास स्थित ठाकुर जी के मंदिर में जाने की अनुमति ली। वहां भजन-कीर्तन होते थे, ढोलक बजती थी। उन्होंने सहेलियों के साथ मंदिर में जाना शुरू किया और वहीं ढोलक बजाना और गाना सीख लिया। बेगम बैतूल ने बताया कि तब यह अंदाजा नहीं था कि मंदिर में शुरू हुआ यह सफर उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच तक ले जाएगा।
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ससुराल में भी जारी रखा संगीत का सफर
परंपरागत समाज में कम उम्र में विवाह होना आम बात थी। उनकी भी शादी कम उम्र में हो गई और ससुराल आ गईं। ससुराल में गाना-बजाना पसंद नहीं किया जाता था, लेकिन उन्होंने अपने पति से अपने इस शौक के बारे में बात की। सौभाग्य से उनके पति ने उनका समर्थन किया और कहा कि "अगर यह शौक है तो इसे पूरा करो।" इसके बाद उन्होंने भजन गाने की शुरुआत की। लोग उनकी आवाज और सुरों की सराहना करने लगे। कुछ लोगों ने कहा कि उन्हें राजस्थानी लोकगीत भी गाने चाहिए, और यहीं से मांड गायकी की शुरुआत हुई।
अंतरराष्ट्रीय पहचान और विदेश यात्राएं
उनकी आवाज में ऐसा जादू था कि धीरे-धीरे विदेशों तक उनका नाम पहुंचने लगा। विदेशी दर्शक उनकी गायकी से प्रभावित होने लगे। हालांकि, भाषा की बाधा एक समस्या थी, न उन्हें अंग्रेजी आती थी, न विदेशी श्रोता उनकी भाषा समझते थे। एक बार किसी विदेशी ने उनसे पूछा कि क्या वह विदेश में प्रस्तुति देने आ सकती हैं। उनके साथ मौजूद व्यक्ति ने उनकी ओर से ‘हां’ कह दिया और इसी के साथ उनके अंतरराष्ट्रीय सफर की शुरुआत हो गई। आज तक वह दुनिया के लगभग हर प्रमुख देश में अपनी मांड गायकी का जादू बिखेर चुकी हैं। पेरिस में होने वाली होली उत्सव में उन्हें विशेष रूप से आमंत्रित किया जाता है, जहां वह गणेश वंदना से अपनी प्रस्तुति की शुरुआत करती हैं।
प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत में प्रस्तुत की गणेश वंदना
बेगम बैतूल ने गर्व से बताया कि जब प्रधानमंत्री फ्रांस गए थे, तो उनके स्वागत के लिए उन्हें बुलाया गया था। उन्होंने पहली बार प्रधानमंत्री के सामने गणेश वंदना प्रस्तुत की थी, जिसे सुनकर प्रधानमंत्री बेहद प्रसन्न हुए और उनकी खूब सराहना की थी।
महिला दिवस पर बेटियों को दिया संदेश
महिला दिवस के अवसर पर बेगम बैतूल ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि "घर की महिलाओं और बेटियों को आगे बढ़ने का अवसर दें। उनकी उड़ान को मत रोको, क्योंकि वे बहुत कुछ कर सकती हैं और समाज में बड़ा नाम कमा सकती हैं।"
भावुक होते हुए उन्होंने कहा
"आज मेरा मन करता है कि काश मेरी मां-पिता होते और देख पाते कि मैं कहां तक पहुंची हूं। यह मेरे लिए बहुत खुशी का पल होता। लेकिन जो भी है, वह अच्छा है। मेरा बस यही कहना है कि लोग अपनी बेटियों को प्रोत्साहित करें और आगे बढ़ाएं।"
कला को नई पीढ़ी तक पहुंचा रहीं बेगम बैतूल
बेगम बैतूल अपनी कला को खुद तक सीमित नहीं रख रही हैं। वह कई बच्चियों को संगीत सिखा रही हैं। उन्हें इन बच्चियों में अपना अक्स नजर आता है और वह चाहती हैं कि वे आगे चलकर बड़ा नाम करें। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि संघर्षों के बावजूद अगर हौसला और जुनून हो, तो सफलता जरूर मिलती है। बेगम बैतूल आज सिर्फ एक गायिका नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण की प्रेरणा भी हैं।