Jaipur News: डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 23.56 लाख की महाठगी; साइबर पुलिस ने गिरोह का एक और सदस्य दबोचा
जयपुर में 75 वर्षीय बुजुर्ग से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 23.56 लाख की ठगी के मामले में साइबर क्राइम पुलिस ने गिरोह के एक और सदस्य कमलेश सेरावत को गिरफ्तार किया। अब तक 7 आरोपी पकड़े जा चुके हैं। आरोपी के खाते में कई राज्यों से ठगी की रकम मिली।
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साइबर थाना पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर एक 75 वर्षीय बुजुर्ग से 23.56 लाख रुपये की बड़ी ठगी करने वाले संगठित गिरोह के एक और सक्रिय सदस्य को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई जयपुर में फर्जी पुलिस और सीबीआई अधिकारी बनकर की गई ठगी के मामले में की गई है।
डीआईजी साइबर क्राइम विकास शर्मा ने बताया कि 27 मई को जयपुर निवासी परिवादी ने साइबर थाना राजस्थान में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि जालसाजों ने उन्हें मोबाइल फोन पर फर्जी पुलिस और सीबीआई अधिकारी बनकर डिजिटल अरेस्ट करने की धमकी दी और उनसे 23,56,000 रुपये की साइबर ठगी की गई।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और पूर्व में सुरेश कुमार, प्रहलाद कुमावत, ओमप्रकाश, भूपेश, वशुल सन्नी कुमार और रेहान मकन्दर को गिरफ्तार किया था।
लाभान्वित खाताधारक और नए आरोपी की गिरफ्तारी
अनुसंधान के दौरान पुलिस ने ठगी की गई राशि के लाभार्थियों पर ध्यान केंद्रित किया। इस दौरान प्रथम लाभान्वित खाताधारक सुरेश उर्फ सुरेंद्र के खाते में प्राप्त कुल 23,56,000/- रुपये की राशि की जांच की गई। जांच में एक बाल अपचारी को निरुद्ध किया गया, जिसके खाते में इस ठगी की ₹89,335 की राशि प्राप्त हुई थी। इस बाल अपचारी के खाते में अन्य पीड़ितों की ठगी के ₹9,58,350 भी आना पाया गया।
बाल अपचारी ने पूछताछ में बताया कि उसने अपना बैंक खाता, एटीएम और मोबाइल सिम साइबर ठगी के गिरोह के सदस्य कमलेश कुमार सेरावत पुत्र नारायण लाल (22) निवासी मुन्या वाली ढाणी, भोपावास, सामोद, जयपुर को ₹4,000 के कमीशन पर दिया था।
इस सूचना पर कार्रवाई करते हुए, साइबर पुलिस ने मंगलवार को गिरोह के सदस्य कमलेश कुमार सेरावत को गिरफ्तार कर लिया। डीआईजी शर्मा और एसपी साइबर क्राइम शांतनु कुमार के सुपरविजन में मुल्जिम कमलेश कुमार सेरावत से पूछताछ जारी है। आरोपी कमलेश कुमार सेरावत के स्वयं के बैंक खाते में तीन अन्य राज्यों से ठगी की शिकायतें आई हैं, जिससे यह गिरोह के अंतर्राज्यीय लिंक की ओर इशारा करता है। मामले में अग्रिम अनुसंधान जारी है।
साइबर पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि फर्जी पुलिस/सीबीआई अधिकारियों के फोन आने पर घबराएं नहीं और किसी भी स्थिति में अपनी बैंक जानकारी या ओटीपी किसी को साझा न करें। ऐसे किसी भी कॉल की सूचना तुरंत पुलिस को दें।