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Rajasthan assembly session: विधानसभा सत्र होगा घमसान, कांग्रेस बोली स्पीकर निष्पक्ष रहें नहीं तो होगा विरोध

Wed, 20 Aug 2025 04:17 PM IST
सौरभ भट्ट न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: सौरभ भट्ट Updated Wed, 20 Aug 2025 04:17 PM IST
सार

राजस्थान में विधानसभा का मानसून सत्र 1 सितंबर से आहूत होने जा रहा है। पिछले सत्र हंगामेंदार रहा जिसमें कांग्रेस और स्पीकर के बीच खुलकर टकराव सामने आया था। इस बार कांग्रेस  के तरकश में कौन से तीर होंगे। इसे लेकर अमर उजाला ने नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली से खास बातचीत की-
 

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Congress Gears Up to Corner Rajasthan Government Ahead of Assembly Session, Focus on Law & Order
tikaram juli - फोटो : amar ujala

विस्तार

 

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सवाल: विधानसभा सत्र शुरू हो रहा है। कांग्रेस इस बार कैसी तैयारी के साथ उतर रही और आपके पास कौन से बड़े मुद्दे हैं?

हमारी तैयारी पूरी है। छह महीने में सरकार ने जो वादे किए थे, चाहे राइजिंग राजस्थान, क्राइम की बात हो या किसानों की बात हो, उन सब पर सवाल होंगे। एज्यूकेशन का सिस्टम पूरी तरह ठप हो चुका है। ये लोग इंग्लिश मीडियम स्कूलों को बंद करने बात करते आए हैं। इनमें इंफ्रास्ट्रक्चर देने की कोई व्यवस्था नहीं की है। नए कॉलेज नहीं दे पाए। यूनिवर्सिटीज का भी बुरा हाल है। छात्रसंघ चुनाव भी ये नहीं करवा पा रहे हैं। इन सारी बातों को लेकर विपक्ष विधानसभा में सरकार को घरने का काम करेगा। इसके अलावा भी बहुत से मुद्दे हैं जिन्हें हम क्षेत्रवार इकट्ठा करके आने वाले विधानसभा सत्र में उठाएंगे।
 
सवाल: पिछले सत्र में स्पीकर और विपक्ष का टकराव रहा। आने वाले सत्र से पहले क्या ऑल पार्टी मीटिंग में यह मुद्दा उठाया जाएगा?

देखिए स्पीकर पक्षपात कर रहेथे यह हमने कहा था। और यदि आने वाले सत्र को ये चलाना चाहते हैं, राजस्थान की जनता की बात को अच्छे से उठाना चाहते हैं और मैसेज देना चाहते हैं कि राजस्थान की विधानसभा पुराने नियम और परंपराओं से चलती है तो उन्हें विपक्ष की बात को सुनना होगा। नियम, कानून और परंपराओं से हमारा सदन चलता है। स्पीकर यदि उसे नहीं मानते हैं तो निश्चित रूप से हम विरोध करेंगे और जो सच्चाई है उसे जनता के सामने लाएंगे। हमारे प्रदेशाध्यक्ष को लेकर जिस प्रकार की टिप्पणी उन्होंने सदन में की वह नहीं होनी चाहिए थी। हमारे माफी मांगने के बाद भी उस बात को सदन की कार्रवाई से नहीं हटाया गया। इसलिए सर्वदलीय बैठक में इन सब बातों को हम रखेंगे। स्पीकर को निष्पक्ष होना चाहिए। उन्हें चाहिए कि विधानसभा नियम और प्रक्रियाओं से चले।

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सवाल: कांग्रेस का आरोप है कि सरकार के मंत्री जवाब नहीं देते। इस मुद्दे पर आप क्या करने जा रहे हैं?

सत्ता पक्ष जवाब नहीं दे तो स्पीकर की जिम्मेदारी है कि जवाब दिलवाए। सरकार के मंत्री सवालों का जवाब देने में पूरी तरह फेल रहे हैं। हमने राइजिंग राजस्थान को लेकर सवाल लगाया उसका आज तक जवाब नहीं आया। इसे हम सर्वदलीय बैठक में रखेंगे, बीएसी की बैठक में भी रखेंगे। स्पीकर साहब से मिलकर मैँ अलग से भी बात करूंगा कि हमारे जो रिपोर्टेड सवाल होते हैं उन्हें भी अग्राह्य कर दिया जाता है। ज्यादातर सवाल रूटीन के लगते हैं। लेकिन कुछ काम ऐसे हैं जो पूरे राजस्थान से जुड़े हैं। जैसे कानून व्यवस्था की बात है, राइजिंग राजस्थान की बात है। ईआरसीपी की  बात है। इस प्रकार के बड़े इश्यूज को लेकर हम बात करें तो उनका जवाब तो आना चाहिए।


 
सवाल: राजस्थान में कानून व्यवस्था को लेकर कांग्रेस लगातार हमलावर है, आप इसे किस तरह से देखते हैं?

सीएम के पास गृह विभाग है लेकिन उनके पास समय नहीं है। ज्यादातर समय उनका दिल्ली में ही बीतता है। वहां से समय मिल जाता है तो यहां बीजेपी के प्रोपागेंडा में चला जाता है। मुख्यमंत्री दो दिन तक रक्षाबंधन मनाते हैं लेकिन जब उन्हीं माता-बहनों की रक्षा नहीं कर पा रहे हैं। राजस्थान में दुष्कर्म की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। अखबार देखा होगा कि कल एक 8 साल की बच्ची का शव सूटकेस में मिला। एक कॉनस्टेबल ने अपने परिवार को तलवार से काट डाला। भीलवाड़ा, उदयपुर, जोधपुर, अलवर में देखा होगा कि यहां रोजाना दुष्कर्म की घटनाएं सामने आ रही हैं। कोई मॉनिटरिंग नहीं है। कोई देखने वाला नहीं है। ऐसा लग रहा है कि सरकार ने आंखे बंद कर ली है और पुलिस जो है वह अवैध माइनिंग और बजरी के काम में लगी पड़ी है। कानून व्यवस्था की हालत यह है कि बीजेपी का झंडा लगी गाड़ी किसी गाड़ी से टकरा जाए तो बीजेपी का नेता उस गाड़ी को बुरी तरह तोड़ सकता है और जब भीड़ उसे रोके तो उसे कुचलकर वहां से भाग भी सकता है। यह कानून व्यवस्था की हालत राजस्थान में हो चुकी है और सरकार आंकड़े जारी नहीं कर रही है।
 
सवाल: पिछले सत्र में कई बिल प्रवर समिति मे चले गए उनका क्या होगा?

यह पहली ऐसी सरकार है जिसमें एक ही बिल दो-दो बार प्रवर समिति में भेजने पड़े हों। अब तक परिपाटी यह रही है कि जो बिल प्रवर समिति को भेज रहे हैं उसमें विपक्ष के नेता से पूछकर विपक्ष के सदस्यों को लिया जाता है। लेकिन आज कल तो वह सिस्टम बंद हो चुका है और ये लोग अपनी मनमर्जी कर रहे हैं। मीटिंग्स ये लोग नहीं बुलाते हैं। प्रवर समिति का मतलब यह है कि कोई बिल अगर इसमें भेजा जाए तो उसकी कमियों पर इसमें अच्छे से चर्चा हो वह सब तो ये लोग कर नहीं रहे हैं।

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