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Jaipur: सचिन पायलट पर अनुशासनात्मक कार्रवाई फिलहाल ठंडे बस्ते में, कांग्रेस आलाकमान से मिला ऑफर, जानें मामला

Fri, 14 Apr 2023 12:50 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: अर्पित याज्ञनिक Updated Fri, 14 Apr 2023 12:50 PM IST
सार

कांग्रेस आलाकमान ने राजस्थान में गहलोत-पायलट विवाद के कारण पायलट को केंद्रीय संगठन में बड़ा पद लेकर काम करने का ऑफर दिया है। राहुल गांधी के निर्देश के बाद पायलट के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। 

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Congress high command bans disciplinary action on Sachin Pilot
सचिन पायलट और राहुल गांधी। - फोटो : Amar Ujala Digital

विस्तार

राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट पर अनुशासनात्मक कार्रवाई फिलहाल ठंडे बस्ते में जाने के आसार हैं, क्योंकि उन पर एक्शन की बात कहने वाले प्रदेश कांग्रेस प्रभारी सुखजिंदर सिंह के सुर बदल गए हैं। आलाकमान और राहुल गांधी से वार्ता के बाद अब रंधावा ने कहा है कि जल्दबाजी में फैसले नहीं होते, बड़े लीडर ही कुछ तय करेंगे। फोन पर मीडिया बातचीत में दिल्ली से रंधावा ने कहा कि पूरे मामले पर अभी विचार चल रहा है। हाईकमान को अभी प्रारंभिक जानकारी दी गई है, लेकिन अभी डिटेल में भी जानकारी दी जाएगी। हमने राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष से चर्चा की है। वरिष्ठ नेताओं से बातचीत करने के बाद ही कोई फैसले होते हैं, जिसमें समय लगेगा। जल्दबाजी में फैसले नहीं किए जाते।

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कोई बयान जारी न करें
दो दिन पहले सचिन पायलट पर एक्शन की बात कहने वाले रंधावा के बदले सुरों के सियासी मायने निकाले जाने शुरू हो गए हैं। रंधावा और वेणुगोपाल ने गुरुवार को दो-तीन बार कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष मलिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की। प्रभारी महासचिव केसी वेणुगोपाल और सुखजिंदर सिंह रंधावा ने राहुल गांधी से भी मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी ने रंधावा और वेणुगोपाल को स्पष्ट रूप से कह दिया है कि एक्शन लेने या नहीं लेने को लेकर मीडिया में कोई बयान जारी नहीं किया जाए। गांधी परिवार से हरी झंडी मिलने के बाद ही इस बारे में कुछ कहा जाए। इसके बाद रंधावा और वेणुगोपाल में से किसी ने मीडिया के सामने कुछ नहीं कहा। राहुल गांधी से मुलाकात के बाद केसी वेणुगोपाल और रंधावा ने फिर से खड़गे से मुलाकात की।
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सचिन पायलट और कांग्रेस दोनों ने मौन धारण किया
पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट और कांग्रेस पार्टी दोनों ने ही अब मौन धारण कर लिया है। गुरुवार को नई दिल्ली में मुलाकातों का दौर चला, लेकिन किसी ने इस बारे में कुछ नहीं बोला।
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क्यों कांग्रेस हाईकमान नहीं ले रही पायलट पर एक्शन?
कांग्रेस आलाकमान राजस्थान में सीएम नहीं बना सकी। मुखिया का तख्ता पलट नहीं हो सका, इसका दर्द सचिन पायलट के साथ प्रियंका और राहुल गांधी को भी है। शायद यही वो कारण है कि कांग्रेस हाईकमान सचिन पायलट के बगावती तेवरों, प्रेसवार्ता के बयान और अनशन मामले पर जल्दबाजी में कुछ फैसला नहीं करना चाहता है। सचिन पायलट पार्टी में बड़ा युवा चेहरा हैं। हिमाचल में पिछले दिनों कांग्रेस पार्टी को जीत दिलाने में उनकी भूमिका रही है। कांग्रेस के सीनियर नेता उन्हें एसेट मानते हैं। पायलट राहुल गांधी और प्रियंका के अच्छे मित्र भी हैं। दूसरा चुनाव के माहौल के बीच पायलट पर कार्रवाई कांग्रेस के लिए आत्मघाती साबित हो सकती है। राजस्थान ही नहीं कर्नाटक, एमपी, छत्तीसगढ़ और आगामी चुनावों में सभी जगह इसका असर पड़ सकता है।

पायलट ने 17 अप्रैल को बनाया शाहपुरा और खेतड़ी का दौरा
सचिन पायलट ने मामले पर अब चुप्पी साध ली है। 17 अप्रैल को पायलट शाहपुरा और खेतड़ी का दौरा करेंगे और जनसभाओं को संबोधित करेंगे। इन सभाओं में पायलट का क्या रुख रहता है, क्या पायलट फिर से गहलोत पर हमला बोलेंगे या उन्हें हाईकमान ने कड़ी नसीहत दे दी है, यह उनके भाषणों से स्पष्ट हो जाएगा। पायलट ने रंधावा के बयानों पर भी किसी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं दी है। सूत्र बताते हैं सचिन पायलट को कांग्रेस हाईकमान की ओर से बुलाया जा सकता है, लेकिन यह मुलाकात कब होगी इस पर असमंजस बना हुआ है।

पार्टी खुद छोड़ने के मूड में नहीं पायलट
सचिन पायलट खुद कांग्रेस पार्टी छोड़ने के मूड में नहीं हैं। वो लोकतांत्रिक तरीके से पार्टी के अंदर और बाहर पब्लिकली अपनी बात मजबूती से रखना चाहते हैं। पायलट को पता है कि कांग्रेस ने उन्हें निकाला तो इसका कांग्रेस को नुकसान होगा, पब्लिक सिम्पैथी पायलट के साथ हो जाएगी।

आलाकमान चाहती है केंद्रीय संगठन में काम करें सचिन
गहलोत और पायलट की सियासी अदावत काफी पुरानी है। इसी कारण कांग्रेस में कई दौर की बैठकों के बाद भी इस विवाद पर उलझन बनी हुई है। एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने बताया कि पार्टी आलाकमान पायलट मामले का फैसला करने की जल्दबाजी में नहीं है। पार्टी कोई भी कदम उठाने से पहले फायदे और नुकसान का पूरा आकलन कर रही है। सूत्र बताते हैं राजस्थान के मसले पर वरिष्ठ नेताओं सोनिया, राहुल, प्रियंका से चर्चा के बाद ही कोई कदम उठाया जाएगा। सूत्र बताते हैं कि पार्टी पायलट को केंद्रीय संगठन में बड़ा पद देकर चुनावी माहौल बनाने और कांग्रेस संगठन में काम करने के लिए कह रही है। 2024 लोकसभा चुनाव के मद्देनजर उनकी भूमिका देखी जा रही है। सचिन पायलट पहले भी केंद्रीय राज्य मंत्री यूपीए सरकार के समय रहे हैं।  


सचिन की विदाई कांग्रेस के लिए आत्मघाती होगी
अगर पार्टी ने एक्शन लेकर पायलट की विदाई की, तो पायलट की स्ट्रेटजी कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है। सचिन पायलट जैसे दमदार और युवा नेता को साथ लेने के लिए बीजेपी, आम आदमी पार्टी, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी जैसे दल तैयार हैं। सचिन पायलट गठबंधन के जरिए भी चुनाव में उतर सकते हैं या एक अलग पार्टी खड़ी कर सकते हैं, जिसका सीधा सीधा नुकसान कांग्रेस को ही होगा।

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