राजस्थान: फर्जी बीपीएड डिग्री मामले में बड़ा खुलासा, 66 अभ्यर्थियों के बाद अब दूसरे कोर्स भी SOG के रडार पर
फर्जी बीपीएड डिग्री मामले में तीन गिरफ्तारियों के बाद एसओजी की जांच 66 अभ्यर्थियों तक पहुंची है। विश्वविद्यालय के अन्य पाठ्यक्रमों के रिकॉर्ड और कथित बैकडेटेड डिग्रियों की भी जांच जारी है।
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राजस्थान में शारीरिक शिक्षक भर्ती परीक्षा-2022 से जुड़े फर्जी बीपीएड डिग्री मामले की जांच अब 66 अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं रही है। एसओजी को मध्यप्रदेश के सीहोर स्थित श्री सत्य साईं विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड की जांच में कई अन्य पाठ्यक्रमों की डिग्रियों और फीस लेजर में भी गड़बड़ियां मिली हैं।
एसओजी ने इस मामले में 24 अगस्त को विश्वविद्यालय के कुलपति मुकेश तिवाड़ी, परीक्षा नियंत्रक संजय राठौड़ और कंप्यूटर ऑपरेटर आनंद शर्मा को 24 अगस्त को गिरफ्तार किया था। तीनों को कोर्ट में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है। मूल अभ्यर्थी भारमल राम को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और उसके खिलाफ चालान पेश किया जा चुका है।
66 बीपीएड डिग्रियों ने बढ़ाया शक
जांच में सामने आया कि शारीरिक शिक्षक भर्ती परीक्षा-2022 में 66 अभ्यर्थियों ने इसी विश्वविद्यालय की बीपीएड डिग्री प्रस्तुत की थी। एसओजी के अनुसार इनमें बड़ी संख्या में डिग्रियां प्रथम दृष्टया बैकडेट में जारी किए जाने के संकेत मिले हैं। विश्वविद्यालय में बीपीएड की 100 सीटें स्वीकृत होने के बावजूद राजस्थान के अभ्यर्थियों की संख्या को भी जांच का अहम आधार बनाया गया है।
फीस लेजर में परीक्षा परिणाम के बाद की एंट्री
फोरेंसिक जांच में भारमल राम के नाम से विश्वविद्यालय में दो अलग-अलग फीस लेजर अकाउंट मिलने की बात सामने आई है। एसओजी के अनुसार इनमें कुछ प्रविष्टियां बाद की तारीखों में की गईं, जबकि रिकॉर्ड में उन्हें पहले की तारीख का दिखाने के संकेत मिले हैं। परीक्षा का परिणाम 21 अक्टूबर 2022 को जारी हुआ था, जबकि फीस संबंधी कुछ एंट्री इसके बाद की मिलीं।
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अब बीपीएड के साथ दूसरे कोर्स भी जांच में
एसओजी की फोरेंसिक और वित्तीय जांच में विश्वविद्यालय के अन्य पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों के फीस रिकॉर्ड में भी विसंगतियां मिलने की बात सामने आई है। जांच का दायरा लॉ, पीएचडी, इंजीनियरिंग डिग्री/डिप्लोमा, बीसीए, एमबीए, बीएससी और फिजियोथेरेपी जैसे पाठ्यक्रमों तक बढ़ाया जा रहा है। एसओजी अब विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्यों और संबंधित अभ्यर्थियों की डिग्रियों का मिलान कर यह पता लगाने में जुटी है कि कथित बैकडेटेड डिग्री जारी करने का खेल केवल बीपीएड तक सीमित था या इसका दायरा और बड़ा है।
भर्ती प्रक्रिया पर भी उठेंगे सवाल
जांच का अगला अहम बिंदु यह है कि इन डिग्रियों के आधार पर कितने अभ्यर्थियों ने सरकारी नौकरी हासिल की और कितनों ने भर्ती परीक्षाओं में इनका इस्तेमाल किया। एसओजी ने चयनित अभ्यर्थियों की डिग्रियों के सत्यापन के लिए संबंधित विभागों को भी सूचना दी है।